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शौचालयों की गलत फीडिंग में 12 सचिवों की वेतनवृद्धि रुकी
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केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में बनाए गए शौचालयों में ग्राम पंचायत सचिवों ने जमकर मनमानी की। इसके साथ ही ऑनलाइन डाटा की भी गलत तरीके से फीडिंग की गई। शासन से जारी पत्र के बाद त्रुटिपूर्ण डाटा संशोधित किया तो सचिवों की मनमानी व लापरवाही खुलकर सामने आ गई। इस पर 12 सचिवों की एक वर्ष की वेतनवृद्धि रोक दी गई।
जनपद में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत वर्ष 2012 के सर्वे के अनुसार करीब एक लाख 70 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया। इसमें ग्राम पंचायत सचिवों ने मनमानी की। यहां तक कई मृतकों के नाम से शौचालय निर्माण दिखा दिया गया, तो कहीं सूची में नाम शामिल न होने के बावजूद उसे शौचालय का लाभ दिया गया। कई ग्राम पंचायतों में तो अभी भी शौचालय अपूर्ण मिल रहे हैं।
शौचालय निर्माण के बाद ऑनलाइन फोटो अपलोड करने में भी लापरवाही बरती गई। इसके चलते कई पात्र लाभार्थी शौचालय से वंचित रह गए। शासन से सर्वे में शामिल लाभार्थियों का फोटो अपलोडिंग डाटा से मिलान किया गया। इस पर लाभार्थियों की दोनों सूचियों में अंतर मिला। इसी के बाद शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने त्रुटिपूर्ण एमआईएस (अपडेशन/डिलीशन) संशोधन की रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप पर जिला पंचायत राज अधिकारी से तलब की।
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भौतिक सत्यापन में आठ हजार से अधिक शौचालयों की गलत फीडिंग का मामला पाया गया। हकीकत यह है कि ग्राम प्रधान व सचिवों की जुगलबंदी के चलते शौचालय निर्माण में जमकर धांधली की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी अमित कुमार त्यारी ने बताया कि त्रुटिपूर्ण फीडिंग करने के मामले में 12 सचिवों की पहले ही वेतन वृद्धि रोकी जा चुकी है। जबकि 30 जुलाई को 12 और ग्राम पंचायत सचिवों के वेतनवृद्धि रोकने के आदेश किए हैं।
यह सचिव हैं शामिल
जिला पंचायत राज अधिकारी अमित कुमार त्यागी ने बताया कि जिस सचिव की तैनाती के दौरान फीडिंग में गड़बड़ी हुई है, उसी की एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोकी गई है। इसमें ग्राम पंचायत सचिव अतुल अग्निहोत्री, अशोक तिवारी, रीति सूदन, मोहम्मद जीशन व अजेंद्र कुमार की वेतन वृद्धि उन्होंने रोकी है।
जबकि वीडीओ रामवीर शाक्य, शशी देव सिंह, नृपेंद्र शर्मा, अरविंद कुमार, आदित्य सिंह वर्मा, अशोक यादव व अजय द्विवेदी की वेतनवृद्धि रोकने के लिए उन्होंने जिला विकास अधिकारी को पत्र लिखा है।
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जनपद में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत वर्ष 2012 के सर्वे के अनुसार करीब एक लाख 70 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया। इसमें ग्राम पंचायत सचिवों ने मनमानी की। यहां तक कई मृतकों के नाम से शौचालय निर्माण दिखा दिया गया, तो कहीं सूची में नाम शामिल न होने के बावजूद उसे शौचालय का लाभ दिया गया। कई ग्राम पंचायतों में तो अभी भी शौचालय अपूर्ण मिल रहे हैं।
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शौचालय निर्माण के बाद ऑनलाइन फोटो अपलोड करने में भी लापरवाही बरती गई। इसके चलते कई पात्र लाभार्थी शौचालय से वंचित रह गए। शासन से सर्वे में शामिल लाभार्थियों का फोटो अपलोडिंग डाटा से मिलान किया गया। इस पर लाभार्थियों की दोनों सूचियों में अंतर मिला। इसी के बाद शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने त्रुटिपूर्ण एमआईएस (अपडेशन/डिलीशन) संशोधन की रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप पर जिला पंचायत राज अधिकारी से तलब की।
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भौतिक सत्यापन में आठ हजार से अधिक शौचालयों की गलत फीडिंग का मामला पाया गया। हकीकत यह है कि ग्राम प्रधान व सचिवों की जुगलबंदी के चलते शौचालय निर्माण में जमकर धांधली की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी अमित कुमार त्यारी ने बताया कि त्रुटिपूर्ण फीडिंग करने के मामले में 12 सचिवों की पहले ही वेतन वृद्धि रोकी जा चुकी है। जबकि 30 जुलाई को 12 और ग्राम पंचायत सचिवों के वेतनवृद्धि रोकने के आदेश किए हैं।
यह सचिव हैं शामिल
जिला पंचायत राज अधिकारी अमित कुमार त्यागी ने बताया कि जिस सचिव की तैनाती के दौरान फीडिंग में गड़बड़ी हुई है, उसी की एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोकी गई है। इसमें ग्राम पंचायत सचिव अतुल अग्निहोत्री, अशोक तिवारी, रीति सूदन, मोहम्मद जीशन व अजेंद्र कुमार की वेतन वृद्धि उन्होंने रोकी है।
जबकि वीडीओ रामवीर शाक्य, शशी देव सिंह, नृपेंद्र शर्मा, अरविंद कुमार, आदित्य सिंह वर्मा, अशोक यादव व अजय द्विवेदी की वेतनवृद्धि रोकने के लिए उन्होंने जिला विकास अधिकारी को पत्र लिखा है।