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जनपद के 810 जलाशय होंगे प्रदूषण मुक्त, सर्वे शुरू

Sun, 29 Nov 2020 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 10:39 PM IST
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810 reservoirs in the district will be pollution free, survey started
अमृतपुर की कुठला झील। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर सेटेलाइट के जरिए चिह्नित किए गए जिले के 810 जलाशयों की सूची शासन से जारी की गई है। इन्हें प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक सप्ताह में सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है।
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इसके लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। जलाशयों से अवैध कब्जा हटाने के साथ इन्हें प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। जनपद में अवैध कब्जों के चलते सैकड़ों तालाब गायब हो चुके हैं।
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शहर में तो जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते तालाब पर कब्जा होने के साथ बहुमंजिला भवन भी बने खड़े हैं। अब एनजीटी की पहल से इनके दिन बहुरने की उम्मीद जगी है।
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एनजीटी की ओर से सेटेलाइट के जरिए जिले में 810 जल संग्रहण केंद्र चिह्नित कर सूची जारी की गई है। इनमें तालाब, पोखर, जलाशय, नाला व झील भी शामिल हैं।
इन जल संग्रहण केंद्रों का कायाकल्प करने के साथ गंदगी व प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही इन्हें अतिक्रमणमुक्त भी किया जाएगा। (संवाद)
जिले में शहर से ग्रामीण क्षेत्र में कई तालाबों पर अवैध कब्जा होने से यह विलुप्त हो चुके हैं। कहीं खेती की जा रही है तो कहीं इमारतें भी बनी खड़ी हैं। अब इन तालाबों को कब्जामुक्त करने का फरमान जारी किया गया है। जलाशयों की चौहद्दी भी दर्शायी गई है। इससे अवैध कब्जेदारों की उल्टी गिनती शुरू होना तय है।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के परियोजना निदेशक राजमणि वर्मा ने बताया कि सत्यापन के लिए मनरेगा के तकनीकी सहायकों को सर्वे में लगा दिया गया है। सत्यापन के बाद तालाबों व जल संग्रहण केंद्रों के कायाकल्प को एस्टीमेट बनेगा। स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा। इसमें मुख्य भूमिका वन विभाग की रहेगी।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभार पीके उपाध्याय ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी के माध्यम से काम कराया जाएगा। अतिक्रमण से मुक्त कराने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होगी।

काम कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में लेखपाल व ग्राम पंचायत सचिव कार्ययोजना तैयार करेंगे। जबकि शहर व कस्बों में यह जिम्मेदारी नगर निकायों को सौंपी गई है। इसमें तालाब, झील के साथ बड़े नालों को भी प्रदूषण मुक्त करने की कार्ययोजना है। इनकी गंदगी (जलकुंभी) आदि की भी सफाई कराकर जरूरत के अनुसार गहराई भी बढ़ाई जाएगी।
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