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लोहिया अस्पताल की 30 लाख की देनदारी फंसी

Thu, 31 Mar 2022 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 31 Mar 2022 11:24 PM IST
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30 lakh liability of Lohia Hospital stuck
फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत बजट न मिलने से लोहिया अस्पताल पर 30 लाख रुपये की देनदारी फंस गई है। इस योजना से संचालित कई कार्यों में दिक्कत आने की आशंका बनी है। अब अगले वित्तीय वर्ष के बजट का इंतजार करना होगा। इससे मरीजों की जरूरत के कई सामानों की खरीद भी प्रभावित हो सकती है।
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डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में लांड्री, पैथोलॉजी, लैब, हेल्प डेस्क, एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) आदि का संचालन एनआरएचएम से मिलने वाले बजट से होता है। चुनाव से पहले से ही नए बजट पर रोक लग गई थी।
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भुगतान के आश्वासन पर अस्पताल प्रशासन करीब 30 लाख रुपये के जरूरत का सामान खरीद चुका है। विधानसभा चुनाव के साथ एमएलसी चुनाव की अधिसूचना लगने से फिलहाल बजट मिलना मुश्किल है।
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गुरुवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन योजना का पूरा बजट खत्म हो गया। लिहाजा सामान देने वाली फर्मों की रकम फंस गई है।
ऐसे में अगले वित्तीय वर्ष में बजट आने पर ही भुगतान करना संभव होगा। लिहाजा कई फर्में भी सामान देने से आनाकानी करने लगी हैं।
माना जा रहा है कि अस्पताल में टायफाइड जांच की किटें खत्म होने के पीछे भी बजट ही एक बड़ा कारण रहा। नए वित्तीय वर्ष का बजट आने में देरी हुई, तो मरीजों को दिक्कत होना तय है।
डॉक्टरों की मांग के लिए एमडी को भेजा पत्र
लोहिया अस्पताल इन दिनों डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि गुरुवार को स्वास्थ्य महानिदेशक (एमडी) को पत्र भेजकर इमरजेंसी चलाने के लिए तीन ईएमओ, दो सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, दो बाल रोग विशेषज्ञ भेजने की मांग की है।
ज्वाइनिंग के बाद मेडिकल पर बालरोग विशेषज्ञ
शासन ने ललितपुर महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान को लोहिया अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर स्थानांतरण किया था। वह जनवरी में ज्वाइनिंग कर मेडिकल पर चले गए।
इससे बीमार बच्चों का इलाज पीकू वार्ड में होता था, मगर अब वहां भी संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त होने से दिक्कत होगी।
सफाई कमियों को मानदेय नहीं
लोहिया अस्पताल में सफाई के लिए एक निजी कंपनी के कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन्हें नवंबर माह से मानदेय नहीं दिया गया है। इससे सफाई कर्मियों को दिक्कत आ रही है। ठेकेदार को सफाई में प्रयोग होने वाला सामान खरीदने में भी परेशानी है।

‘अस्पताल पर देनदारी काफी ज्यादा है। उनकी कोशिश रहेगी कि मरीजों को दिक्कत न होे। सरकार के बजट आने का इंतजार करना उनकी मजबूरी है। बकाया बिलों का भुगतान बजट मिलने पर ही होगा।’
--डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस लोहिया अस्पताल।
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