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पौराणिक कुंडों का लौटेगा वैभव, हटेंगे अवैध कब्जे
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अयोध्या। रामनगरी की प्राचीनता के गवाह जल स्रोतों को सेटेलाइट इमेज के जरिए चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इन जलस्रोतों में पौराणिक कुंड, सरोवर व तालाब शामिल हैं।
रामनगरी के सभी पौराणिक कुंडों का सुंदरीकरण कराने की योजना है। अधिकांश जलस्रोतों पर कब्जे हैं। जिन्हें हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। रामनगरी के कुंडों का न सिर्फ वैभव लौटेगा बल्कि यह पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे।
अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए 34 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। शासन की मंशा है कि अयोध्या की पौराणिकता को सहेजते हुए रामनगरी का विकास हो।
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इसी के तहत रामनगरी की प्राचीनता व पौराणिकता के गवाह कुंडों, सरोवरों सहित सभी जलस्रोतों को चिह्नित किया जा रहा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज निकाली गई है।
इसके जरिए क्षेत्र के समस्त जलस्रोतों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। जो जलस्रोत चिह्नित हो गए हैं, उनका भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। शहर क्षेत्र में जिन जलस्रोतों पर अवैध कब्जे हैं उन्हें चिह्नित कर राजस्व की टीम नाप जोखकर कर रही है।
उन्होंने बताया कि क्षीरसागर तालाब की जमीन है। यह कोर्ट से भी सिद्ध हो चुका है। बावजूद इसके यहां बहुत से लोग मकान, दुकान, धर्मशाला बनाकर काबिज हैं।
शहर के नाले-नालियों पर से अवैध कब्जे हटवाकर उनकी साफ-सफाई का अभियान शुरू कर दिया गया है। कहा कि रामनगरी के पौराणिक कुंडों का सुंदरीकरण उनकी गरिमा के अनुरूप कराने की योजना है।
लाल डिग्गी तालाब सहित 10 कुंडों के सुंदरीकरण का काम शुरू हो चुका है। अन्य कुंडों की भी भव्यता जल्द ही लौटेगी। यह न सिर्फ आस्था बल्कि पर्यटन का भी केंद्र बनकर शहर की भव्यता बढ़ाएंगे।
हनुमानगढ़ी के आचार्य रामदेवदास शास्त्री ने अपनी पुस्तकों में उन 148 स्थलों का वर्णन किया है जो रामनगरी की पौराणिकता बताते हैं। 1902 में गठित एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने रामनगरी के 148 पौराणिक स्थलों को खोजकर वहां शिलालेख लगवाए थे।
उनमें से तमाम कुंड व शिलालेखों का आज वजूद मिट चुका है। सागर कुंड, सप्त सागर, सुग्रीव कुंड, रुक्मिणी कुंड, दुर्भरसर, बृहस्पति कुंड, धनयक्ष कुंड, क्षीरसागर, नरकुंड, उर्वशी कुंड, सरयू तिलोदकी संगम, योगिनी कुंड, शक्र कुंड लुप्त हो चुके हैं या लुप्त होने की कगार पर हैं।
उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि विकास प्राधिकरण का जो 873 स्कवायर किलोमीटर का नया मास्टर प्लान बनना है। उसमें जलस्रोत, तालाब, कुंड, सरोवर पहले से ही चिह्नित होंगे।
जब तक राजस्व से इनका रिकॉर्ड हमारे पास आएगा, उससे पहले ही हम जलस्रोतों को सुरक्षित कर लेंगे। इनके चारों तरफ सौ मीटर की दूरी पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं करने दिया जाएगा। सौ मीटर के एरिया को ग्रीन बेल्ट घोषित कर दिया जाएगा तो भव्यता पर भी ग्रहण नहीं लगेगा।
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रामनगरी के सभी पौराणिक कुंडों का सुंदरीकरण कराने की योजना है। अधिकांश जलस्रोतों पर कब्जे हैं। जिन्हें हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। रामनगरी के कुंडों का न सिर्फ वैभव लौटेगा बल्कि यह पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे।
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अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए 34 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। शासन की मंशा है कि अयोध्या की पौराणिकता को सहेजते हुए रामनगरी का विकास हो।
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इसी के तहत रामनगरी की प्राचीनता व पौराणिकता के गवाह कुंडों, सरोवरों सहित सभी जलस्रोतों को चिह्नित किया जा रहा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज निकाली गई है।
इसके जरिए क्षेत्र के समस्त जलस्रोतों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। जो जलस्रोत चिह्नित हो गए हैं, उनका भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। शहर क्षेत्र में जिन जलस्रोतों पर अवैध कब्जे हैं उन्हें चिह्नित कर राजस्व की टीम नाप जोखकर कर रही है।
उन्होंने बताया कि क्षीरसागर तालाब की जमीन है। यह कोर्ट से भी सिद्ध हो चुका है। बावजूद इसके यहां बहुत से लोग मकान, दुकान, धर्मशाला बनाकर काबिज हैं।
शहर के नाले-नालियों पर से अवैध कब्जे हटवाकर उनकी साफ-सफाई का अभियान शुरू कर दिया गया है। कहा कि रामनगरी के पौराणिक कुंडों का सुंदरीकरण उनकी गरिमा के अनुरूप कराने की योजना है।
लाल डिग्गी तालाब सहित 10 कुंडों के सुंदरीकरण का काम शुरू हो चुका है। अन्य कुंडों की भी भव्यता जल्द ही लौटेगी। यह न सिर्फ आस्था बल्कि पर्यटन का भी केंद्र बनकर शहर की भव्यता बढ़ाएंगे।
हनुमानगढ़ी के आचार्य रामदेवदास शास्त्री ने अपनी पुस्तकों में उन 148 स्थलों का वर्णन किया है जो रामनगरी की पौराणिकता बताते हैं। 1902 में गठित एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने रामनगरी के 148 पौराणिक स्थलों को खोजकर वहां शिलालेख लगवाए थे।
उनमें से तमाम कुंड व शिलालेखों का आज वजूद मिट चुका है। सागर कुंड, सप्त सागर, सुग्रीव कुंड, रुक्मिणी कुंड, दुर्भरसर, बृहस्पति कुंड, धनयक्ष कुंड, क्षीरसागर, नरकुंड, उर्वशी कुंड, सरयू तिलोदकी संगम, योगिनी कुंड, शक्र कुंड लुप्त हो चुके हैं या लुप्त होने की कगार पर हैं।
उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि विकास प्राधिकरण का जो 873 स्कवायर किलोमीटर का नया मास्टर प्लान बनना है। उसमें जलस्रोत, तालाब, कुंड, सरोवर पहले से ही चिह्नित होंगे।
जब तक राजस्व से इनका रिकॉर्ड हमारे पास आएगा, उससे पहले ही हम जलस्रोतों को सुरक्षित कर लेंगे। इनके चारों तरफ सौ मीटर की दूरी पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं करने दिया जाएगा। सौ मीटर के एरिया को ग्रीन बेल्ट घोषित कर दिया जाएगा तो भव्यता पर भी ग्रहण नहीं लगेगा।