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Farrukhabad News: कटान से 300 बीघा भूमि गंगा में समाई

Mon, 02 Sep 2024 01:23 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2024 01:23 AM IST
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300 bighas of land submerged in Ganga due to erosion
अमृतपुर/कंपिल। गंगा का जलस्तर गिरने से खेतों में कटान तेज हो गया है। वहीं, कंपिल क्षेत्र में 300 बीघा भूमि गंगा में समा गई है। इधर, गांवों में भरा बाढ़ का पानी उतरने से ग्रामीणों को राहत मिली है। हालांकि बाढ़ समाप्त होने से गांवों में संक्रामक रोग पांव पसार रहे हैं।
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गंगा की बाढ़ का दंश डेढ़ माह से झेल रहे ग्रामीणों को लगातार जलस्तर गिरने से राहत मिली है। रविवार को गंगा का जलस्तर 136.45 मीटर से 20 सेंटीमीटर कम होकर 136.25 मीटर पर आ गया। चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 35 सेंटीमीटर नीचे जलस्तर पहुंचने से अब बाढ़ का खतरा टल गया है।
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नरौरा बांध से गंगा में 38740 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तेजी से जलस्तर गिरने से खेतों में कटान तेज हो गया है। गांव व घरों से बाढ़ का पानी उतरने के बाद उठ रही सड़ांध से ग्रामीण परेशान हैं। इससे बाढ़ग्रस्त गांव में जुकाम, बुखार, खांसी, खुजली की बीमारी फैल रही है। स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पॉन्स टीम गांव में न जाने से ग्रामीण झोलाछाप से दवा लेने को मजबूर हैं।
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ग्रामीण सुरेश चंद्र, सतीश कुमार, विश्वास, जगनिवास, रामरहीश, सुधीर कुमार का कहना है कि बाढ़ आने से मजदूरी भी नहीं मिल रही। इससे घर खर्च चलाना मुश्किल है। बाढ़ समाप्त हो जाने पर अब काम व मजदूरी मिलने की उम्मीद है। गांव तीसराम की मड़ैया की सड़क बाढ़ से कट जाने से राह निकलना मुश्किल है।
प्राथमिक विद्यालय के पास सड़क कटने से गहरा गड्ढा हो गया है। इसे पार करने के लिए गड्ढे में नाव बांध दी। ग्रामीण नाव पर चढ़कर निकल रहे हैं। आशा की मड़ैया, बरुआ मार्ग पर अभी पानी भरा है। इससे ग्रामीण पानी से होकर गुजर रहे हैं। रामगंगा का जलस्तर 135.55 मीटर से 20 सेंटीमीटर कम होकर 135.35 मीटर पर आ गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 4823 क्यूसेक पानी रामगंगा में छोड़ा गया है।


वहीं, कंपिल के दो गांवों की करीब 300 बीघा कृषि भूमि गंगा में समा गई। गांव सिंघनपुर पूरन की 15 बीघा, शशि की 12 बीघा, नवाब की 40 बीघा, फुल्लू की 20 बीघा, उस्ताद की 17 बीघा, रामनिवास की 14 बीघा, महाबीर की 22 बीघा, उदयवीर की 15 बीघा भूमि गंगा की धार में कट गई। गांव पथरा मई निवासी सरदार हरजीत सिंह की 40 बीघा, उधम सिंह की तीन बीघा, म्यान सिंह की 15 बीघा, सुखराम की 10 बीघा, देव सिंह की पांच बीघा जमीन कटान से गंगा में समा चुकी है। इससे ग्रामीण परेशान हैं।
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