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कुरान ख्वानी के साथ 11वीं शरीफ का समापन

Fri, 27 Nov 2020 10:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Nov 2020 10:56 PM IST
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11th Sharif concludes with QuranKhwani.
दरगाह झंडा शरीफ में गागर जुलूस में शामिल महिलाएं। - फोटो : FARRUKHABAD
कुरानख्वानी के साथ 11वीं शरीफ का समापन
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फर्रुखाबाद। दरगाह झंडा शरीफ में कुरानख्वानी के साथ 11वीं शरीफ का समापन हो गया। दरगाह के खादिम आफताब हुसैन कादरी ने कलाम पढ़ा। बाद में आए लोगों को लंगर बांटा गया। चार-पांच महिलाएं सिर पर गागर लेकर पहुंचीं और रस्म अदायगी की। दरगाह में घुसने से पहले लोगों को सैनिटाइज किया गया।
खादिम आफताब हुसैन कादरी, सचिव नदीम खां समेत अन्य पदाधिकारियों ने दरगाह पर पहुंचकर उर्स के अंतिम दिन कुरानख्वानी पेश की। खादिम ने बताया, दरगाह झंडा शरीफ का ताल्लुक इराक के बगदाद शरीफ बड़े पीर साहब की दरगाह से है। दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के सज्जादा मरहूम शाह तालिब हुसैन मुजीबी 1874 में हज करने गए थे।
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उसके बाद वह बगदाद शहर के बड़े पीर साहब की दरगाह पर पहुंचे। वहां के खादिम ने उन्हें तबर्रुक (प्रसाद) दिया। वह तबर्रुक लेकर दरगाह झंडा शरीफ आए। जिस स्थान पर दरगाह है, वहीं पर झंडे के साथ तबर्रुक को दफन कर दिया।
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अब उस दरगाह की इतनी मान्यता है कि हर साल हजारों जायरीन हाजिरी लगाने आते हैं। तमाम लोगों की मन्नतें पूरी होने पर वह चादरपोशी, गुलपोशी और चिराग भी चढ़ाते हैं। दरगाह पर जीनत बेगम, रेहाना अख्तर, शबीना बानो, नूरजहां, रईशा बेगम आदि महिलाएं सिर पर गागर रखकर पहुंचीं। उन्होंने बताया, वह मुल्क की खुशहाली और संक्रमण के खात्मे के लिए मन्नती गागरें लेकर आए हैं। दरगाह पर चंद लोग ही मौजूद रहे।
पहुंची महिलाओं भीड़, पुलिस ने हटाया
फर्रुखाबाद। दरगाह कमेटी ने 11वीं शरीफ पर सभी को घरों में ही रहने का आग्रह किया था। शाम करीब पांच बजे बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे दरगाह पर पहुंच गए। सचिव नदीम खां ने रोका तो महिलाएं विरोध पर उतर आईं। कोरोना संक्रमण को रोकने की मंशा से नदीम ने थाना मऊदरवाजा पुलिस को सूचना दे दी।

इस पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस कर्मी पहुंचे। उन्होंने सभी महिलाओं को घर भेजा। दरगाह के पास प्रसाद की खुली दुकानों को भी बंद करवा दिया। सचिव नदीम खां ने बताया कि कोरोना संक्रमण से अवाम को बचाना है। लिहाजा किसी को भी दरगाह पर नहीं आना चाहिए।
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