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Ayodhya News: योग-शौर्य के 30 मुद्रा स्तंभों से सज रहा दशरथ पथ
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अयोध्या। दशरथ पथ परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। 418.98 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 15.39 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का करीब 92 फीसदी काम पूरा हो चुका है। लक्ष्य दीपोत्सव से पहले मार्ग को यातायात के लिए तैयार करने का है। दशरथ पथ पर लाइटिंग का काम तेज हो गया है। वहीं योग-शौर्य के 30 मुद्रा स्तंभों से दशरथ पथ को सुसज्जित किया जा रहा है।
साकेत पेट्रोल पंप से बिल्वहरी घाट स्थित महाराज दशरथ के समाधि स्थल तक जाने वाला यह मार्ग अयोध्या के भीतर वैकल्पिक यातायात गलियारा तैयार करने के साथ धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा।
मार्ग के सुंदरीकरण में रामनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी जा रही है। अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 15 किलोमीटर के मार्ग पर 82.68 लाख रुपये की लागत से 30 मुद्रा स्तंभ स्थापित किए जा रहे हैं।
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इनमें शंख, चक्र, गदा, फरसा...आदि प्रतीक डिवाइडर पर सजाए जा रहे हैं। करीब 500 मीटर के अंतराल पर लगाए जाने वाले इन स्तंभों में 15 योग मुद्राओं और 15 शस्त्र मुद्राओं को प्रदर्शित किया जाएगा। करीब छह फीट ऊंचे इन स्तंभों के जरिये एक ओर भारतीय योग परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर शस्त्र मुद्राओं के माध्यम से शौर्य और वीरता का संदेश दिया जाएगा। रात में प्रकाश व्यवस्था के बीच ये स्तंभ मार्ग के सौंदर्य को भी बढ़ाएंगे।
14 मीटर चौड़े दशरथ पथ पर करीब एक मीटर चौड़ा पाथवे बनाया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के अंदरूनी हिस्सों से आने-जाने वाले वाहनों का दबाव कम होने और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने की उम्मीद है। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में बढ़ने वाले यातायात दबाव को देखते हुए इस मार्ग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता शशांक पांडेय ने बताया कि परियोजना का करीब 92 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष काम को तेजी से पूरा कराया जा रहा है, ताकि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार दीपोत्सव से पहले मार्ग तैयार किया जा सके।
इनसेट
महाराज दशरथ की समाधि तक तक पहुंच होगी आसान
- दशरथ पथ के पूरा होने से बिल्वहरी घाट और महाराज दशरथ की समाधि तक पहुंच आसान होने के साथ आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालु और पर्यटक दबाव के बीच यह मार्ग शहर के यातायात तंत्र के लिए एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में काम करेगा। साथ ही सड़क के दोनों ओर विकसित हो रही आधुनिक सुविधाएं और सांस्कृतिक प्रतीक रामनगरी के पारंपरिक स्वरूप को नए शहरी ढांचे से जोड़ेंगे।
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साकेत पेट्रोल पंप से बिल्वहरी घाट स्थित महाराज दशरथ के समाधि स्थल तक जाने वाला यह मार्ग अयोध्या के भीतर वैकल्पिक यातायात गलियारा तैयार करने के साथ धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा।
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मार्ग के सुंदरीकरण में रामनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी जा रही है। अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 15 किलोमीटर के मार्ग पर 82.68 लाख रुपये की लागत से 30 मुद्रा स्तंभ स्थापित किए जा रहे हैं।
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इनमें शंख, चक्र, गदा, फरसा...आदि प्रतीक डिवाइडर पर सजाए जा रहे हैं। करीब 500 मीटर के अंतराल पर लगाए जाने वाले इन स्तंभों में 15 योग मुद्राओं और 15 शस्त्र मुद्राओं को प्रदर्शित किया जाएगा। करीब छह फीट ऊंचे इन स्तंभों के जरिये एक ओर भारतीय योग परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर शस्त्र मुद्राओं के माध्यम से शौर्य और वीरता का संदेश दिया जाएगा। रात में प्रकाश व्यवस्था के बीच ये स्तंभ मार्ग के सौंदर्य को भी बढ़ाएंगे।
14 मीटर चौड़े दशरथ पथ पर करीब एक मीटर चौड़ा पाथवे बनाया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के अंदरूनी हिस्सों से आने-जाने वाले वाहनों का दबाव कम होने और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने की उम्मीद है। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में बढ़ने वाले यातायात दबाव को देखते हुए इस मार्ग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता शशांक पांडेय ने बताया कि परियोजना का करीब 92 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष काम को तेजी से पूरा कराया जा रहा है, ताकि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार दीपोत्सव से पहले मार्ग तैयार किया जा सके।
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महाराज दशरथ की समाधि तक तक पहुंच होगी आसान
- दशरथ पथ के पूरा होने से बिल्वहरी घाट और महाराज दशरथ की समाधि तक पहुंच आसान होने के साथ आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालु और पर्यटक दबाव के बीच यह मार्ग शहर के यातायात तंत्र के लिए एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में काम करेगा। साथ ही सड़क के दोनों ओर विकसित हो रही आधुनिक सुविधाएं और सांस्कृतिक प्रतीक रामनगरी के पारंपरिक स्वरूप को नए शहरी ढांचे से जोड़ेंगे।