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गंगा व रामगंगा का जलस्तर घटने से कटान तेज
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:24 PM IST
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फर्रुखाबाद/अमृतपुर। गंगा और रामगंगा का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है, इसलिए ग्रामीण डरे हैं। कटान तेज होने के कारण अलादपुर भटौली के ग्रामीणों ने मकान तोड़ने शुरू कर दिए हैं। अभी भी कई गांवों को जाने वाले रास्ते पर पानी भरा है। जान जोखिम में डालकर ग्रामीण पानी के बीच से आवागमन कर रहे हैं।
शुक्रवार को नरौरा से 54868 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस कारण जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। जलस्तर 136.70 से कम होकर 136.45 मीटर पर आ गया है। पानी कम होने के कारण तीसराम की मडै़या में कटान फिर से शुरू हो गई है। यह गांव अब पूरी तरह कटने की कगार पर पहुंच गया है।
जिन लोगों के मकान गांव में अभी तक बचे थे। वह भी कटान की चपेट में आने की स्थिति मेें हैं। इस कारण ग्रामीण अपने मकानोें को खाली कर रिश्तेदार या दूसरी जगह जाने लगे हैं। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 3936 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की मात्रा कम होने के कारण जलस्तर कम हो गया है।
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जलस्तर 136.15 से कम होकर 136.10 मीटर पर आ गया है। पानी कम होने से रामगंगा ने अलादपुर भटौली, कोलासोता मेें कटान तेज है। अलादपुर भटौली में कटान तेजी से होने के कारण ग्रामीण रामदीन, दयाराम, शिवरतन, मनोज ने शुक्रवार को अपने मकान को तोड़ना शुरू कर दिया है।
गांव के लोग कटान से भयभीत है। गांव भुड्डन की मडै़या को जाने वाले रास्ते पर पानी भरा हुआ है। इस कारण गांव के लोगों ने लकड़ी का पुल खुद बनाया है। इसके माध्यम से वह आवागमन कर रहे है। आशा की मडै़या मार्ग पर भरा पानी कम हो गया है। फिर भी इससे निकलने में खतरा है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे है।
बीमारियों से पीड़ित हैं ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बीमारियों से पीड़ित हैं। गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ने व घटने से गांवों में संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे है। इस कारण बुखार, खासी, जुखाम, आंखों में जलन, पेट में दिक्कत जैसी बीमारियों से ग्रामीण परेशान हैं।
-नरौरा से 54868 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इस कारण जलस्तर में गिरावट
-डरे हुए ग्रामीण तोड़ने लगे मकान, जलभराव से आवागमन में हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
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शुक्रवार को नरौरा से 54868 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस कारण जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। जलस्तर 136.70 से कम होकर 136.45 मीटर पर आ गया है। पानी कम होने के कारण तीसराम की मडै़या में कटान फिर से शुरू हो गई है। यह गांव अब पूरी तरह कटने की कगार पर पहुंच गया है।
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जिन लोगों के मकान गांव में अभी तक बचे थे। वह भी कटान की चपेट में आने की स्थिति मेें हैं। इस कारण ग्रामीण अपने मकानोें को खाली कर रिश्तेदार या दूसरी जगह जाने लगे हैं। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 3936 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की मात्रा कम होने के कारण जलस्तर कम हो गया है।
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जलस्तर 136.15 से कम होकर 136.10 मीटर पर आ गया है। पानी कम होने से रामगंगा ने अलादपुर भटौली, कोलासोता मेें कटान तेज है। अलादपुर भटौली में कटान तेजी से होने के कारण ग्रामीण रामदीन, दयाराम, शिवरतन, मनोज ने शुक्रवार को अपने मकान को तोड़ना शुरू कर दिया है।
गांव के लोग कटान से भयभीत है। गांव भुड्डन की मडै़या को जाने वाले रास्ते पर पानी भरा हुआ है। इस कारण गांव के लोगों ने लकड़ी का पुल खुद बनाया है। इसके माध्यम से वह आवागमन कर रहे है। आशा की मडै़या मार्ग पर भरा पानी कम हो गया है। फिर भी इससे निकलने में खतरा है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे है।
बीमारियों से पीड़ित हैं ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बीमारियों से पीड़ित हैं। गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ने व घटने से गांवों में संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे है। इस कारण बुखार, खासी, जुखाम, आंखों में जलन, पेट में दिक्कत जैसी बीमारियों से ग्रामीण परेशान हैं।
-नरौरा से 54868 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इस कारण जलस्तर में गिरावट
-डरे हुए ग्रामीण तोड़ने लगे मकान, जलभराव से आवागमन में हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो