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पौधों कोे पानी तक नहीं, चर रहे मवेशी
फैजाबाद
Updated Wed, 13 Jul 2016 12:06 AM IST
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मवई विकास खंड के कल्यानी नदी के किनारे बसे सुल्तानपुर गांव में पानी न मिलने के कारण ज्यादातर पौधे सूख गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी अभियान में एक दिन में अधिकतम पौधरोपण करने का रिकार्ड तो बना लिया गया लेकिन पौधरोपण के दूसरे दिन कई स्थलों पर पौधों कोे बचाने के कोई इंतजाम नहीं दिखे। हाल यह है कि 24 घंटे बीत गए, एक बूंद पानी तक का इंतजाम नहीं हो पाया है।
सबसे बड़ी समस्या लगे पौधों की सुरक्षा की है। न बाड़ लगाई गई है और न ही पौधों की सुरक्षा के लिए प्रहरी ही तैनात किए गए। सूरत-ए-हाल यह है कि भैस, गाय और भेड़ चरती हुई नजर आ रही है।
पटरंगा प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड मवई के सुल्तानपुर व कछिया गांव में पौधों की सुरक्षा के लिये कोई इंतजाम नहीं किया गया। वन विभाग पानी के लिए बरसात का इंतजार कर रहा है। पौधरोपण स्थल पर गाय, भैस और बकरी बेरोकटोक चर रही है।
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फारेस्टर ततहीर अहमद ने दावा किया कि पांच साइडे है जहां पर गार्ड को रखा गया है। बाद में कटीले तारों से घेराव किया जायेगा जब पौधों को पानी की व्यस्था के विषय मे पूंछा गया तो बताया कि इसके लिये प्राकृतिक इंजन है। बारिश होगी तो ये हरे-भरे हो जाएंगे, चिंता न कीजिए।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड के 11 स्थलों पर पौधरोपण हुए। भीखी सराय में वृक्षारोपण में घोर लापरवाही की गई है। भीखी सराय गांव के पूरब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में 3125 पौधों का रोपण किया गया जिसमें 25 फीसदी सूखे पौधे रोपे गये थे।
पेड़ों की लंबाई 10 से लेकर 15 फुट तक है जबकि गड्ढे एक से डेढ़ फुट तक ही खोदे गये हैं। इससे पेड़ों के नष्ट व नीचे गिरने की आशंका है। मंगलवार तक रोपे गये पौधों की सिंचाई नहीं की गई थी और न ही सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड व बैरकेडिंग के ही व्यवस्था की गई।
मंगलवार को कई पेड़ उखडे़ मिले। पौधरोपण स्थल पर भैंस व भेड़ें चरती मिलीं। गांव के बीडीसी सदस्य पप्पू पांडेय, राम बहोर शर्मा, संजय तिवारी सहित ग्रामीणों ने बताया कि झील होने के चलते तेज बरसात होने पर पानी भर जाता है जिससे पेड़ों के नष्ट होने की आशंका बनी रहती है।
इसके पूर्व भी ग्राम प्रधान द्वारा यहां सैंकड़ों पेड़ रोपे गये थे। यही हाल अन्य स्थलों शेरपुर, जेरूआ, गंजड़ी, भावापुर, माझा सोनौरा, न्यूना पूरब, न्यूना पश्चिम, सरसवा, बरौली, चौहानी पुरवा मऊ, मऊ बिछिया के पौधों की है।
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सबसे बड़ी समस्या लगे पौधों की सुरक्षा की है। न बाड़ लगाई गई है और न ही पौधों की सुरक्षा के लिए प्रहरी ही तैनात किए गए। सूरत-ए-हाल यह है कि भैस, गाय और भेड़ चरती हुई नजर आ रही है।
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पटरंगा प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड मवई के सुल्तानपुर व कछिया गांव में पौधों की सुरक्षा के लिये कोई इंतजाम नहीं किया गया। वन विभाग पानी के लिए बरसात का इंतजार कर रहा है। पौधरोपण स्थल पर गाय, भैस और बकरी बेरोकटोक चर रही है।
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फारेस्टर ततहीर अहमद ने दावा किया कि पांच साइडे है जहां पर गार्ड को रखा गया है। बाद में कटीले तारों से घेराव किया जायेगा जब पौधों को पानी की व्यस्था के विषय मे पूंछा गया तो बताया कि इसके लिये प्राकृतिक इंजन है। बारिश होगी तो ये हरे-भरे हो जाएंगे, चिंता न कीजिए।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड के 11 स्थलों पर पौधरोपण हुए। भीखी सराय में वृक्षारोपण में घोर लापरवाही की गई है। भीखी सराय गांव के पूरब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में 3125 पौधों का रोपण किया गया जिसमें 25 फीसदी सूखे पौधे रोपे गये थे।
पेड़ों की लंबाई 10 से लेकर 15 फुट तक है जबकि गड्ढे एक से डेढ़ फुट तक ही खोदे गये हैं। इससे पेड़ों के नष्ट व नीचे गिरने की आशंका है। मंगलवार तक रोपे गये पौधों की सिंचाई नहीं की गई थी और न ही सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड व बैरकेडिंग के ही व्यवस्था की गई।
मंगलवार को कई पेड़ उखडे़ मिले। पौधरोपण स्थल पर भैंस व भेड़ें चरती मिलीं। गांव के बीडीसी सदस्य पप्पू पांडेय, राम बहोर शर्मा, संजय तिवारी सहित ग्रामीणों ने बताया कि झील होने के चलते तेज बरसात होने पर पानी भर जाता है जिससे पेड़ों के नष्ट होने की आशंका बनी रहती है।
इसके पूर्व भी ग्राम प्रधान द्वारा यहां सैंकड़ों पेड़ रोपे गये थे। यही हाल अन्य स्थलों शेरपुर, जेरूआ, गंजड़ी, भावापुर, माझा सोनौरा, न्यूना पूरब, न्यूना पश्चिम, सरसवा, बरौली, चौहानी पुरवा मऊ, मऊ बिछिया के पौधों की है।