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कर्मचारी हो गए पूरे, काम अभी भी अधूरे
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। परिवहन कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है, फिर भी काम अधूरे पड़े हैं। नए वाहनों की करीब चार हजार पत्रावलियां पंजीयन के लिए कार्यालय में डंप पड़ी हैं। इससे नए वाहन सड़कों पर बिना नंबर के दौड़ रहे हैं। स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों के घरों में डाक से नहीं जा रहे। इससे आवेदकों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। 11 कर्मचारी परिवहन कार्यालय में कार्यरत हैं।
परिवहन कार्यालय फतेहगढ़ में कर्मचारियों की कमी होने से वाहनों से संबंधित कोई भी काम समय से नहीं होता था। इससे आए दिन विवाद की स्थिति रहती थी। आरटीओ कानपुर ने कार्यालय का निरीक्षण किया और कर्मचारियों की तैनाती करनी शुरू की। अब कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है। लिपिकों को पटलों का आवंटन हो गया है। अभिषेक त्रिवेदी को समस्त कैश, अजीत सचान को कामर्शियल, विमलेश द्विवेदी को लाइसेंस अनुभाग, बीके आर्या को हल्के वाहन, सुधीर कुमार हंस को फार्म वितरण व डाक का काम दिया गया है। एक अकाउंटेंट तैनात है। इसके अतिरिक्त लिपिक राजेंद्र वर्मा अतिरिक्त हैं। इसके अलावा सर्वर व कंप्यूटर विभाग में डीबीए राजन सिंह, दो कर्मचारी रोजमार्टा कार्यदायी संस्था से लगे हैं।
कर्मचारियों की संख्या पूरी होने पर भी कार्यालय में काम पटरी पर नहीं लौटा है। बाइक, कार, स्कूटर समेत अन्य नए वाहनों की करीब चार हजार पत्रावली पंजीयन को कार्यालय में लंबित पड़ी हैं। इनका निस्तारण न होने से नए वाहन बिना नंबर सड़क पर दौड़ रहे हैं। इससे वाहन स्वामी परेशान हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनने का काम ऑन लाइन हो गया है। स्थाई लाइसेंस बनने के बाद डाक से आवेदकों के घरों में भेजने में सिस्टम है। विभागीय कर्मचारी लाइसेंस बनने के बाद आवेदकों के घरों में नहीं भेजते। इससे वह कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। मोहम्मदाबाद के सुजीत कुमार ने बताया कि स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनने की उनके पास करीब एक माह पूर्व सूचना मोबाइल पर आई थी। अभी तक उनके घर में लाइसेंस बनकर नहीं पहुंचा।
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यह है नियम
नए वाहन खरीदने पर डीलर प्वाइंट पर वाहन पंजीयन फीस जमा होती है। पंजीयन को पत्रावली तैयार होकर एआरटीओ कार्यालय जाती है। वहां से पंजीयन होने पर नंबर जारी होकर डीलर के पास भेजा जाता है। वह वाहन मालिक को पंजीयन का कागज देता है। इस सब काम में एक सप्ताह में पूरा होने का नियम है। यहां ऐसा नहीं होता है। मालिकों को वाहन पंजीयन पाने के लिए महीनों चक्कर लगाना पड़ता है।
क्या कहते जिम्मेदार
नए वाहनों की पंजीयन पत्रावली लंबित पड़ी हैं। उनका सत्यापन करा लिया गया है। अब कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है। जल्द सभी लंबित पत्रावलियों का निस्तारण कर नंबर जारी कर दिया जाएगा। धीरे-धीरे सभी समस्याओं को समाप्त किया जा रहा है। - मोहम्मद हसीब, एआरटीओ प्रशासन
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फर्रुखाबाद। परिवहन कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है, फिर भी काम अधूरे पड़े हैं। नए वाहनों की करीब चार हजार पत्रावलियां पंजीयन के लिए कार्यालय में डंप पड़ी हैं। इससे नए वाहन सड़कों पर बिना नंबर के दौड़ रहे हैं। स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों के घरों में डाक से नहीं जा रहे। इससे आवेदकों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। 11 कर्मचारी परिवहन कार्यालय में कार्यरत हैं।
परिवहन कार्यालय फतेहगढ़ में कर्मचारियों की कमी होने से वाहनों से संबंधित कोई भी काम समय से नहीं होता था। इससे आए दिन विवाद की स्थिति रहती थी। आरटीओ कानपुर ने कार्यालय का निरीक्षण किया और कर्मचारियों की तैनाती करनी शुरू की। अब कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है। लिपिकों को पटलों का आवंटन हो गया है। अभिषेक त्रिवेदी को समस्त कैश, अजीत सचान को कामर्शियल, विमलेश द्विवेदी को लाइसेंस अनुभाग, बीके आर्या को हल्के वाहन, सुधीर कुमार हंस को फार्म वितरण व डाक का काम दिया गया है। एक अकाउंटेंट तैनात है। इसके अतिरिक्त लिपिक राजेंद्र वर्मा अतिरिक्त हैं। इसके अलावा सर्वर व कंप्यूटर विभाग में डीबीए राजन सिंह, दो कर्मचारी रोजमार्टा कार्यदायी संस्था से लगे हैं।
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कर्मचारियों की संख्या पूरी होने पर भी कार्यालय में काम पटरी पर नहीं लौटा है। बाइक, कार, स्कूटर समेत अन्य नए वाहनों की करीब चार हजार पत्रावली पंजीयन को कार्यालय में लंबित पड़ी हैं। इनका निस्तारण न होने से नए वाहन बिना नंबर सड़क पर दौड़ रहे हैं। इससे वाहन स्वामी परेशान हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनने का काम ऑन लाइन हो गया है। स्थाई लाइसेंस बनने के बाद डाक से आवेदकों के घरों में भेजने में सिस्टम है। विभागीय कर्मचारी लाइसेंस बनने के बाद आवेदकों के घरों में नहीं भेजते। इससे वह कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। मोहम्मदाबाद के सुजीत कुमार ने बताया कि स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनने की उनके पास करीब एक माह पूर्व सूचना मोबाइल पर आई थी। अभी तक उनके घर में लाइसेंस बनकर नहीं पहुंचा।
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यह है नियम
नए वाहन खरीदने पर डीलर प्वाइंट पर वाहन पंजीयन फीस जमा होती है। पंजीयन को पत्रावली तैयार होकर एआरटीओ कार्यालय जाती है। वहां से पंजीयन होने पर नंबर जारी होकर डीलर के पास भेजा जाता है। वह वाहन मालिक को पंजीयन का कागज देता है। इस सब काम में एक सप्ताह में पूरा होने का नियम है। यहां ऐसा नहीं होता है। मालिकों को वाहन पंजीयन पाने के लिए महीनों चक्कर लगाना पड़ता है।
क्या कहते जिम्मेदार
नए वाहनों की पंजीयन पत्रावली लंबित पड़ी हैं। उनका सत्यापन करा लिया गया है। अब कर्मचारियों की संख्या पूरी हो गई है। जल्द सभी लंबित पत्रावलियों का निस्तारण कर नंबर जारी कर दिया जाएगा। धीरे-धीरे सभी समस्याओं को समाप्त किया जा रहा है। - मोहम्मद हसीब, एआरटीओ प्रशासन