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वीडीओ को रिश्वत मांगना पड़ा महंगा, सस्पेंड
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अयोध्या। मिल्कीपुर ब्लॉक के ग्राम पाराखानी में तैनात ग्राम विकास अधिकारी पंकज मौर्य द्वारा गांव में कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान करने के एवज में रिश्वत मांगना महंगा पड़ गया। डीडीओ ने उसे निलंबित कर दिया।
ग्राम प्रधान की शिकायत के बाद जिलाधिकारी नितीश कुमार ने आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जिला विकास अधिकारी(डीडीओ) को दे दिए। जिसके बाद जिला विकास अधिकारी आरपी सिंह ने दोषी वीडीओ पंकज मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
मिल्कीपुर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाराखानी के ग्राम प्रधान राम प्रताप सिंह ने 24 जून को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था। बताया था कि उनकी ग्राम पंचायत में दो लाख 74 हजार रुपये की लागत से कराए गए चार निर्माण कार्यों के भुगतान में पंचायत सचिव पंकज मौर्य द्वारा 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।
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जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी डीएम को सुनाई गई। इसके बाद डीडीओ ने सरकार की पारदर्शिता के विरुद्ध व पंचायत सचिव के कर्तव्य और दायित्व निर्वहन में लापरवाही मानते हुए ग्राम विकास अधिकारी पंकज मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन के दौरान उन्हें हैरिंग्टनगंज ब्लॉक मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और हैरिंग्टनगंज बीडीओ को आरोपी व निलंबित ग्राम विकास अधिकारी के प्रकरण का जांच अधिकारी भी नामित कर दिया है। इस घटना के बाद ब्लॉक में कार्यरत कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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ग्राम प्रधान की शिकायत के बाद जिलाधिकारी नितीश कुमार ने आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जिला विकास अधिकारी(डीडीओ) को दे दिए। जिसके बाद जिला विकास अधिकारी आरपी सिंह ने दोषी वीडीओ पंकज मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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मिल्कीपुर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाराखानी के ग्राम प्रधान राम प्रताप सिंह ने 24 जून को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था। बताया था कि उनकी ग्राम पंचायत में दो लाख 74 हजार रुपये की लागत से कराए गए चार निर्माण कार्यों के भुगतान में पंचायत सचिव पंकज मौर्य द्वारा 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।
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जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी डीएम को सुनाई गई। इसके बाद डीडीओ ने सरकार की पारदर्शिता के विरुद्ध व पंचायत सचिव के कर्तव्य और दायित्व निर्वहन में लापरवाही मानते हुए ग्राम विकास अधिकारी पंकज मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन के दौरान उन्हें हैरिंग्टनगंज ब्लॉक मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और हैरिंग्टनगंज बीडीओ को आरोपी व निलंबित ग्राम विकास अधिकारी के प्रकरण का जांच अधिकारी भी नामित कर दिया है। इस घटना के बाद ब्लॉक में कार्यरत कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।