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कार्यशाला में साइबर क्राइम रोकने के लिए किया प्रशिक्षित
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अयोध्या। रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में रविवार को आयोजित कार्यशाला में साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने थानों पर गठित साइबर हेल्प डेस्क से संबंधित पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करते हुए दिशा-निर्देश दिया। कहा कि साइबर अपराधी धोखाधड़ी के नए-नए तरीकों से जनता को गुमराह कर ठगी कर रहे हैं। इसके लिए सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अंजान व्यक्ति को जानकारी न दें।
रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में रविवार को पूर्वाह्न 11 बजे आयोजित कार्यशाला में प्रत्येक थाने पर बने साइबर हेल्प डेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मी व अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। साइबर क्राइम सेल के प्रभारी निरीक्षक मनबोध तिवारी, आरक्षी पंकज, आरक्षी नीरज सिंह ने साइबर हेल्प डेस्क के गठन एवं क्रियान्वयन के बारे में बताया। कहा कि थानों पर आने वाले साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्ति से विनम्रतापूर्वक घटना की जानकारी करके उनकी त्वरित सहायता की जाए।
साइबर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बारे में पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, अधिकारियों ने थाना क्षेत्र में आमजन के बीच साइबर जागरूकता अभियान चलाने के लिए निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने कहा कि साइबर अपराधी धोखाधड़ी के नए-नए तरीकों से जनता को गुमराह कर ठगी कर रहे हैं। कहा कि लोग सतर्क रहें और किसी भी अंजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते या एटीएम कार्ड से संबंधित कोई भी जानकारी न दें।
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उन्होंने कहा कि ओटीपी तभी मोबाइल पर आता है, जब हम किसी लेनदेन/सत्यापन के लिए आवेदन करते हैं। यदि कोई लेनदेन नहीं कर रहे हैं, फिर भी मोबाइल पर ओटीपी आ जाए तो सतर्क हो जाएं। किसी भी अंजान व्यक्ति के द्वारा भुगतान प्राप्त करने के लिए भेजे गये किसी भी क्यूआर को स्कैन न करें, अन्यथा बैंक खाता खाली हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड के प्रयोग से बचें। कहा कि कई ऐप नवी, पेसेंस, धनी, नीरा, मनी व्यू, होम क्रेडिट, कैशे, जेस्ट मनी, एमपॉकेट आदि बैंकिंग संबंधित कागज, फोटो, पैनकार्ड, आधारकार्ड लेकर तत्काल लोन दे रहे हैं एवं बाद में आपकी निजी जानकारियां सार्वजनिक पोर्टल पर शेयर कर आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं। इसलिए ऐसे लोन लेने से बचें।
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रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में रविवार को पूर्वाह्न 11 बजे आयोजित कार्यशाला में प्रत्येक थाने पर बने साइबर हेल्प डेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मी व अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। साइबर क्राइम सेल के प्रभारी निरीक्षक मनबोध तिवारी, आरक्षी पंकज, आरक्षी नीरज सिंह ने साइबर हेल्प डेस्क के गठन एवं क्रियान्वयन के बारे में बताया। कहा कि थानों पर आने वाले साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्ति से विनम्रतापूर्वक घटना की जानकारी करके उनकी त्वरित सहायता की जाए।
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साइबर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बारे में पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, अधिकारियों ने थाना क्षेत्र में आमजन के बीच साइबर जागरूकता अभियान चलाने के लिए निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने कहा कि साइबर अपराधी धोखाधड़ी के नए-नए तरीकों से जनता को गुमराह कर ठगी कर रहे हैं। कहा कि लोग सतर्क रहें और किसी भी अंजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते या एटीएम कार्ड से संबंधित कोई भी जानकारी न दें।
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उन्होंने कहा कि ओटीपी तभी मोबाइल पर आता है, जब हम किसी लेनदेन/सत्यापन के लिए आवेदन करते हैं। यदि कोई लेनदेन नहीं कर रहे हैं, फिर भी मोबाइल पर ओटीपी आ जाए तो सतर्क हो जाएं। किसी भी अंजान व्यक्ति के द्वारा भुगतान प्राप्त करने के लिए भेजे गये किसी भी क्यूआर को स्कैन न करें, अन्यथा बैंक खाता खाली हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड के प्रयोग से बचें। कहा कि कई ऐप नवी, पेसेंस, धनी, नीरा, मनी व्यू, होम क्रेडिट, कैशे, जेस्ट मनी, एमपॉकेट आदि बैंकिंग संबंधित कागज, फोटो, पैनकार्ड, आधारकार्ड लेकर तत्काल लोन दे रहे हैं एवं बाद में आपकी निजी जानकारियां सार्वजनिक पोर्टल पर शेयर कर आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं। इसलिए ऐसे लोन लेने से बचें।