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सुरक्षा किटों के बिना ही दौड़ रहीं 10
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सुरक्षा किटों के बिना ही दौड़ रहीं 108, 102 एंबुलेंस
सेवा प्रदाता कंपनी लापरवाह, ईएमटी स्टाफ को प्रशिक्षण भी नहीं
एक ही ऑक्सीजन मास्क का इस्तेमाल, गाउन, सर्जिकल दस्ताने भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। हर प्रकार के रोगियों को घर से छोटे और बड़े अस्पतालों तक ले जाने वाली 108 व 102 एंबुलेंसों के कर्मचारियों को न तो प्रशिक्षित किया गया है और न ही कोरोना सुरक्षा किटों से लैस हैं। सेवा प्रदाता कंपनी पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है।
चीन से शुरू हुई कोरोना की आफत देश में भी पैर तेजी से पसार रही है। इसके बाद भी एंबुलेंस संचालक स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सेवा प्रदाता कंपनी कतई गंभीर नहीं है। एंबुलेंस हर तरह के मरीजों को 24 घंटे लाने-ले जाने का काम करती हैं। बावजूद इसके एंबुलेंस स्टाफ को प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। जिले भर में चल रही 46 गाड़ियों में से किसी को भी सुरक्षा किटों से लैस तक नहीं किया गया। यहां सवाल उठता है कि यदि कोई कोरोना पॉजटिव मरीज को एंबुलेंस से देहात से जिला मुख्यालय तक लाया गया, तो संक्रमण फैलना स्वाभाविक है। ऐसे में अनजाने में यह वायरस अन्य मरीजों को भी अपनी गिरफ्त में ले सकता है।
एंबुलेंस यूनियन जिला उपाध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि अभी तक कर्मियों को प्रशिक्षण नहीं मिला है। मास्क भी मानकयुक्त नहीं हैं। एक ही ऑक्सीजन मास्क से सभी को ऑक्सीजन दी जाती है। ट्रिपल लेयर, हाथ धुलने के लिए सेनेटाइजर, मास्क, गाउन, सर्जिकल दस्ताने, सर्जिकल कैप, बाल्टी, मग, वाशिंग पाउडर, हैंडवाश लिक्विड, फिनायल आदि भी नहीं है। बताया कि शनिवार को प्रोग्राम मैनेजर सौरभ ने एक मैसेज देकर कहा है कि कोई भी जुकाम-बुखार का मरीज हो, तो बिना स्वास्थ्य अधिकारी से वार्ता किए उसे कहीं न लेकर जाएं।
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सेवा प्रदाता कंपनी लापरवाह, ईएमटी स्टाफ को प्रशिक्षण भी नहीं
एक ही ऑक्सीजन मास्क का इस्तेमाल, गाउन, सर्जिकल दस्ताने भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। हर प्रकार के रोगियों को घर से छोटे और बड़े अस्पतालों तक ले जाने वाली 108 व 102 एंबुलेंसों के कर्मचारियों को न तो प्रशिक्षित किया गया है और न ही कोरोना सुरक्षा किटों से लैस हैं। सेवा प्रदाता कंपनी पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है।
चीन से शुरू हुई कोरोना की आफत देश में भी पैर तेजी से पसार रही है। इसके बाद भी एंबुलेंस संचालक स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सेवा प्रदाता कंपनी कतई गंभीर नहीं है। एंबुलेंस हर तरह के मरीजों को 24 घंटे लाने-ले जाने का काम करती हैं। बावजूद इसके एंबुलेंस स्टाफ को प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। जिले भर में चल रही 46 गाड़ियों में से किसी को भी सुरक्षा किटों से लैस तक नहीं किया गया। यहां सवाल उठता है कि यदि कोई कोरोना पॉजटिव मरीज को एंबुलेंस से देहात से जिला मुख्यालय तक लाया गया, तो संक्रमण फैलना स्वाभाविक है। ऐसे में अनजाने में यह वायरस अन्य मरीजों को भी अपनी गिरफ्त में ले सकता है।
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एंबुलेंस यूनियन जिला उपाध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि अभी तक कर्मियों को प्रशिक्षण नहीं मिला है। मास्क भी मानकयुक्त नहीं हैं। एक ही ऑक्सीजन मास्क से सभी को ऑक्सीजन दी जाती है। ट्रिपल लेयर, हाथ धुलने के लिए सेनेटाइजर, मास्क, गाउन, सर्जिकल दस्ताने, सर्जिकल कैप, बाल्टी, मग, वाशिंग पाउडर, हैंडवाश लिक्विड, फिनायल आदि भी नहीं है। बताया कि शनिवार को प्रोग्राम मैनेजर सौरभ ने एक मैसेज देकर कहा है कि कोई भी जुकाम-बुखार का मरीज हो, तो बिना स्वास्थ्य अधिकारी से वार्ता किए उसे कहीं न लेकर जाएं।
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