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साकेत कॉलेज की केमिस्ट्री लैब भी नहीं बता पाए तोमर
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 11 Jun 2015 11:25 PM IST
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फर्जी डिग्री में गिरफ्तार दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर साकेत कॉलेज की केमिस्ट्री लैब तक नहीं बता पाए। तोमर को रिमांड पर लेकर आई दिल्ली पुलिस जांच को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे दिन बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे साकेत कॉलेज पहुंची।
प्राचार्य कक्ष में तोमर से तीन घंटे तक पूछताछ हुई। जांच टीम ने बीएससी वर्ष 1986-87 व 1987-88 के दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच टीम को लीड कर रहे एसीपी एसपी त्यागी ने उनसे ठहरने से लेकर पुराने मित्र, दुकानदार, रूम मेट व मालिक आदि के बारे जुड़वां शहर में घुमाकर पूछताछ की लेकिन तोमर इधर-उधर टहलाते रहे।
दोपहर बाद पौने तीन बजे उन्हें लैब दिखाने को कहा गया। इस पर तोमर बाहर आए और कॉलेज के विज्ञान भवन में घुस तो गए, लेकिन केमिस्ट्री लैब नहीं बता सके। हालांकि जांच के दौरान तोमर अंतिम वक्त तक साकेत में ही बीएससी की पढ़ाई करने की बात पर अड़े दिखे।
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सब मिला फर्जी, मार्क्सशीट पर प्राचार्य के हस्ताक्षर तक नहीं
साकेत के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र नाथ दुबे ने बताया कि तोमर ने बीएससी प्रथम वर्ष 1986-87 व अंतिम वर्ष 1987-88 में न यहां प्रवेश लिया और न ही एग्जाम दिया। विवि से आई क्रॉस लिस्ट में उनका नाम व अनुक्रमांक नंबर तक नहीं है। प्रवेश के सभी रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजिका, प्रैक्टिकल आदि कोई रिकॉर्ड तोमर नाम के छात्र की पुष्टि नहीं करता। मार्क्सशीट पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजदेव मिश्र के हस्ताक्षर नहीं थे। दो कर्मियों के भी हस्ताक्षर फर्जी मिले हैं। मार्कशीट की छपाई, रोल नंबर, क्रम संख्या सब गलत पाई गई।
सुबूत दिखाती रही पुलिस, अड़े रहे तोमर
दिल्ली पुलिस बार-बार उन्हें सुबूत दिखाती रही, लेकिन तोमर यह मानने को तैयार नहीं थे कि वे साकेत के स्टूडेंट नहीं थे। वे खुद को फर्जी डिग्री का शिकार मान रहे थे, लेकिन किसने दी, वे कुछ बता नहीं रहे थे। तोमर के पक्ष में कॉलेज की ओर से मार्च माह की एक आरटीआई में भी सभी जानकारी व हस्ताक्षर पैड आदि फर्जी थे। प्राचार्य सुरेंद्र दुबे ने कहा कि उन्होंने तोमर मामले में आरटीआई के तहत तीन पत्रों के जवाब दिए हैं। जिस पर कॉलेज ने मार्क्सशीट जारी न किए जाने की जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस ने सभी दस्तावेज कब्जे में ले लिए।
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प्राचार्य कक्ष में तोमर से तीन घंटे तक पूछताछ हुई। जांच टीम ने बीएससी वर्ष 1986-87 व 1987-88 के दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच टीम को लीड कर रहे एसीपी एसपी त्यागी ने उनसे ठहरने से लेकर पुराने मित्र, दुकानदार, रूम मेट व मालिक आदि के बारे जुड़वां शहर में घुमाकर पूछताछ की लेकिन तोमर इधर-उधर टहलाते रहे।
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दोपहर बाद पौने तीन बजे उन्हें लैब दिखाने को कहा गया। इस पर तोमर बाहर आए और कॉलेज के विज्ञान भवन में घुस तो गए, लेकिन केमिस्ट्री लैब नहीं बता सके। हालांकि जांच के दौरान तोमर अंतिम वक्त तक साकेत में ही बीएससी की पढ़ाई करने की बात पर अड़े दिखे।
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सब मिला फर्जी, मार्क्सशीट पर प्राचार्य के हस्ताक्षर तक नहीं
साकेत के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र नाथ दुबे ने बताया कि तोमर ने बीएससी प्रथम वर्ष 1986-87 व अंतिम वर्ष 1987-88 में न यहां प्रवेश लिया और न ही एग्जाम दिया। विवि से आई क्रॉस लिस्ट में उनका नाम व अनुक्रमांक नंबर तक नहीं है। प्रवेश के सभी रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजिका, प्रैक्टिकल आदि कोई रिकॉर्ड तोमर नाम के छात्र की पुष्टि नहीं करता। मार्क्सशीट पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजदेव मिश्र के हस्ताक्षर नहीं थे। दो कर्मियों के भी हस्ताक्षर फर्जी मिले हैं। मार्कशीट की छपाई, रोल नंबर, क्रम संख्या सब गलत पाई गई।
सुबूत दिखाती रही पुलिस, अड़े रहे तोमर
दिल्ली पुलिस बार-बार उन्हें सुबूत दिखाती रही, लेकिन तोमर यह मानने को तैयार नहीं थे कि वे साकेत के स्टूडेंट नहीं थे। वे खुद को फर्जी डिग्री का शिकार मान रहे थे, लेकिन किसने दी, वे कुछ बता नहीं रहे थे। तोमर के पक्ष में कॉलेज की ओर से मार्च माह की एक आरटीआई में भी सभी जानकारी व हस्ताक्षर पैड आदि फर्जी थे। प्राचार्य सुरेंद्र दुबे ने कहा कि उन्होंने तोमर मामले में आरटीआई के तहत तीन पत्रों के जवाब दिए हैं। जिस पर कॉलेज ने मार्क्सशीट जारी न किए जाने की जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस ने सभी दस्तावेज कब्जे में ले लिए।