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फटिक शिला बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिले संत
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मुख्यमंत्री से मुलाकात करते फटिक शिला के महंत शुकदेव दास व अन्य संत।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। सरयू तट पर स्थित अखंड रामनाम जप व संतों की साधना स्थली फटिक शिला को बचाने के लिए संत लामबंद हो चुके हैं।
श्रीराम की मूर्ति के लिए फटिक शिला का भी अधिग्रहण होना है, यदि इसका अधिग्रहण होता है तो इस साधना स्थली का ध्वस्त होना तय है।
संतों ने साधना के इस केंद्र को बचाने के लिए कमर कस ली है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर फटिक शिला की धार्मिक गतिविधियों से अवगत कराते हुए इसके संरक्षण की गुहार लगाई तो मुख्यमंत्री ने भी संतों की मर्यादा के अनुकूल उन्हें आश्वस्त किया कि जहां राम नाम की साधना होती है, उसे कोई कैसे ध्वस्त कर सकता है।
सरयू तट पर योगी सरकार भगवान श्रीराम की 251 मीटर मूर्ति स्थापित करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रशासन द्वारा जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सरयू तट के आस-पास स्थित 28 हेक्टेयर भूमि मूर्ति के लिए अधिग्रहीत की जानी है जिसमें फटिक शिला सहित पांच मंदिर भी शामिल हैं।
फटिक शिला तपस्वी संत नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली है, जहां पिछले 34 वर्षों से अखंड श्रीरामनाम का जप संचालित है तो सैकड़ों संत यहां रहकर रामनाम का जाप करते हैं।
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फटिक शिला के महंत शुकदेव दास ने बताया कि संतों की साधनास्थली को बचाने के लिए हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें स्थान की महिमा बताते हुए इसकी धार्मिक गतिविधियों से भी अवगत कराते हुए संरक्षण की गुहार लगाई।
उन्होंने बताया कि हमारे साथ मणिरामदास की छावनी श्रीमहंत कमलनयन दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत रामाज्ञा दास, महंत रामानंद दास, कमलेश सिंह सहित अन्य शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने तपस्वी संत बगही बाबा की इस विरासत को सहेजने के लिए पूर्णरूप से आश्वस्त किया है। हमें उम्मीद है कि रामनगरी के इस सनातन संस्कृति की अलौकिक कीर्ति को सुरक्षित करने के लिए शासन कोई न कोई उपाय जरूर करेगा।
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श्रीराम की मूर्ति के लिए फटिक शिला का भी अधिग्रहण होना है, यदि इसका अधिग्रहण होता है तो इस साधना स्थली का ध्वस्त होना तय है।
संतों ने साधना के इस केंद्र को बचाने के लिए कमर कस ली है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर फटिक शिला की धार्मिक गतिविधियों से अवगत कराते हुए इसके संरक्षण की गुहार लगाई तो मुख्यमंत्री ने भी संतों की मर्यादा के अनुकूल उन्हें आश्वस्त किया कि जहां राम नाम की साधना होती है, उसे कोई कैसे ध्वस्त कर सकता है।
सरयू तट पर योगी सरकार भगवान श्रीराम की 251 मीटर मूर्ति स्थापित करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रशासन द्वारा जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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सरयू तट के आस-पास स्थित 28 हेक्टेयर भूमि मूर्ति के लिए अधिग्रहीत की जानी है जिसमें फटिक शिला सहित पांच मंदिर भी शामिल हैं।
फटिक शिला तपस्वी संत नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली है, जहां पिछले 34 वर्षों से अखंड श्रीरामनाम का जप संचालित है तो सैकड़ों संत यहां रहकर रामनाम का जाप करते हैं।
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फटिक शिला के महंत शुकदेव दास ने बताया कि संतों की साधनास्थली को बचाने के लिए हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें स्थान की महिमा बताते हुए इसकी धार्मिक गतिविधियों से भी अवगत कराते हुए संरक्षण की गुहार लगाई।
उन्होंने बताया कि हमारे साथ मणिरामदास की छावनी श्रीमहंत कमलनयन दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत रामाज्ञा दास, महंत रामानंद दास, कमलेश सिंह सहित अन्य शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने तपस्वी संत बगही बाबा की इस विरासत को सहेजने के लिए पूर्णरूप से आश्वस्त किया है। हमें उम्मीद है कि रामनगरी के इस सनातन संस्कृति की अलौकिक कीर्ति को सुरक्षित करने के लिए शासन कोई न कोई उपाय जरूर करेगा।