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यूरिया सस्ती होने से किसानों को मिलेगी राहत
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फर्रुखाबाद। लंबे समय से चल रही किसानों की मांग को स्वीकारते हुए शनिवार को सरकार ने यूरिया के दामों में कमी कर दी है। अब पूरे देश में यूरिया के रेट लगभग समान हो गए हैं। हालांकि किसानों को अब भी सरकारी मशीनरी पर भरोसा नहीं हैं। उनका कहना है कि भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों की वजह से किसानों को खाद महंगी दरों पर ही मिलती है।
उत्तर प्रदेश में खाद पर एसीटीएन टैक्स लगाया जाता था। इसी के चलते अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में खाद के रेट अधिक रहते थे। इसी के चलते किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे कि खाद के दाम कम किए जाएं। पड़ोसी राज्यों में भी यूरिया के दाम कम हैं। इसी के चलते शनिवार को सरकार ने यूरिया से एसीटीएन टैक्स हटा दिया है। इससे 299 रुपये में मिलने वाली यूरिया की 45 किलो की बोरी अब 265.50 रुपये की हो गई है। वहीं 330.50 रुपये की मिलने वाली 50 किलो यूरिया की बोरी 295 की हो गई है। इससे किसानों में खुशी तो है, लेकिन उनका मानना है कि किसानों को सरकार के दाम कम करने का फायदा कम ही मिल पाएगा। क्योंकि भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी खाद मंहगी दरों पर देते हैं। विरोध करने पर खाद देते ही नहीं है। मजबूरन फसल के लिए मंहगी दरों में ही खाद लेनी होती है।
हाल ही में आठ दुकानों के लाइसेंस हुए निलंबित
इसी साल की शुरुआत में जिला कृषि अधिकारी के नेतृत्व में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस दौरान छह दुकानों व दो सहकारी समितियों में खाद निर्धारित कीमत से अधिक दर पर यूरिया खाद बेची जा रही थी। इस पर सभी का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। शनिवार को कंपिल में सहकारी समिति पर अधिक यूरिया खाद के अधिक रुपये वसूलने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इस पर अध्यक्ष ने पहुंचकर मामला शांत कराया था।
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कृषि अधिकारी ने लगाई ड्यूटी
यूरिया के रेट कम होने के बाद जिला कृषि अधिकारी ने अपने विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी निगरानी के लिए लगा दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान से निर्धारित कीमत से अधिक रुपये नहीं वसूलने दिए जाएंगे। दूसरी ओर एआर कोआपरेटिव ने भी ड्यूटी लगाई हैं। जनपद में पिछले सप्ताह ही 1581 मीट्रीक टन यूरिया आई है। यूरिया खाद की जनपद में कमी नहीं है।
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उत्तर प्रदेश में खाद पर एसीटीएन टैक्स लगाया जाता था। इसी के चलते अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में खाद के रेट अधिक रहते थे। इसी के चलते किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे कि खाद के दाम कम किए जाएं। पड़ोसी राज्यों में भी यूरिया के दाम कम हैं। इसी के चलते शनिवार को सरकार ने यूरिया से एसीटीएन टैक्स हटा दिया है। इससे 299 रुपये में मिलने वाली यूरिया की 45 किलो की बोरी अब 265.50 रुपये की हो गई है। वहीं 330.50 रुपये की मिलने वाली 50 किलो यूरिया की बोरी 295 की हो गई है। इससे किसानों में खुशी तो है, लेकिन उनका मानना है कि किसानों को सरकार के दाम कम करने का फायदा कम ही मिल पाएगा। क्योंकि भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी खाद मंहगी दरों पर देते हैं। विरोध करने पर खाद देते ही नहीं है। मजबूरन फसल के लिए मंहगी दरों में ही खाद लेनी होती है।
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हाल ही में आठ दुकानों के लाइसेंस हुए निलंबित
इसी साल की शुरुआत में जिला कृषि अधिकारी के नेतृत्व में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस दौरान छह दुकानों व दो सहकारी समितियों में खाद निर्धारित कीमत से अधिक दर पर यूरिया खाद बेची जा रही थी। इस पर सभी का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। शनिवार को कंपिल में सहकारी समिति पर अधिक यूरिया खाद के अधिक रुपये वसूलने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इस पर अध्यक्ष ने पहुंचकर मामला शांत कराया था।
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कृषि अधिकारी ने लगाई ड्यूटी
यूरिया के रेट कम होने के बाद जिला कृषि अधिकारी ने अपने विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी निगरानी के लिए लगा दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान से निर्धारित कीमत से अधिक रुपये नहीं वसूलने दिए जाएंगे। दूसरी ओर एआर कोआपरेटिव ने भी ड्यूटी लगाई हैं। जनपद में पिछले सप्ताह ही 1581 मीट्रीक टन यूरिया आई है। यूरिया खाद की जनपद में कमी नहीं है।