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जिले में छह माह में 15 गुने बच्चे हो गए अति कुपोषित

Tue, 05 Oct 2021 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:18 PM IST
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15 times children in the district became very malnourished in six months
फर्रुखाबाद। कुपोषण से जारी जंग के बीच जनपद में अतिकुपोषित बच्चों के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बीते छह माह में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में करीब 15 गुना की वृद्धि हुई है। ताजा आंकड़ों ने अभियान पर तो सवाल उठाए ही हैं साथ ही अधिकारियों की सक्रियता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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सितंबर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कुपोषित बच्चों का चिह्नांकन कराया गया। मंगलवार को डीपीओ कार्यालय में सभी ब्लाकों के रिपोर्ट पहुंची। इसमें 1194 बच्चे गंभीर अति कुपोषित (सैम), जबकि 2130 बच्चे अति कुपोषित (मैम) पाए गए। कुल 3324 अति कुपोषित बच्चे जिले में होने की जानकारी सामने आई। इससे ठीक छह माह पूर्व मार्च में जिले में 73 बच्चे सैम व 228 बच्चे मैम थे। इनमें 85 बच्चों की हालत में सुधार हुआ था और फिर अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटकर 216 रह गई थी। जनपद में अल्प कुपोषित बच्चों की संख्या 6536 थी। इस तरह जिले में पिछले छह माह में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 216 से बढ़कर 3324 हो गई है।
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वैसे कुपोषण से निपटने के लिए जिले में 1752 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनके माध्यम से सरकार कुपोषण से जंग लड़ रही है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को पोषित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर दाल, रिफाइंड, खाद्य तेल, दलिया, चने की दाल आदि खाद्य सामग्री वितरित करने के आदेश हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग से पोषण अभियान भी चलाया जाता है। फिलहाल इन कार्यक्रमों के बावजूद जिले में बच्चे तेजी से कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। ताजा आंकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं।
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वर्ष 2020 में 1517 बच्चे थे अतिकुपोषित
जनपद में चल रही कुपोषण से जंग पर सवाल उठ रहे हैं। मार्च 2020 में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो लाख पांच हजार 854 बच्चे पंजीकृत थे। इनमें कुपोषित बच्चों की संख्या 5169 थी। अतिकुपोषित श्रेणी के बच्चे 1517 थे। इन आंकड़ों से तुलना की जाए तो अतिकुपोषित बच्चों की संख्या दो गुने से अधिक बढ़ गई है।
जुलाई से पोषाहार का वितरण नहीं
भोलेपुर पीएचसी में आरोग्य मेले के दौरान मौजूद कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन लोगों को जुलाई से पोषाहार का वितरण नहीं किया गया। इसका विरोध करो तो नौकरी भी खतरे के पड़ जाएगी। पोषाहार वितरण न होने का कारण पूछने पर कहा कि यह तो अधिकारी ही बताएंगे। वहीं, लिंजीगंज आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती शर्मा ने बताया कि सितंबर का उन्हें पोषाहार नहीं मिला है। उन्होंने मंगलवार को लिंजीगंज के घरों में जाकर महिलाओं को कुपोषण दूर भगाने के लिए जागरूक किया।

बोले जिम्मेदार
जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद ने बताया कि जिले में कुल 3324 बच्चे अतिकुपोषित चिह्नित किए गए हैं। अभी कुल कुपोषित बच्चों की संख्या का आंकलन किया जा रहा है। अति कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें सुधार किया जाएगा। पोषाहार वितरण पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
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