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मोदी के आने पर रामराज्याभिषेक की तरह सजेगी अयोध्या
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन करने आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में अयोध्या त्रेतायुग में रावण वध करके लौटे राम के राज्याभिषेक की तरह सजेगी। समूची अयोध्या में एक बार फिर पांच अगस्त को दीपोत्सव करके दिवाली जैसा उत्साह दिखाए। सभी मठ-मंदिरों में दो दिन तक अखंड रामायण पाठ और रामनाम संकीर्तन हो। यह रणनीति शनिवार को यहां दोपहर बाद पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारसेवकपुरम में 40 शीर्ष संत-धर्माचार्यों के साथ बैठक करके तय की। कहा कि पांच सौ साल के संघर्ष के बाद यह शुभ घड़ी आई है, मुहूर्त पर सवाल उठाने वालों पर ध्यान न दें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठीक दोपहर एक बजकर 55 मिनट पर श्रीराम हवाईपट्टी पर उतरे। वे सीधे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर चल रही तैयारियां की समीक्षा की। निर्देश दिए कि पूरे परिसर को युद्घ स्तर पर समतलीकरण करते हुए अनावश्यक पड़े वॉच टॉवरों को हटा लिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री समेत अतिथियों के बैठने से लेकर गर्भगृह में भूमि पूजन और सुरक्षा की रणनीति पर भी चर्चा की। उनके साथ प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी भी थे।
यहां रामलला को राजा अयोध्या बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र की ओर से दिए गए तीन और चांदी के सिंहासन पर भरत, लक्ष्मण व शत्रुहन को विराजमान करके पूजन-अर्चन किया। इसके पहले श्री मिश्र की ओर से रामलला को अस्थाई मंदिर में विराजमान करते समय चांदी का एक सिंहासन भेंट किया गया था। यहां से मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करते हुए ट्रस्ट के कार्यशाला में चल रही तैयारियों को भी देखा। फिर मुख्यमंत्री ने कारसेवकपुरम पहुंचकर बंद कमरे में रामनगरी के शीर्ष 40 संत-धर्माचार्यों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान होने वाली तैयारियों पर चर्चा की। संतों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में अयोध्या को त्रेतायुग में आतताई रावण का वध करके लौटे प्रभु राम के राज्याभिषेक जैसा सजाना होगा।
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पांच सौ साल के प्रयास और संघर्ष के बाद पांच अगस्त की शुभ घड़ी आई है। इस दिन सभी मठ-मंदिरों में संत-धर्माचार्य अखंड रामायण का पाठ आयोजित करें। जगह-जगह रामनाम का संकीर्तन हो, पूरी अयोध्या धर्ममय और राममय नबजर आए। अयोध्या की साफ-सफाई और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रधानमंत्री को दर्शन कराना है। उन्होंने कहा कि मठ-मंदिरों, गलियों और मुहल्लों, सड़कों व घाटों को ऐसा मनोरम बनाना होगा जैसे त्रेतायुग धरती पर उतर आया हो। मुख्यमंत्री ने कोरोना का जिक्र करते हुए कहा कि भूमि पूजन में सभी संत-धर्माचार्यों को निमंत्रित करना ट्रस्ट के लिए संभव नहीं होगा।
आप सभी को भूमि पूजन का लाइव दर्शन अपने-अपने स्थान से सुलभ कराया जाएगा। हम सभी का दायित्व है कि अपने-अपने स्थान से धार्मिक अनुष्ठान के साथ भूमि पूजन के साक्षी बनें। दीपोत्सव के जरिए भूमि पूजन की शोभा बढ़ाएं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि भूमि पूजन के लिए अयोध्या को सजाने संवारने में पूरी ताकत झोंक दें। जन-जन की भागीदारी अपने-अपने घर से सुनिश्चित कराएं। लोग अपने-अपने घरों में दीप जलाकर इस शुभ अवसर पर एक नई दिवाली का आगाज करें।
अयोध्या का उत्साह देखेगी दुनिया: नृत्यगोपाल
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि पांच सौ साल बाद पांच अगस्त को श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन का अवसर सभी संत-धर्माचार्य और सनातन धर्मियों के लिए मनोवांछित फल देने वाला है। इस दिन सभी लोग अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा पाठ, रामनाम संकीर्तन करें,
घरों में दीपमालाएं जलाएं। ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन के कार्यक्रम को घर-घर तक लाइव पहुंचाने की व्यवस्था होगी। अपने-अपने स्थान से सभी लोग हाथ जोड़कर भूमि पूजन के साक्षी बनें।
हमारा प्रयास होगा सभी लोग जुड़े भूमि पूजन से: चंपत
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि कोरोना की वजह से सभी संत-धर्माचार्य और आम जन की उपस्थिति संभव नहीं है। हमारा प्रयास होगा कि सभी लोग अपने-अपने स्थान से ही भूमि पूजन के साक्षी बनें। साथ ही भूमि पूजन में सिख, जैन जैसे धर्मों के महापुरूष भी मौजूद रहें, ऐसी कोशिश होगी, देश के सभी राज्यों के आध्यात्मिक महापुरूषों की उपस्थिति हो सके, इसकी योजना बन रही है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठीक दोपहर एक बजकर 55 मिनट पर श्रीराम हवाईपट्टी पर उतरे। वे सीधे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर चल रही तैयारियां की समीक्षा की। निर्देश दिए कि पूरे परिसर को युद्घ स्तर पर समतलीकरण करते हुए अनावश्यक पड़े वॉच टॉवरों को हटा लिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री समेत अतिथियों के बैठने से लेकर गर्भगृह में भूमि पूजन और सुरक्षा की रणनीति पर भी चर्चा की। उनके साथ प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी भी थे।
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यहां रामलला को राजा अयोध्या बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र की ओर से दिए गए तीन और चांदी के सिंहासन पर भरत, लक्ष्मण व शत्रुहन को विराजमान करके पूजन-अर्चन किया। इसके पहले श्री मिश्र की ओर से रामलला को अस्थाई मंदिर में विराजमान करते समय चांदी का एक सिंहासन भेंट किया गया था। यहां से मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करते हुए ट्रस्ट के कार्यशाला में चल रही तैयारियों को भी देखा। फिर मुख्यमंत्री ने कारसेवकपुरम पहुंचकर बंद कमरे में रामनगरी के शीर्ष 40 संत-धर्माचार्यों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान होने वाली तैयारियों पर चर्चा की। संतों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में अयोध्या को त्रेतायुग में आतताई रावण का वध करके लौटे प्रभु राम के राज्याभिषेक जैसा सजाना होगा।
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पांच सौ साल के प्रयास और संघर्ष के बाद पांच अगस्त की शुभ घड़ी आई है। इस दिन सभी मठ-मंदिरों में संत-धर्माचार्य अखंड रामायण का पाठ आयोजित करें। जगह-जगह रामनाम का संकीर्तन हो, पूरी अयोध्या धर्ममय और राममय नबजर आए। अयोध्या की साफ-सफाई और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रधानमंत्री को दर्शन कराना है। उन्होंने कहा कि मठ-मंदिरों, गलियों और मुहल्लों, सड़कों व घाटों को ऐसा मनोरम बनाना होगा जैसे त्रेतायुग धरती पर उतर आया हो। मुख्यमंत्री ने कोरोना का जिक्र करते हुए कहा कि भूमि पूजन में सभी संत-धर्माचार्यों को निमंत्रित करना ट्रस्ट के लिए संभव नहीं होगा।
आप सभी को भूमि पूजन का लाइव दर्शन अपने-अपने स्थान से सुलभ कराया जाएगा। हम सभी का दायित्व है कि अपने-अपने स्थान से धार्मिक अनुष्ठान के साथ भूमि पूजन के साक्षी बनें। दीपोत्सव के जरिए भूमि पूजन की शोभा बढ़ाएं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि भूमि पूजन के लिए अयोध्या को सजाने संवारने में पूरी ताकत झोंक दें। जन-जन की भागीदारी अपने-अपने घर से सुनिश्चित कराएं। लोग अपने-अपने घरों में दीप जलाकर इस शुभ अवसर पर एक नई दिवाली का आगाज करें।
अयोध्या का उत्साह देखेगी दुनिया: नृत्यगोपाल
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि पांच सौ साल बाद पांच अगस्त को श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन का अवसर सभी संत-धर्माचार्य और सनातन धर्मियों के लिए मनोवांछित फल देने वाला है। इस दिन सभी लोग अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा पाठ, रामनाम संकीर्तन करें,
घरों में दीपमालाएं जलाएं। ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन के कार्यक्रम को घर-घर तक लाइव पहुंचाने की व्यवस्था होगी। अपने-अपने स्थान से सभी लोग हाथ जोड़कर भूमि पूजन के साक्षी बनें।
हमारा प्रयास होगा सभी लोग जुड़े भूमि पूजन से: चंपत
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि कोरोना की वजह से सभी संत-धर्माचार्य और आम जन की उपस्थिति संभव नहीं है। हमारा प्रयास होगा कि सभी लोग अपने-अपने स्थान से ही भूमि पूजन के साक्षी बनें। साथ ही भूमि पूजन में सिख, जैन जैसे धर्मों के महापुरूष भी मौजूद रहें, ऐसी कोशिश होगी, देश के सभी राज्यों के आध्यात्मिक महापुरूषों की उपस्थिति हो सके, इसकी योजना बन रही है।