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रामलला के भव्य मंदिर निर्माण में आखिरी अड़चन भी ढही

Fri, 13 Dec 2019 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Dec 2019 12:12 AM IST
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अयोध्या। रामलला का भव्य व दिव्य मंदिर बनने की राह में खड़ी की गई आखिरी बाधा भी अब ढह गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही 18 पुनर्विचार याचिकाएं रद्द कर दीं।
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अयोध्या में- सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न सब केर..भगवान राम के वनवास खत्म होने जैसी खुशी छा गई। सूरज ढलने के साथ देर रात तक मठ-मंदिरों से लेेकर सड़कों-गलियों और सोशल मीडिया लोग चहकते और खुशी का इजहार करते दिखे।
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हर तरफ एक ही स्वर गूंज रहा है कि अब अयोध्या का पुराना वैभव लौटने में देर नहीं लगेगी। हालांकि कुछ मुस्लिम पक्षकार फैसले के बाद भी आखिरी कोशिश के लिए क्यूरेटिव पिटीशन का विकल्प आजमाने की बात कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर की संविधान पीठ ने नौ नवंबर को 1045 पन्नों के अपने ऐतिहासिक फैसले में रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपते हुए मंदिर बनाने के लिए सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था।
राममंदिर ट्रस्ट के लिए तैयारी भी शुरू हो गई थी। मेक शिफ्ट स्ट्रक्टर में विराजमान रामलला की संपूर्ण व्यवस्था के लिए नियुक्त रिसीवर/मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल और जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की ओर केंद्रीय गृह मंत्रालय को मालिकाना हक के लिए लड़ी जा रही 2.77 एकड़ भूमि समेत भव्य राममंदिर के लिए शेष अधिग्रहीत 67 एकड़ भूमि की पूरी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
भूमि के साथ कमिश्नर के खाते में जमा रामलला को प्राप्त चढ़ावे व दान के रूप में करीब 10 करोड़ रुपये के ट्रांसफर का प्रस्ताव भी भेजा गया है। उधर, राज्य सरकार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अयोध्या के पर्यटन व ढांचागत विकास के लिए अयोध्या तीर्थ विकास परिषद बनाने की तैयारी में है।
इस बीच मामले में रिव्यू याचिका को लेकर मुस्लिम पक्षकार दो गुटों में बंट गये। मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि फैसला आने के बाद वे आगे किसी भी लड़ाई के लिए तैयार नहीं हुए, बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने उन्हें रिव्यू पिटीशन के लिए कई बार कहा, मगर वे इसे बेवजह मानते रहे।
अंतत: अन्य सात पक्षकार मौलाना मुफ्ती हस्बुल्लाह, मो. उमर, मौलाना महफूज उर रहमान, मिसबाउद्दीन, रिजवान, हाजी महबूब, असद और अयूब की ओर से रिव्यू पिटीशन दाखिल हुआ। बृहस्पतिवार को याचिकाएं खारिज होने के बाद अब सभी को गंगा-जमुनी तहजीब पेश करनी चाहिए। जबकि याचिका करने वाले कुछ पक्षकार अभी भी मानने के तैयार नहीं दिखते, वे अगले कदम के लिए तैयारी की बात कर रहे हैं।
हाजी महबूब ने कहा कि रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता के पास क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का भी अधिकार होता है। फिलहाल बोर्ड तया करेगा कि अगला कदम क्या हो।

निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि हम पंचों ने पहले ही रिव्यू पिटीशन नहीं करने का फैसला लिया था, मगर दिल्ली में संरपंच राजारामचंद्राचार्य ने अधिवक्ताओं की राय के बाद याचिका दायर कराई थी। याचिका मतलब सिर्फ यह था कि उन्हें राममंदिर ट्रस्ट में संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश सरकार को दिए थे, उस पर सरकार क्या कर रही कुछ पता नहीं चल रहा था और मुस्लिम पक्ष का विरोध इसी अनुच्छेद को लेकर था। ऐसे में अनुच्छेद 141 समाप्त होते ही मेरा अधिकार भी समाप्त हो जाता जबकि, दावा हमारा ही शुरूआत से था।
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