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संसाधन और सुविधाएं होने के बाद भी नहीं हो रहे ऑपरेशन

Thu, 07 Apr 2022 12:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 12:07 AM IST
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Operation is not happening even after having resources and facilities
अयोध्या। जिले के राजकीय श्रीराम चिकित्सालय और कुमारगंज के अस्पताल में संसाधन व सुविधाएं पर्याप्त होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। इसके पीछे जनरल सर्जन व बेहोशी के चिकित्सकों की कमी प्रमुख कारण है।
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वहीं, दो अन्य अस्पतालों में भी मैन पावर कम है, जिसकी वजह से मरीजों की भारी भीड़ रहती है और मरीजों को असुविधाओं का सामना भी करना पड़ता है।
हालांकि, नई सरकार बनने के बाद चिकित्सकों की कमी दूर करने पर खासा जोर दिया जा रहा है, जिससे सेवाएं बहाल होने की उम्मीद जगी है। जिले की आबादी इन दिनों करीब 29 लाख बताई जा रही है।
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इतनी बड़ी जनसंख्या को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं मुहैया कराने के लिए मेडिकल कॉलेज, सीएचसी व पीएचसी के अलावा चार जिला स्तरीय अस्पताल संचालित हैं।
इनमें 212 बेड का जिला अस्पताल, 168 बेड का महिला अस्पताल व इसी परिसर में चल रहा 100 बेड का मैटरनिटी विंग, 120 बेड का श्रीराम चिकित्सालय व कुमारगंज में स्थित 100 बेड का चिकित्सालय शामिल हैं।
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इनमें मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल में तो कुछ हद तक सुविधाएं ठीकठाक मिल रही हैं, शेष दोनों अस्पतालों की हालत खस्ता है।
राजकीय श्रीराम अस्पताल रामनगरी में स्थित होने के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण है। अयोध्या में प्रतिदिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है।
यहां भी ओटी बनी है, ऑपरेशन करने की सभी व्यवस्थाएं भी हैं, लेकिन जनरल सर्जरी काफी समय से ठप चल रही है। कारण है कि यहां एक भी सर्जन व रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है।
करीब साल भर पूर्व ही यहां पर तैनात रहे सर्जन डॉ. दिग्विजय नाथ का गैर जनपद तबादला कर दिया गया। तभी से किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई। जबकि, यहां दो सर्जन के पद स्वीकृत हैं।
निश्चेतक तो एक मौजूद हैं, उनका उपयोग सिर्फ हड्डी के ही ऑपरेशन तक सीमित है। सर्जन न होने की वजह से यहां पर हाइड्रोसील, हार्निया, पथरी, गर्भाशय, तमाम तरह के ट्यूमर आदि की सर्जरी ठप हो गई है।
वहीं, कुमारगंज में 100 बेड का अस्पताल पिछले साल मुख्यमंत्री के दखल के बाद शुरू कर दिया गया है। यहां भी हाइटेक ओटी के अलावा तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं, लेकिन चिकित्सक न होने से यहां भी बड़े ऑपरेशन नहीं होते हैं।
कुछ छोटे-मोटे ऑपरेशन ही हो पाते हैं, जिनमें निश्चेतक का रोल नहीं होता है। यहां पर दो जनरल सर्जन तो तैनात हैं, लेकिन निश्चेतक एक भी तैनात नहीं किया गया है, जबकि निश्चेतक के यहां चार पद स्वीकृत हैं। ऐसे में यहां पर बनी हाइटेक ओटी निष्प्रयोज्य साबित हो रही है।
दो अस्पतालों में सर्जरी ठप होने के कारण मुख्यालय पर स्थित जिला पुरुष व महिला अस्पताल में मरीजों का तांता रहता है। जिला अस्पताल में माह में करीब 120-150 ऑपरेशन तक किए जाते हैं।
मरीजों का कई दिन बाद नंबर आता है। सर्जन डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन जिला अस्पताल में 4-6 ऑपरेशन विभिन्न प्रकार के किए जाते हैं।
वहीं, जिला महिला अस्पताल में भी प्रतिमाह करीब 150 तक सीजेरियन प्रसव होते हैं। जबकि, करीब 10 अन्य ऑपरेशन भी होते हैं। यहां भी चिकित्सकों के तमाम पद रिक्त होने से काफी असुविधाएं होती हैं। भीड़ की वजह से इलाज को लेकर आए दिन यहां भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। जिसे दूर करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजते हुए तैनाती की मांग की गई है। शीघ्र ही चिकित्सकों की तैनाती का आश्वासन मिला है। चिकित्सक तैनात होने की सेवाएं बहाल होंगी। -डॉ. सतीश श्रीवास्तव, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
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