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Ayodhya News: बारिश में ढहा छप्पर, मासूम समेत दो की मौत

Tue, 25 Aug 2026 12:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Tue, 25 Aug 2026 12:04 AM IST
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Thatched roof collapses in rain; two dead, including a child.
बीकापुर। सोमवार दोपहर तेज हवा के साथ बारिश दो परिवारों पर आफत लेकर पहुंची। भीगने से बचने के लिए आठ साल का बालक और 20 वर्षीय युवती जिस छप्पर में छिपे थे वह ढह गया। हादसे में दोनों गंभीर घायल हो गए। आनन-फानन में सीएचसी पहुंचाया गया जहां डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
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हादसा कोतवाली क्षेत्र के भुलईपुर निधियावां में हुआ। छप्पर के मलबे में आठ साल के कंस और वंदना (20) के दबे होने की जानकारी होते ही ग्रामीण जुट गए। मलबे को हटाकर दोनों को तत्काल सीएचसी हैरिंग्टनगंज ले गए। जांच के बाद चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। दो मौतों से क्षेत्र में मातम और परिवार में कोहराम मचा हुआ है। हादसे की सूचना पर उप जिलाधिकारी संतोष कुमार, क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार सिंह, नायब तहसीलदार रामखेलावन, कोतवाल देवेंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू की। उप जिलाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि दोनों मृतक परिजनों को दैवी आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी।
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आर्थिक संकट के जूझ रहा था परिवार
मृतक वंदना के पिता राम नरेश की मौत करीब 10 वर्ष पहले हो चुकी है। मां कमलेश पाल अपने तीन बच्चों के साथ छप्परनुमा घर में रहती हैं। कमलेश भुलईपुर निधियावां प्राथमिक विद्यालय में रसोइया हैं। सोमवार को बारिश के दौरान उनकी बेटी वंदना छप्पर के नीचे बैठी थी तभी गांव के रामबख्श का आठ वर्षीय बेटा कंस भी भीगने से बचने के लिए वहां आ गया। दोनों घटना का शिकार हो गए। गांव के लोगों का कहना है कि आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते वंदना पढ़ाई नहीं कर रही थी। बड़ी बहन का विवाह दो वर्ष पहले हो चुका है। एक बहन और भाई अभी नाबालिग हैं जो कि परिषदीय विद्यालय में पढ़ाई करते हैं।
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आश्वासन के बाद भी अब तक नहीं मिला सरकारी आवास
मृतक कंस का परिवार भी बहुत गरीब है। परिवार के लोग मेहनत-मजदूरी करते हैं। कंस पांच भाई और तीन बहनों में चौथे नंबर पर था। कंस की मां रिंकी ने बताया कि उनका अपना छप्परनुमा मकान भी गिर चुका है। आवास न होने के कारण परिवार झोपड़ी में रहने को मजबूर है।बताया कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से कई बार आवास की मांग करने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी आवास नहीं मिल सका है।
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