फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Unannounced cut, power falling on cottage industries

अघोषित कटौती कुटीर उद्योगों पर गिरा रही बिजली

Fri, 29 Apr 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:09 PM IST
विज्ञापन
Unannounced cut, power falling on cottage industries
अयोध्या। ग्रामीण इलाकों में बिजली के भीषण संकट के चलते जहां आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया, वहीं उद्योग धंधे भी चौपट हो गए हैं। महज चार से पांच घंटे मिल रही बिजली से उद्यमियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

उत्पादन कम होने से माल की समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नगर व ग्रामीणों में आटा चक्की, आरा मशीन, वेल्डिंग, दाल मिल जैसे उद्योग व इलेक्ट्रॉनिक दुकान, कंप्यूटर सेंटर, फोटो स्टेट दुकान बिजली न आने से ठप पड़े है।
विज्ञापन

व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कार्य न होने श्रमिकों की कटौती की जा रही, जिससे वह बेरोजगार भी हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। बिजली सप्लाई न मिलने से सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा आसमान पर पहुंच गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

लोगों का कहना है कि पर्याप्त बिजली न मिलने की वजह से कुटीर उद्योग चौपट हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग में आटा चक्की, वेल्डिंग मशीन, आरा मशीन, दाल व राइस मिल, कोल्हू, मसाला उद्योग, मिट्टी के बर्तन बनाने के साथ फोटो स्टेट, जन सेवा केंद्र, मोबाइल व कंप्यूटर सेंटर व इलेक्ट्रॉनिक सामानों के विक्रेता का धंधा बिजली पर निर्भर होता है।
बिजली के अभाव में यह धंधे चौपट हो रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने विकल्प के रूप में जनरेटर भी रखे हुए हैं, लेकिन डीजल के लगातार बढ़ रहे दाम के चलते वह इसका प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं।
उनका कहना है कि बिजली की अपेक्षा जनरेटर चलाने पर दोगुना खर्च आता है। वहीं इसके लिए अतिरिक्त पैसे मांगे जाने पर लोग वापस हो जा रहे हैं।
भेलसर नगर के मो. अलीम वेल्डिंग कारीगर हैं, वह कहते हैं कि विद्युत कटौती व्यापार को प्रभावित कर रही है। वेल्डिंग कारीगर राम कैलाश कहते हैं कि आपूर्ति के समय बार-बार होने वाली रोस्टिंग से भारी समस्या पैदा हो रही है।
दिन में बिजली न आने से व्यवसाय लगभग चौपट हो गया है। वेल्डिंग कारीगर लाला कहते हैं कि बिजली के अभाव में मशीनें न चलने से कारीगरों को खाली बैठना पड़ता है। ऐसे में समय पर ऑर्डर का काम पूरा नहीं हो पाता है।
जबकि उन्हें दिहाड़ी मजदूरी पूरी देनी पड़ती है। पंखा, कूलर, फ्रिज आदि के व्यापारी साजन द्विवेदी कहते हैं कि दुकान पर सन्नाटा पसरा रहता है। ग्रामीण उमाशंकर बताते हैं कि बिजली कटौती का असर उद्यमियों के साथ-साथ किसानों को भी भारी परेशानी हो रही है।
फसलों में पानी देना मुश्किल हो रहा है। मिनरल वाटर व्यापारी अमरेश कुमार कहते हैं कि बिजली कटौती से मशीन बंद रहती है। इससे पर्याप्त पानी नहीं निकल पा रहा है। पानी ठंडा नहीं हो रहा है।
बालाजी मिष्ठान, दूध-पनीर विक्रय केंद्र के संचालक राम लखन यादव ने बताया कि पराग डेयरी के स्टॉकिस्ट है। प्रतिदिन शाम दूध, पनीर, दही, मट्ठा आता है।
रात में 5 से 6 घंटे की कटौती और में दिन की भीषण गर्मी में भी 6 से 7 घंटे की कटौती से फ्रीजर में रखा दूध ,पनीर दही मट्ठा खराब हो रहा है। ऐसा ही हाल रहा तो नुकसान से बचने के लिए कुछ दिन के लिए माल मंगवाना बंद कर देंगे।
रुदौली में आइसक्रीम का काम करने वाले दीनदयाल गुप्ता मांगलिक कार्यक्रमों में बुकिंग पर आइसक्रीम का ठेका लेते हैं। विद्युत विद्युत कटौती होने से फ्रीजर में रखी आइसक्रीम खराब जा रही है।
दीनदयाल कहते हैं कि 24 घंटे में 10 घंटे बिजली कट रही। फ्रीजर में रखी आइसक्रीम पिघल जाती है। तीन मांगलिक कार्यक्रमों में आइसक्रीम की आपूर्ति नहीं कर सके। इनसे एक ओर जहां आर्थिक नुकसान हुआ वहीं दूसरी ओर व्यापार में बनी साख भी घटी है।
मिल्कीपुर क्षेत्र में बिजली संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। क्षेत्र के कुटीर उद्योग पूरी तरह से बंद होने के कगार पर पहुंच रहे हैं। मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के कुमारगंज बाजार में आटा चक्की का उद्योग चला रहे ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि बिजली न मिलने से उनका व्यवसाय पूरी तरह से प्रभावित हो गया है।
वेल्डिंग का कार्य करके अपनी रोजी-रोटी चला रहे रवि पांडेय ने बताया कि सप्लाई न मिलने से काम पूरी तरह से बैठ गया है। जबकि यह सीजन वेल्डिंग कार्य के लिए पीक माना जाता है।
खिड़की, दरवाजे व अन्य सामान बनाने का कार्य अधिक मिला है, लेकिन लोगों को समय से सामान नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं। जिसकी वजह से जलालत झेलनी पड़ रही है।
गोसाईगंज क्षेत्र में भी बदहाल बिजली आपूर्ति से कुटीर उद्योग चौपट हो रहे हैं। कुटीर उद्योग के मालिकों का कहना है कि बिजली मात्र चार से पांच घंटे कई बार में मिल रही है। जो आ भी रही है वह लो-वोल्टेज के साथ।
उनका कहना है कि डीजल का रेट इतना ज्यादा है कि जनरेटर चलाने पर मुनाफा दूर लागत भी मिलना मुश्किल है। नगर में आटा चक्की चलाने वाले विजय कुमार, अखिलेश कुमार व अनूप कुमार ने बताया कि गेहूं की पिसाई की इतनी गठरी इकट्ठा हो गई है, लेकिन लो-वोल्टेज व विद्युत की बदहाल व्यवस्था के कारण पिसाई संभव नहीं हो पाई रही हैं।
मसाला कारोबारी दीपक कुमार व जगदंबा ने बताया कि विद्युत की बदहाल व्यवस्था छोटे-छोटे उद्योगों की गले की हड्डी बन गई है। बिजली न आने से मसाले का व्यापार चौपट हो रहा है।

यदि बिजली की यही हालत रही तो छोटे उद्योगों को बंदी के कगार पर पहुंच सकते हैं। नगर के एआर मिट्टी कला उद्योग के राजेश पटेल ने बताया कि उनके यहां मिट्टी के विभिन्न तरह के बर्तन बनाए जाते हैं।
पूरा व्यवसाय बिजली पर ही निर्भर है। बिजली न मिलने से व्यवसाय चौपट होने के कगार पर है। हाल यह है कि कारीगरों को वेतन देने का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed