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हर घर में होना चाहिए रामचरित मानस का पाठ- रामदिनेशाचार्य
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण प्रारंभ होने की खुशी में गुरुवार को श्रीहरिधाम गोपाल पीठ में नौ दिवसीय रामकथा का शुभारंभ हुआ। रामकथा के पहले दिन भक्तों को रामकथा की महिमा सुनाते हुए ज.गु.रामदिनेशाचार्य ने कहा कि रामकथा तन-मन को पवित्र करती है।
इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक, दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है, लेकिन यह भगवान की कथा है, सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है।
हर घर में प्रतिदिन रामचरित मानस का पाठ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत की कृपा से सत्संग मिलता है और जब संत विशेष कृपा करता है तो समागम मिल जाता है। सत्य का महत्व तब ही है जबकि सत्य को जीवन में मन, वचन, कर्म से स्वीकार किया जाए।
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सत्य का आचरण करने वाला व्यक्ति ही सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त करता है। कथा के शुभारंभ से पूर्व मंदिर से सरयू तट तक कलश यात्रा भी निकाली गई।
कथा का शुभारंभ मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास व महंत कौशल किशोर शरण फलाहारी द्वारा द्वीप प्रज्वलन कर किया गया।
कथा के आयोजक नई दिल्ली निवासी नरेश गर्ग ने बताया कि राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद से ही वे अयोध्या में श्रीरामकथा का आयोजन करना चाहते थे।
कोरोना के चलते विलंब हुआ, रामजन्मभूमि पर रामकथा का सहभागी बनकर जीवन धन्य हो गया है। कथा अवसर पर महंत सुरेश दास, ज.गु.रत्नेशाचार्य, संत रामभूषणदास कृपालु, संत एमबीदास, संत गौरव दास सहित अन्य संत-धर्माचार्य व भक्त मौजूद रहे।
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इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक, दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है, लेकिन यह भगवान की कथा है, सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है।
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हर घर में प्रतिदिन रामचरित मानस का पाठ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत की कृपा से सत्संग मिलता है और जब संत विशेष कृपा करता है तो समागम मिल जाता है। सत्य का महत्व तब ही है जबकि सत्य को जीवन में मन, वचन, कर्म से स्वीकार किया जाए।
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सत्य का आचरण करने वाला व्यक्ति ही सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त करता है। कथा के शुभारंभ से पूर्व मंदिर से सरयू तट तक कलश यात्रा भी निकाली गई।
कथा का शुभारंभ मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास व महंत कौशल किशोर शरण फलाहारी द्वारा द्वीप प्रज्वलन कर किया गया।
कथा के आयोजक नई दिल्ली निवासी नरेश गर्ग ने बताया कि राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद से ही वे अयोध्या में श्रीरामकथा का आयोजन करना चाहते थे।
कोरोना के चलते विलंब हुआ, रामजन्मभूमि पर रामकथा का सहभागी बनकर जीवन धन्य हो गया है। कथा अवसर पर महंत सुरेश दास, ज.गु.रत्नेशाचार्य, संत रामभूषणदास कृपालु, संत एमबीदास, संत गौरव दास सहित अन्य संत-धर्माचार्य व भक्त मौजूद रहे।