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रामजन्मभूमि ट्रस्ट जमीन विवाद : सुल्तान ने बताई जमीन बेचने की पूरी कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 16 Jun 2021 12:28 PM IST

सार

जमीन के विक्रेता सुल्तान अंसारी ने कहा कि 10 मिनट में नहीं बल्कि 10 साल में जमीन दो करोड़ से 18 करोड़ की हुई है। पूरी पारदर्शिता से ट्रस्ट ने जमीन की खरीदी है। पैसे का लेनदेन ऑनलाइन हुआ है।
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राम मंदिर
राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर जमीन खरीदने को लेकर लगे घोटाले के आरोप के बाद जमीन के विक्रेता सुल्तान अंसारी मंगलवार को सफाई देते दिखे। उन्होंने रामजन्मभूमि ट्रस्ट को जमीन बेचने की पूरी कहानी बताई। ट्रस्ट पर लगे आरोपों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि 10 मिनट में नहीं बल्कि 10 साल में जमीन दो करोड़ से 18 करोड़ की हुई है। पूरी पारदर्शिता से ट्रस्ट ने जमीन खरीदी है। पैसे का लेनदेन ऑनलाइन हुआ है। फिर भी कोई शंका हो तो पूरे मामले की जांच करा ली जाए, मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
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सुल्तान अंसारी ने बताया कि बाग बिजेशी की जिस 1.20 हेक्टेयर भूमि को लेकर हो-हल्ला हो रहा है। उस जमीन का 2011 में बबलू पाठक, कुसुम पाठक व हमारे पिता मोहम्मद इरफान ने फिरोज आलम के परिवार से एग्रीमेंट किया था। उस समय जमीन की कीमत एक करोड़ रुपये तय हुई थी। जिसमें 10 लाख रुपये पेशगी के रूप में दिए गये थे।


इस बीच उस जमीन को लेकर कुछ विवाद हो गया, मामला कोर्ट में पहुंचा। जिसके चलते जमीन का बैनामा नहीं हो पाया। जब जमीन का एग्रीमेंट समाप्त हुआ तो 2014 में फिर एग्रीमेंट हुआ। 2014 में भी मामला कोर्ट में लंबित था, एग्रीमेंट आगे बढ़ाया गया। इसके बाद 2019 में विवाद सुलझ गया तो दोबारा इसका एग्रीमेंट किया गया। उस समय दो करोड़ रुपये कीमत तय हुई। जिसमें से 50 लाख रुपये पेशगी के रूप में दिए गए थे।

इस तरह 10 मिनट में नहीं बल्कि 10 साल में जमीन की कीमत दो करोड़ रुपये से 18 करोड़ रुपये हुई है। बताया कि इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राममंदिर परिसर के लिए जमीन व मकानों का अधिग्रहण कर रहा है। जो लोग विस्थापित किए जा रहे हैं उन्हें बसाने के लिए ट्रस्ट जमीन ले रहा है। ऐसे में इस जमीन के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उनसे वार्ता की थी। 2019 में इस जमीन को लेकर जो एग्रीमेंट हुआ उसमें नौ लोग थे।

ट्रस्ट का कहना था कि हम किसी एग्रीमेंट धारक के खाते में पैसे नहीं भेज सकते, किसी बैनामेदार के खाते में भेजेंगे। फिर हमने अपने पार्टनर के साथ बात की। सभी की सहमति से हमारे व रवि मोहन के नाम जमीन का बैनामा हुआ। फिर हमने निर्धारित दो करोड़ की राशि बबलू पाठक को देकर जमीन का बैनामा करा लिया। उसके बाद हमने राम जन्मभूमि ट्रस्ट को एग्रीमेंट कर दिया। जो लोग आरोप लगा रहे हैं उन्हें बता दें कि हमने मार्केट रेट से कम पर जमीन का बैनामा किया है।

आज की उस जमीन की मालियत 24 करोड़ में बनेगी। चूंकि हमारी राम में आस्था है इसलिए हमने कम रेट में जमीन का बैनामा किया है। कहा कि यह सही है कि एक ही दिन पहले बबलू पाठक से बैनामा लिया गया फिर ट्रस्ट को एग्रीमेंट किया गया लेकिन इसमें कोई गलत नहीं है, कोई कानूनी अड़चन भी नहीं। सुल्तान अंसारी ने बताया कि जो लोग जमीन खरीद में ट्रस्ट पर घोटाले का आरोप लगा रहे हैं उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बरती है।

ट्रस्ट ने जमीन का एग्रीमेंट कराने के बाद आरटीजीएस से पैसे का ट्रांसफर किया है। अभी ट्रस्ट की ओर से 8.50 करोड़ मेरे खाते में व इतनी ही रकम रविमोहन के खाते में ट्रांसफर की गई है, जो कि एक नंबर का पैसा है। अभी डेढ़ करोड़ बकाया भी है, ट्रस्ट बैनामा के समय शेष पैसा देगा। कहा कि बहुत जल्द ही इस जमीन की रजिस्ट्री भी हो जाएगी। सुल्तान अंसारी कई वर्ष पूर्व समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। कुछ वर्षों बाद ही सुल्तान का सपा से मोहभंग हो गया।

उनकी राममंदिर के प्रति गहरी आस्था है, इस बात का प्रमाण यह है कि उन्होंने राममंदिर के लिए निधि समर्पण भी किया है। श्रीराम जन्मभूूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा चलाए गए निधि समर्पण अभियान के तहत उन्होंने भाजपा नेता विशाल मिश्र के आवास पर 51 हजार का निधि समर्पण न सिर्फ स्वयं बल्कि अपने मुस्लिम सहयोगियों से भी राममंदिर के लिए दान कराया। इस अभियान में इनकी ओर से लगभग 98 हजार का निधि समर्पण कराया गया था।
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