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आतंकी हमले की बरसी पर अलर्ट पर रही रामनगरी
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अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमले की 16 वीं बरसी पर सोमवार को रामनगरी अलर्ट पर रही। सुरक्षा-व्यवस्था सख्त रही। दिन भर चेकिंग अभियान चलता रहा। सीमाओं पर विशेष निगरानी की जाती रही।
प्रवेश मार्गों पर आने-जाने वालों की पुलिस आईडी चेक कर रही थी। साथ ही रामजन्मभूमि क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। पुलिस ने होटल और धर्मशालाओं को भी खंगाला।
अधिग्रहीत परिसर पर 05 जुलाई 2005 को अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने हमला कर दिया था। हमला करने वाले सभी फिदाईन मार दिए गए थे। हमले के सोमवार को 16 वर्ष पूरे हो गए।
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इसको लेकर पुलिस ने अयोध्या को कड़े सुरक्षा कवच में जकड़ दिया है। हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर पुलिस की नजर गड़ी रही। सुबह से लेकर देर रात तक पुलिस पूरे शहर में चेकिंग अभियान चलाती नजर आई।
सार्वजनिक स्थलों होटल, धर्मशाला, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन को खंगाला जाता रहा। रामनगरी के प्रवेश मार्गों पर कड़ी चौकसी बरतते हुए बिना पहचान पत्र के लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया।
अयोध्या की सीमा से लेकर सरयू स्नानघाटों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई। प्रमुख मंदिरों के इर्द-गिर्द सादे वर्दी में पुलिस की टीम निगरानी करती रही। खासकर रामजन्मभूमि क्षेत्र में पुलिस टीम अलर्ट पर रही।
रामकोट इलाके में सोमवार को बिना चेकिंग के किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं दिया गया। रामनगरी के आउटर एरिया में भी बैरियर लगाकर पुलिस टीम चेकिंग अभियान चलाती रही।
एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि आतंकी हमले की बरसी को देखते हुए रामनगरी की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। शहर की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है। पुलिस टीमों को मोबाइल रहने के निर्देश दिए गए हैं।
05 जुलाई 2005 को सुबह करीब सवा नौ बजे रामनगरी गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी थी। अयोध्या के अधिग्रहीत परिसर में असलहों से लैस आतंकी घुस गए थे।
वे लगातार फायरिंग करते हुए उस समय मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर (विराजमान रामलला) की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि पीएसी व सीआरपीएफ के जवानों की बहादुरी से वे अपनी मंशा में कामयाब नहीं हो सके।
सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए। दो निर्दोष लोगों को भी अपनी जान गवांनी पड़ी। सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद हुई जांच में आतंकियों को असलहों की सप्लाई और मदद करने में जो नाम सामने आए उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आतंकी हमले के 14 साल बाद 18 जून 2019 को प्रयागराज की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया।
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प्रवेश मार्गों पर आने-जाने वालों की पुलिस आईडी चेक कर रही थी। साथ ही रामजन्मभूमि क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। पुलिस ने होटल और धर्मशालाओं को भी खंगाला।
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अधिग्रहीत परिसर पर 05 जुलाई 2005 को अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने हमला कर दिया था। हमला करने वाले सभी फिदाईन मार दिए गए थे। हमले के सोमवार को 16 वर्ष पूरे हो गए।
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इसको लेकर पुलिस ने अयोध्या को कड़े सुरक्षा कवच में जकड़ दिया है। हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर पुलिस की नजर गड़ी रही। सुबह से लेकर देर रात तक पुलिस पूरे शहर में चेकिंग अभियान चलाती नजर आई।
सार्वजनिक स्थलों होटल, धर्मशाला, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन को खंगाला जाता रहा। रामनगरी के प्रवेश मार्गों पर कड़ी चौकसी बरतते हुए बिना पहचान पत्र के लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया।
अयोध्या की सीमा से लेकर सरयू स्नानघाटों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई। प्रमुख मंदिरों के इर्द-गिर्द सादे वर्दी में पुलिस की टीम निगरानी करती रही। खासकर रामजन्मभूमि क्षेत्र में पुलिस टीम अलर्ट पर रही।
रामकोट इलाके में सोमवार को बिना चेकिंग के किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं दिया गया। रामनगरी के आउटर एरिया में भी बैरियर लगाकर पुलिस टीम चेकिंग अभियान चलाती रही।
एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि आतंकी हमले की बरसी को देखते हुए रामनगरी की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। शहर की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है। पुलिस टीमों को मोबाइल रहने के निर्देश दिए गए हैं।
05 जुलाई 2005 को सुबह करीब सवा नौ बजे रामनगरी गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी थी। अयोध्या के अधिग्रहीत परिसर में असलहों से लैस आतंकी घुस गए थे।
वे लगातार फायरिंग करते हुए उस समय मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर (विराजमान रामलला) की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि पीएसी व सीआरपीएफ के जवानों की बहादुरी से वे अपनी मंशा में कामयाब नहीं हो सके।
सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए। दो निर्दोष लोगों को भी अपनी जान गवांनी पड़ी। सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद हुई जांच में आतंकियों को असलहों की सप्लाई और मदद करने में जो नाम सामने आए उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आतंकी हमले के 14 साल बाद 18 जून 2019 को प्रयागराज की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया।