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Farrukhabad News: 11 साल पुराने उपभोक्ता वाद का हुआ अंत, बैंक के खिलाफ दायर अर्जी की निरस्त
Sun, 10 May 2026 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 10 May 2026 12:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वर्ष 2015 से लंबित वाद का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में कर दिया। करीब 11 वर्ष पुराने इलाहाबाद बैंक शाखा प्रबंधक बढ़पुर के विरुद्ध मामले में आयोग ने परिवादी की ओर से वाद पर बल न दिए जाने के आधार पर परिवाद को निरस्त करने के आदेश दिए।
थाना जहानगंज क्षेत्र के गांव पतौंजा निवासी अख्तर परवेज ने वर्ष 2015 में आयोग में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसने वर्ष 2007 में कृषि कार्य के लिए इलाहाबाद बैंक की बढ़पुर शाखा से लगभग तीन लाख रुपये का ऋण ट्रैक्टर के लिए लिया था। बैंक ने ऋण स्वीकृति के दौरान कई खाली एवं मुद्रित प्रपत्रों तथा स्टांप पेपरों पर हस्ताक्षर करा लिए और ब्याज दर एवं किस्तों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उसने समय-समय पर कुल 3,86,490 रुपये बैंक में जमा किए। इसके बावजूद बैंक ने उसके ऊपर करीब 3.49 लाख रुपये बकाया दर्शाया और उसके खिलाफ वसूली प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
परिवादी ने यह भी आरोप लगाया था कि वह वर्ष 2008 की कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना का पात्र था, बावजूद इसके बैंक ने उसे योजना का लाभ नहीं दिया। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी अख्तर परवेज के अधिवक्ता ने आयोग को बताया कि उनका मुवक्किल लंबे समय से संपर्क में नहीं है और अब वह परिवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। अधिवक्ता ने आदेश पत्र के हाशिये पर इस आशय का उल्लेख भी किया। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम और विपिन कुमार श्रीवास्तव ने परिवाद को पैरवी के अभाव में निरस्त करते हुए पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।
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थाना जहानगंज क्षेत्र के गांव पतौंजा निवासी अख्तर परवेज ने वर्ष 2015 में आयोग में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसने वर्ष 2007 में कृषि कार्य के लिए इलाहाबाद बैंक की बढ़पुर शाखा से लगभग तीन लाख रुपये का ऋण ट्रैक्टर के लिए लिया था। बैंक ने ऋण स्वीकृति के दौरान कई खाली एवं मुद्रित प्रपत्रों तथा स्टांप पेपरों पर हस्ताक्षर करा लिए और ब्याज दर एवं किस्तों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उसने समय-समय पर कुल 3,86,490 रुपये बैंक में जमा किए। इसके बावजूद बैंक ने उसके ऊपर करीब 3.49 लाख रुपये बकाया दर्शाया और उसके खिलाफ वसूली प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
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परिवादी ने यह भी आरोप लगाया था कि वह वर्ष 2008 की कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना का पात्र था, बावजूद इसके बैंक ने उसे योजना का लाभ नहीं दिया। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी अख्तर परवेज के अधिवक्ता ने आयोग को बताया कि उनका मुवक्किल लंबे समय से संपर्क में नहीं है और अब वह परिवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। अधिवक्ता ने आदेश पत्र के हाशिये पर इस आशय का उल्लेख भी किया। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम और विपिन कुमार श्रीवास्तव ने परिवाद को पैरवी के अभाव में निरस्त करते हुए पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।
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