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गो सदन में फिर एक गोवंश की मौत
Updated Thu, 22 Nov 2018 11:56 PM IST
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फर्रुखाबाद। कटरी धर्मपुर स्थित राजकीय गोसदन में बंद पशुओं के मरने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। बुधवार देर शाम फिर एक सांड़ की मौत हो गई। पालिका कर्मचारियों ने आनन-फानन शव दफना दिया। बताते हैं कि एसडीएम सदर को इसकी सूचना तक नहीं दी गई। यही नहीं दो दिन से चिकित्सीय टीम भी नहीं आई है। वहां पर अब तक सात पशुओं की मौत हो चुकी है।
राजकीय गोसदन में लगातार हो रही पशुओं की मौत के बाद चार दिन पहले एसडीएम सदर व प्रभारी ईओ और सीवीओ ने हर दूसरे-तीसरे दिन गोसदन में चिकित्सीय टीम भेजने के निर्देश दिए थे। पर उनके निर्देश हवा हवाई साबित हो रहे हैं। बुधवार को एक सांड़ गंभीर हालत में पड़ा था। बताते हैं कि इसकी सूचना भी पशु चिकित्सक को दी गई लेकिन कोई भी इलाज करने नहीं पहुंचा। दोपहर बाद सांड़ ने दम तोड़ दिया। हैरत की बात तो यह है कि गोसदन के प्रबंधक और नगर पालिका के कर्मचारियों ने इसकी सूचना एसडीएम सदर को देना मुनासिब नहीं समझा। नगर पालिका के कर्मचारी शाम को जेसीबी लेकर गोसदन पहुंचे और शव को दफना दिया।
इस संबंध में जब गोसदन के प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव से बात करने के लिए फोन मिलाया गया तो उनकी पत्नी ने फोन उठाया। उन्होंने बताया कि प्रबंधक की तबियत खराब है और वह पांच दिन के चिकित्सीय अवकाश पर हैं। हैरत की बात तो यह है कि रोजाना पशुओं की हो रही मौतों के बावजूद जिला प्रशासन चुप्पी साधे है।
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राजकीय गोसदन में लगातार हो रही पशुओं की मौत के बाद चार दिन पहले एसडीएम सदर व प्रभारी ईओ और सीवीओ ने हर दूसरे-तीसरे दिन गोसदन में चिकित्सीय टीम भेजने के निर्देश दिए थे। पर उनके निर्देश हवा हवाई साबित हो रहे हैं। बुधवार को एक सांड़ गंभीर हालत में पड़ा था। बताते हैं कि इसकी सूचना भी पशु चिकित्सक को दी गई लेकिन कोई भी इलाज करने नहीं पहुंचा। दोपहर बाद सांड़ ने दम तोड़ दिया। हैरत की बात तो यह है कि गोसदन के प्रबंधक और नगर पालिका के कर्मचारियों ने इसकी सूचना एसडीएम सदर को देना मुनासिब नहीं समझा। नगर पालिका के कर्मचारी शाम को जेसीबी लेकर गोसदन पहुंचे और शव को दफना दिया।
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इस संबंध में जब गोसदन के प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव से बात करने के लिए फोन मिलाया गया तो उनकी पत्नी ने फोन उठाया। उन्होंने बताया कि प्रबंधक की तबियत खराब है और वह पांच दिन के चिकित्सीय अवकाश पर हैं। हैरत की बात तो यह है कि रोजाना पशुओं की हो रही मौतों के बावजूद जिला प्रशासन चुप्पी साधे है।
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