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अलेपुर पीत धौलेश्वर गांव में फैली बीमारी
Updated Tue, 26 Sep 2017 11:47 PM IST
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शमसाबाद। विकास खंड क्षेत्र के गांव अलेपुर पीत धौलेश्वर में संक्रामक रोगों से एक सप्ताह के अंदर कई जान जा चुकी है और कई लोग बीमार हैं। कई बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जानकारी देने के बावजूद चिकित्सीय टीम गांव नहीं पहुंची है।
धौलेश्वर गांव में सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी जैसे संक्रामक रोग फैले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संक्रामक रोग फैलने की जानकारी सीएचसी शमसाबाद में चिकित्सकों को दी, मगर कोई चिकित्सीय टीम गांव नहीं आई।
गिरंद सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी ओमवती को तीन दिन से बुखार आ रहा था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके तीन पुत्र व एक पुत्री है। उमेशचंद्र का कहना है कि गर्भवती पत्नी नीतू (22) को चार दिन से बुखार आ रहा था। जिला मुख्यालय स्थित नर्सिंगहोम में भर्ती कराया तो चिकित्सक ने जांच के दौरान प्लेटलेट्स कम होना बताया। सोमवार शाम पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया।
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इस दौरान पत्नी की भी हालत बिगड़ गई। उपचार के दौरान रात 12 बजे नीतू की मौत हो गई। इसी तरह छह दिन पहले गांव के ही विशुन पाल (48) को भी बुखार आया था। परिजनों ने कस्बा स्थित नर्सिंगहोम ले गए तो चिकित्सक ने बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर परिजन उसे आगरा ले गए। परिजनों ने बताया दो दिन तक इलाज के बाद जब फायदा नहीं मिला तो सैफई ले जाते समय विशुन पाल की रास्ते में मौत हो गई।
उधर, सीएचसी शमसाबाद के अधीक्षक डॉ. धन सिंह ने बताया गांव में संक्रामक रोग फैलने की जानकारी उन्हें किसी भी एएनएम और आशा ने नहीं दी है। जांच कराकर एएनएम और आशा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गांव में चिकित्सीय टीम भी बुधवार को भेजेंगे।
गांव से पलायन करने लगे लोग
जहानगंज। ब्लाक क्षेत्र के गांव खेड़ा मजरा में फैले बुखार के कारण ग्रामीणों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को जांच करने पहुंची चिकित्सीय टीम को ग्रामीणों ने भगा दिया। उनका आरोप था कि चिकित्सीय टीम जांच के लिए कोई भी उपकरण साथ नहीं लाई थी। वहीं एक अन्य टीम ने पहुंचकर ग्रामीणों की स्लाइड बनाई।
जहानगंज के गांव मजरा खेड़ा में करीब एक पखवारे से बुखार फैला है।
बुखार से दो लोगों की मौत के बाद से ग्रामीण दहशत में हैं। गांव के विमलेश कटियार (35) अपनी पत्नी उर्मिला देवी (32) के साथ मकान में ताला डालकर ससुराल इटावा चले गए हैं। इसी तरह सेवानिवृत्त शिक्षक सुभाष कटियार (74) पत्नी पुष्पा (62), पुत्र पुरषोत्तम (35) और बहू साधना (32) के साथ गांव के बाहर बने अपने दूसरे मकान में रहने के लिए चले गए। इन लोगों का कहना था कि गांव में संक्रामक रोग फैला है, जिससे उनके परिजन भी चपेट में आ सकते हैं।
वहीं मलेरिया टीम प्रभारी डॉ. आरके सिंह के साथ गांव पहुंचे लेकिन जांच के लिए अपने साथ कोई उपकरण नहीं ले गए। इससे गुस्साए संतोष, श्यामवीर, संदीप, प्रमोद कुमार, विपिन कुमार, दिलीप और नीलेश ने नाराजगी जताते हुए टीम प्रभारी से कहा कि खाली हाथ आने से क्या फायदा।
कोई भी उपकरण न होने से वह जांच क्या करेंगे। ग्रामीणों ने टीम को वापस भेज दिया। इसके बाद गांव आई आरबीएस टीम ने श्यामवीर के पुत्र राजकुमार (6), बचित सैनी (50) की स्लाइड बनाकर जांच की। बुखार की पुष्टि होने पर पीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप कटियार ने दोनों को लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि लोहिया अस्पताल में भी ठीक तरह से इलाज नहीं मिलता है।
-संक्रामक बीमारियों से सात दिन में चार मौत
-गांव में हर घर में लोग बीमार, नहीं पहुंची डॉक्टरों की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
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धौलेश्वर गांव में सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी जैसे संक्रामक रोग फैले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संक्रामक रोग फैलने की जानकारी सीएचसी शमसाबाद में चिकित्सकों को दी, मगर कोई चिकित्सीय टीम गांव नहीं आई।
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गिरंद सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी ओमवती को तीन दिन से बुखार आ रहा था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके तीन पुत्र व एक पुत्री है। उमेशचंद्र का कहना है कि गर्भवती पत्नी नीतू (22) को चार दिन से बुखार आ रहा था। जिला मुख्यालय स्थित नर्सिंगहोम में भर्ती कराया तो चिकित्सक ने जांच के दौरान प्लेटलेट्स कम होना बताया। सोमवार शाम पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया।
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इस दौरान पत्नी की भी हालत बिगड़ गई। उपचार के दौरान रात 12 बजे नीतू की मौत हो गई। इसी तरह छह दिन पहले गांव के ही विशुन पाल (48) को भी बुखार आया था। परिजनों ने कस्बा स्थित नर्सिंगहोम ले गए तो चिकित्सक ने बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर परिजन उसे आगरा ले गए। परिजनों ने बताया दो दिन तक इलाज के बाद जब फायदा नहीं मिला तो सैफई ले जाते समय विशुन पाल की रास्ते में मौत हो गई।
उधर, सीएचसी शमसाबाद के अधीक्षक डॉ. धन सिंह ने बताया गांव में संक्रामक रोग फैलने की जानकारी उन्हें किसी भी एएनएम और आशा ने नहीं दी है। जांच कराकर एएनएम और आशा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गांव में चिकित्सीय टीम भी बुधवार को भेजेंगे।
गांव से पलायन करने लगे लोग
जहानगंज। ब्लाक क्षेत्र के गांव खेड़ा मजरा में फैले बुखार के कारण ग्रामीणों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को जांच करने पहुंची चिकित्सीय टीम को ग्रामीणों ने भगा दिया। उनका आरोप था कि चिकित्सीय टीम जांच के लिए कोई भी उपकरण साथ नहीं लाई थी। वहीं एक अन्य टीम ने पहुंचकर ग्रामीणों की स्लाइड बनाई।
जहानगंज के गांव मजरा खेड़ा में करीब एक पखवारे से बुखार फैला है।
बुखार से दो लोगों की मौत के बाद से ग्रामीण दहशत में हैं। गांव के विमलेश कटियार (35) अपनी पत्नी उर्मिला देवी (32) के साथ मकान में ताला डालकर ससुराल इटावा चले गए हैं। इसी तरह सेवानिवृत्त शिक्षक सुभाष कटियार (74) पत्नी पुष्पा (62), पुत्र पुरषोत्तम (35) और बहू साधना (32) के साथ गांव के बाहर बने अपने दूसरे मकान में रहने के लिए चले गए। इन लोगों का कहना था कि गांव में संक्रामक रोग फैला है, जिससे उनके परिजन भी चपेट में आ सकते हैं।
वहीं मलेरिया टीम प्रभारी डॉ. आरके सिंह के साथ गांव पहुंचे लेकिन जांच के लिए अपने साथ कोई उपकरण नहीं ले गए। इससे गुस्साए संतोष, श्यामवीर, संदीप, प्रमोद कुमार, विपिन कुमार, दिलीप और नीलेश ने नाराजगी जताते हुए टीम प्रभारी से कहा कि खाली हाथ आने से क्या फायदा।
कोई भी उपकरण न होने से वह जांच क्या करेंगे। ग्रामीणों ने टीम को वापस भेज दिया। इसके बाद गांव आई आरबीएस टीम ने श्यामवीर के पुत्र राजकुमार (6), बचित सैनी (50) की स्लाइड बनाकर जांच की। बुखार की पुष्टि होने पर पीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप कटियार ने दोनों को लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि लोहिया अस्पताल में भी ठीक तरह से इलाज नहीं मिलता है।
-संक्रामक बीमारियों से सात दिन में चार मौत
-गांव में हर घर में लोग बीमार, नहीं पहुंची डॉक्टरों की टीम
अमर उजाला ब्यूरो