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दो हजार में तैयार हो रहा नर्सरी का बैग
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अयोध्या। महंगाई ने जहां आम आदमी को परेशान कर रखा है वहीं बीते दो वर्षों की अपेक्षा 20 गुना बढ़े कॉपी-किताबों के दामों ने अपने नौनिहालों को बेहतर शिक्षा दिलाने का स्वप्न देखने वाले अभिभावकों की कमर तोड़ कर रख दी है।
बच्चों के भविष्य के लिए वह अपने सभी खर्चों में कटौती कर इसे खरीद ही रहे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नर्सरी से कक्षा-8 तक के कॉपी-किताब में हुई है।
पहले से सेट पैक में मिलने वाले इन किताब कापियों का मनमाना दाम वसूल किया जा रहा है। नर्सरी क्लास का बैग आज 2000 रुपये में तैयार हो रहा है। हालत ये है कि जिनके एक से अधिक बच्चे हैं वह कर्जा लेकर बच्चों की कॉपी-किताब, स्कूल ड्रेस आदि खरीद रहे हैं।
एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल व गैस सिलेंडरों समेत सब्जी व राशन की कीमतों ने आम आदमी का जीना मुहाल किया वहीं पहले से कई गुना महंगी हुई शिक्षा ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है। नए शिक्षण सत्र का शुभारंभ हो चुका है।
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बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की चाह रखने वाले अभिभावक स्कूल की मोटी फीस भरकर जब कॉपी-किताब खरीदने पहुंच रहे हैं तो उनके दाम सुनकर चकित हो जा रहे हैं।
दो साल से कोरोना के चलते बाधित रही पढ़ाई अब ढर्रे पर आने लगी है, इसलिए अपने भविष्य को संवारने के लालच में अभिभावक कर्ज के बोझ के तले दबते चले जा रहे हैं। सभी स्कूलों की कॉपी-किताबें विशेष दुकान पर ही मिल रही हैं।
यहां नर्सरी से लेकर कक्षा-8 तक की कॉपी-किताबों का पहले से पैक सेट मिल रहा है। इनके दामों में दो वर्ष की अपेक्षा 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी कर दी गई है।
एक मध्यम वर्गीय स्कूल का नर्सरी से लेेकर कक्षा-5 तक सेट 1200 से 5500 रुपये तक जबकि अच्छे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का सेट 2000 से 7000 हजार रुपये तक मिल रहा है।
इन सेटों में सभी विषयों की किताबें, संबंधित कॉपियां, पेन-पेंसिल, रबर, कटर, ज्यामेट्री बॉक्स, कवर आदि होता है। स्टेशनरी के दुकानदारों का कहना है कि कागज के दामों में बढ़ोतरी के चलते कॉपी-किताबों के दामों में वृद्धि हुई है।
इसके चलते दो वर्ष पूर्व प्ले नर्सरी की करीब 800 रुपये में मिलने वाला सेट अब 1200 रुपये से ज्यादा हो गया है। बड़े स्कूलों के सेटों की कीमत 1500 के आसपास पहुंच गई है।
कई स्कूलों के रेट में भी फर्क दिखाई पड़ रहा है। कक्षाएं एक होने के बाद भी कॉपी-किताबों के रेट में फर्क दिखाई पड़ रहा है। अमूमन हर स्कूल की कॉपी-किताबों का सेट पहले से तय दुकान पर मिलता है।
दूसरी दुकानों पर आपको स्कूल द्वारा तय किताबें नहीं मिलेंगी। यही नहीं आपको स्कूल की ड्रेस, जूते-मोजे, टाई-बेल्ट आदि भी तय दुकानों पर ही मिलेंगी। इनकी कीमत सामान्य से भी ज्यादा होती है।
क्वालिटी भी घटिया स्तर की होती है। कॉपियों के साथ रेपर व नेम स्लिप भी लेना अनिवार्य रहता है। इसके बीच शुद्ध रूप से कमीशन का खेल नजर आता है।
वस्तुएं पहले की कीमत आज की कीमत
स्कूली बैग 250 375
पेंसिल पैकेट 40 60
रबर का पैकेट 40 60
कटर का पैकेट 60 100
पानी की बोतल 150 200
लंच बॉक्स 80 140
आज नर्सरी क्लास के बच्चों के कापी किताब-जूते मोजे अन्य सामग्री पर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इनमें फीस नहीं शामिल हैं। कुछ अभिभावक अपने दो से तीन माह का बजट खराब कर रहे हैं तो कुछ कर्ज में जा रहे हैं। -रेनू देवी, लवकुशनगर
कोरोना कल में प्राइवेट स्कूलों ने न तो फीस माफ की और न ही कॉपी-किताबों पर छूट दी। कोरोना खत्म होने के बाद दाम और बढ़ गए हैं। पहले जो कापी किताबों का सेट 3000 में था वह अब 5000 हजार हो चुका है।- शक्ति सिंह, गद्दोपुर।
कॉपी-किताब पहले से काफी महंगी हो गई हैं। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आम आदमी के बस की बात नहीं रही। मेरे बच्चे के एक क्लास आगे जाने पर कापी-किताबों की कीमत दो हजार रुपये तक बढ़ गई।- शिप्रा श्रीवास्तव, रायगंज
आम आदमी जैसे-तैसे बच्चों की कॉपी किताब खरीद रहे हैं। स्कूलों की फीस हो, पढ़ाई का कोर्स हर साल बढ़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों की कॉपी किताब से अतिरिक्त भार भर रहा है। हर साल किताबें बदल जा रही है।-आशीष सिंह, सरयू बिहार कॉलोनी
पढ़ाई पर महंगाई छा गई है। पिछले साल कॉपी-किताब का सेट 5000 में था। मेरा दूसरा बच्चा उसी क्लास में पहुंचा तो वह काफी किताबें नहीं चल रही। बैग से लेकर जूता मोजा, पानी की बोतल, लंच बॉक्स सभी के दाम बढ़ गए हैं। लक्ष्मी श्रीवास्तव, मानस नगर
आज बच्चों की पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है। फीस से लेकर, स्कूल वाहन का किराया उसके बाद कॉपी-किताब खरीदने में आम आदमी की कमर टूट जा रही है। किताबों की कीमतें एक ही साल में दोगुनी हो गई हैं।-मुुकेश वाधवानी, झारखंडी
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बच्चों के भविष्य के लिए वह अपने सभी खर्चों में कटौती कर इसे खरीद ही रहे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नर्सरी से कक्षा-8 तक के कॉपी-किताब में हुई है।
पहले से सेट पैक में मिलने वाले इन किताब कापियों का मनमाना दाम वसूल किया जा रहा है। नर्सरी क्लास का बैग आज 2000 रुपये में तैयार हो रहा है। हालत ये है कि जिनके एक से अधिक बच्चे हैं वह कर्जा लेकर बच्चों की कॉपी-किताब, स्कूल ड्रेस आदि खरीद रहे हैं।
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एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल व गैस सिलेंडरों समेत सब्जी व राशन की कीमतों ने आम आदमी का जीना मुहाल किया वहीं पहले से कई गुना महंगी हुई शिक्षा ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है। नए शिक्षण सत्र का शुभारंभ हो चुका है।
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बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की चाह रखने वाले अभिभावक स्कूल की मोटी फीस भरकर जब कॉपी-किताब खरीदने पहुंच रहे हैं तो उनके दाम सुनकर चकित हो जा रहे हैं।
दो साल से कोरोना के चलते बाधित रही पढ़ाई अब ढर्रे पर आने लगी है, इसलिए अपने भविष्य को संवारने के लालच में अभिभावक कर्ज के बोझ के तले दबते चले जा रहे हैं। सभी स्कूलों की कॉपी-किताबें विशेष दुकान पर ही मिल रही हैं।
यहां नर्सरी से लेकर कक्षा-8 तक की कॉपी-किताबों का पहले से पैक सेट मिल रहा है। इनके दामों में दो वर्ष की अपेक्षा 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी कर दी गई है।
एक मध्यम वर्गीय स्कूल का नर्सरी से लेेकर कक्षा-5 तक सेट 1200 से 5500 रुपये तक जबकि अच्छे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का सेट 2000 से 7000 हजार रुपये तक मिल रहा है।
इन सेटों में सभी विषयों की किताबें, संबंधित कॉपियां, पेन-पेंसिल, रबर, कटर, ज्यामेट्री बॉक्स, कवर आदि होता है। स्टेशनरी के दुकानदारों का कहना है कि कागज के दामों में बढ़ोतरी के चलते कॉपी-किताबों के दामों में वृद्धि हुई है।
इसके चलते दो वर्ष पूर्व प्ले नर्सरी की करीब 800 रुपये में मिलने वाला सेट अब 1200 रुपये से ज्यादा हो गया है। बड़े स्कूलों के सेटों की कीमत 1500 के आसपास पहुंच गई है।
कई स्कूलों के रेट में भी फर्क दिखाई पड़ रहा है। कक्षाएं एक होने के बाद भी कॉपी-किताबों के रेट में फर्क दिखाई पड़ रहा है। अमूमन हर स्कूल की कॉपी-किताबों का सेट पहले से तय दुकान पर मिलता है।
दूसरी दुकानों पर आपको स्कूल द्वारा तय किताबें नहीं मिलेंगी। यही नहीं आपको स्कूल की ड्रेस, जूते-मोजे, टाई-बेल्ट आदि भी तय दुकानों पर ही मिलेंगी। इनकी कीमत सामान्य से भी ज्यादा होती है।
क्वालिटी भी घटिया स्तर की होती है। कॉपियों के साथ रेपर व नेम स्लिप भी लेना अनिवार्य रहता है। इसके बीच शुद्ध रूप से कमीशन का खेल नजर आता है।
वस्तुएं पहले की कीमत आज की कीमत
स्कूली बैग 250 375
पेंसिल पैकेट 40 60
रबर का पैकेट 40 60
कटर का पैकेट 60 100
पानी की बोतल 150 200
लंच बॉक्स 80 140
आज नर्सरी क्लास के बच्चों के कापी किताब-जूते मोजे अन्य सामग्री पर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इनमें फीस नहीं शामिल हैं। कुछ अभिभावक अपने दो से तीन माह का बजट खराब कर रहे हैं तो कुछ कर्ज में जा रहे हैं। -रेनू देवी, लवकुशनगर
कोरोना कल में प्राइवेट स्कूलों ने न तो फीस माफ की और न ही कॉपी-किताबों पर छूट दी। कोरोना खत्म होने के बाद दाम और बढ़ गए हैं। पहले जो कापी किताबों का सेट 3000 में था वह अब 5000 हजार हो चुका है।- शक्ति सिंह, गद्दोपुर।
कॉपी-किताब पहले से काफी महंगी हो गई हैं। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आम आदमी के बस की बात नहीं रही। मेरे बच्चे के एक क्लास आगे जाने पर कापी-किताबों की कीमत दो हजार रुपये तक बढ़ गई।- शिप्रा श्रीवास्तव, रायगंज
आम आदमी जैसे-तैसे बच्चों की कॉपी किताब खरीद रहे हैं। स्कूलों की फीस हो, पढ़ाई का कोर्स हर साल बढ़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों की कॉपी किताब से अतिरिक्त भार भर रहा है। हर साल किताबें बदल जा रही है।-आशीष सिंह, सरयू बिहार कॉलोनी
पढ़ाई पर महंगाई छा गई है। पिछले साल कॉपी-किताब का सेट 5000 में था। मेरा दूसरा बच्चा उसी क्लास में पहुंचा तो वह काफी किताबें नहीं चल रही। बैग से लेकर जूता मोजा, पानी की बोतल, लंच बॉक्स सभी के दाम बढ़ गए हैं। लक्ष्मी श्रीवास्तव, मानस नगर
आज बच्चों की पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है। फीस से लेकर, स्कूल वाहन का किराया उसके बाद कॉपी-किताब खरीदने में आम आदमी की कमर टूट जा रही है। किताबों की कीमतें एक ही साल में दोगुनी हो गई हैं।-मुुकेश वाधवानी, झारखंडी