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जमीयत की पुनर्विचार याचिका देश का माहौल बिगाडने का प्रयास : विहिप
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अयोध्या। अयोध्या मामले में आए फैसले के बाद पुनर्विचार याचिका डालने वाले मुस्लिम पक्ष पर विहिप ने देश का शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कुछ मुस्लिम संगठन श्रीराम जन्मभूमि के फैसले पर पुनर्विचार याचिका डालकर देश का शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब तो भोलेनाथ और श्रीकृष्ण भक्तों को भी अपने संकल्पों का स्मरण करना होगा। उन्हें ज्ञात होता चाहिए कि काशी विश्वनाथ और श्रीकृष्ण जन्मभूमि अभी भक्तों के एजेंडे से विस्मृत नहीं हुआ है।
अयोध्या विवाद फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुये विहिप ने कहा यह पुनर्विचार याचिका श्रीराम जन्मभूमि पर कोर्ट का जो भी निर्णय आगा, उसे मानने की बात करने वाले शांति प्रिय मुस्लिमों का अपमान है।
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असलियत में इस याचिका के पीछे राष्ट्र विरोधी शक्तियां सक्रिय हैं। जो नहीं चाहती कि हिंदुओं और मुस्लिमों में आपसी समन्वय स्थापित हो। फैसला आने के पश्चात ही कुछ मुस्लिम पक्षकारों ने आगे अपील करने से इंकार कर दिया था जिसका संपूर्ण देश में स्वागत हुआ।
लोगों को प्रतीत हुआ कि अब इस विषय का अंत हो गया लेकिन कुछ तत्वों को यह हजम नहीं हुआ। उन्होंने कहा वैसे तो इस याचिका का हश्र क्या होगा यह इस मामले से जुड़े कानूनविदों को मालूम है। परंतु इस याचिका ने भोलेनाथ और श्रीकृष्ण भक्तों को सोचने के लिए जरूर मजबूर कर दिया है।
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विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कुछ मुस्लिम संगठन श्रीराम जन्मभूमि के फैसले पर पुनर्विचार याचिका डालकर देश का शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब तो भोलेनाथ और श्रीकृष्ण भक्तों को भी अपने संकल्पों का स्मरण करना होगा। उन्हें ज्ञात होता चाहिए कि काशी विश्वनाथ और श्रीकृष्ण जन्मभूमि अभी भक्तों के एजेंडे से विस्मृत नहीं हुआ है।
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अयोध्या विवाद फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुये विहिप ने कहा यह पुनर्विचार याचिका श्रीराम जन्मभूमि पर कोर्ट का जो भी निर्णय आगा, उसे मानने की बात करने वाले शांति प्रिय मुस्लिमों का अपमान है।
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असलियत में इस याचिका के पीछे राष्ट्र विरोधी शक्तियां सक्रिय हैं। जो नहीं चाहती कि हिंदुओं और मुस्लिमों में आपसी समन्वय स्थापित हो। फैसला आने के पश्चात ही कुछ मुस्लिम पक्षकारों ने आगे अपील करने से इंकार कर दिया था जिसका संपूर्ण देश में स्वागत हुआ।
लोगों को प्रतीत हुआ कि अब इस विषय का अंत हो गया लेकिन कुछ तत्वों को यह हजम नहीं हुआ। उन्होंने कहा वैसे तो इस याचिका का हश्र क्या होगा यह इस मामले से जुड़े कानूनविदों को मालूम है। परंतु इस याचिका ने भोलेनाथ और श्रीकृष्ण भक्तों को सोचने के लिए जरूर मजबूर कर दिया है।