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49 शौचालय बने और गांव हो गया ओडीएफ
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नवाबगंज(फर्रुखाबाद)। जिले को ओडीएफ करने के नाम पर बड़ी अनियमितता बरती जा रही है। ग्राम पंचायत ललई में बहुत कम शौचालय बनाकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। वहीं, इस गांव के लोग आज भी खुले में शौच जा रहे हैं। ओडीएफ की सूची में शामिल अधिकांश ग्राम पंचायतों का यही हाल है।
नवाबगंज विकासखंड की गांव ललई में 350 और उसके मजरा ढमढेरा में 140 परिवार रहते हैं। ग्राम प्रधान अवनीश चंद्र ने बेसलाइन सर्वे में 360 शौचालयों की डिमांड भेजी थी। इसके बावजूद खंड विकास कार्यालय नवाबगंज ने महज 49 शौचालय देकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया। ग्राम प्रधान ने बताया कि उसने इसकी शिकायत जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा डीपीआरओ से की। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रधान ने बताया कि उन्होंने जो सूची बेसलाइन सर्वे के मुताबिक भेजी थी, उसी के अनुसार शौचालय बनवाए जाएं, अन्यथा वह मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। अभी भी गांव के करीब तीन सौ से अधिक परिवारों को शौचालयों की जरूरत है। एडीओ प्रेमपाल ने बताया कि पूरे शौचालय गांव को नहीं मिल पाए हैं। प्रधान से लिस्ट दोबारा मांगी जाएगी। मामले की जांच कर शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे।
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प्रधान को बेसलाइन सर्वे की जानकारी नहीं होगी। बेसलाइन सर्वे में जितने शौचालय थे, उसी के हिसाब से शौचालयों का आवंटन किया जा रहा है। जल्द ही भारत सरकार दोबारा बेसलाइन सर्वे करवाएगी। तब शौचालय दिए जाएंगे। - अमित त्यागी, डीपीआरओ
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नवाबगंज(फर्रुखाबाद)। जिले को ओडीएफ करने के नाम पर बड़ी अनियमितता बरती जा रही है। ग्राम पंचायत ललई में बहुत कम शौचालय बनाकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। वहीं, इस गांव के लोग आज भी खुले में शौच जा रहे हैं। ओडीएफ की सूची में शामिल अधिकांश ग्राम पंचायतों का यही हाल है।
नवाबगंज विकासखंड की गांव ललई में 350 और उसके मजरा ढमढेरा में 140 परिवार रहते हैं। ग्राम प्रधान अवनीश चंद्र ने बेसलाइन सर्वे में 360 शौचालयों की डिमांड भेजी थी। इसके बावजूद खंड विकास कार्यालय नवाबगंज ने महज 49 शौचालय देकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया। ग्राम प्रधान ने बताया कि उसने इसकी शिकायत जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा डीपीआरओ से की। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्रधान ने बताया कि उन्होंने जो सूची बेसलाइन सर्वे के मुताबिक भेजी थी, उसी के अनुसार शौचालय बनवाए जाएं, अन्यथा वह मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। अभी भी गांव के करीब तीन सौ से अधिक परिवारों को शौचालयों की जरूरत है। एडीओ प्रेमपाल ने बताया कि पूरे शौचालय गांव को नहीं मिल पाए हैं। प्रधान से लिस्ट दोबारा मांगी जाएगी। मामले की जांच कर शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे।
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प्रधान को बेसलाइन सर्वे की जानकारी नहीं होगी। बेसलाइन सर्वे में जितने शौचालय थे, उसी के हिसाब से शौचालयों का आवंटन किया जा रहा है। जल्द ही भारत सरकार दोबारा बेसलाइन सर्वे करवाएगी। तब शौचालय दिए जाएंगे। - अमित त्यागी, डीपीआरओ