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सफाई मामले में अयोध्या-फैजाबाद फेल
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2016 11:47 PM IST
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देश के साफ-सुथरे शहरों की रैंकिंग सर्वे के बीच धर्मनगरी अयोध्या-फैजाबाद की चर्चा हो तो जुड़वा शहर अन्य शहरों से सबसे गंदे साबित होंगे। कहने को केंद्र व प्रदेश की सरकारों से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की है लेकिन धर्मनगरी में कदम रखते ही कूड़े-कचरे व गंदगी से पर्यटकों व श्रद्धालुओं का स्वागत होता है।
यही हाल नवाबों के शहर फैजाबाद का भी है। करीब तीन दशक से अयोध्या प्रदेश व केंद्र की राजनीति के केंद्र में है। सप्तपुरियों में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखने वाली धर्मनगरी को विकास के साथ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर उभारने की कवायद शासन व प्रशासन स्तर पर की जाती रही है।
मठ-मंदिरों की नगरी अयोध्या में प्रतिवर्ष तीन प्रांतीयकृत मेलों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। रोज देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालुओं का आवागमन नगरी में बना रहता है फिर भी नगर में प्रवेश करते ही कूड़े-कचरे व गंदगी से लोग दो-चार होते हैं।
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सरयू तट पर घाटों से राम की पैड़ी, नयाघाट, प्रमुख मठ-मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले मार्गों पर कूड़े के ढेर,बजबजाती नालियां व सड़कों पर बहता गंदा पानी नगरी की साफ-सफाई की बदनुमा तस्वीर पेश करती है।
नवाबों का शहर फैजाबाद भी गंदगी से पटा है। शहर में कचहरी व रोडवेज से प्रवेश करते ही चौतरफा गंदगी के बीच से लोग गुजरते हैं। शहर का हार्ट कहे जाने वाले चौक क्षेत्र का बाजार घना होने के साथ गंदगी व कूड़े कचरे से भरा है।
यहां से फतेहगंज, नाका मकबरा जाने वाले मार्ग हों या फिर रिकाबगंज व रीडगंज होते हुए अयोध्या जाने वाला मार्ग की दोनों पटरियों पर कूड़ा-कचरा जगह-जगह लगा रहना आम बात है। नालियों से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।
हर जिले भर के यात्रियों के आवागमन का केंद्र रोडवेज गंदगी से पटा रहता है। यात्री बदबू से परिसर में कदम नहीं रखते। ऐसा ही हाल सिविल लाइंस इलाके, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन आदि स्थलों का भी है।
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यही हाल नवाबों के शहर फैजाबाद का भी है। करीब तीन दशक से अयोध्या प्रदेश व केंद्र की राजनीति के केंद्र में है। सप्तपुरियों में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखने वाली धर्मनगरी को विकास के साथ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर उभारने की कवायद शासन व प्रशासन स्तर पर की जाती रही है।
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मठ-मंदिरों की नगरी अयोध्या में प्रतिवर्ष तीन प्रांतीयकृत मेलों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। रोज देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालुओं का आवागमन नगरी में बना रहता है फिर भी नगर में प्रवेश करते ही कूड़े-कचरे व गंदगी से लोग दो-चार होते हैं।
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सरयू तट पर घाटों से राम की पैड़ी, नयाघाट, प्रमुख मठ-मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले मार्गों पर कूड़े के ढेर,बजबजाती नालियां व सड़कों पर बहता गंदा पानी नगरी की साफ-सफाई की बदनुमा तस्वीर पेश करती है।
नवाबों का शहर फैजाबाद भी गंदगी से पटा है। शहर में कचहरी व रोडवेज से प्रवेश करते ही चौतरफा गंदगी के बीच से लोग गुजरते हैं। शहर का हार्ट कहे जाने वाले चौक क्षेत्र का बाजार घना होने के साथ गंदगी व कूड़े कचरे से भरा है।
यहां से फतेहगंज, नाका मकबरा जाने वाले मार्ग हों या फिर रिकाबगंज व रीडगंज होते हुए अयोध्या जाने वाला मार्ग की दोनों पटरियों पर कूड़ा-कचरा जगह-जगह लगा रहना आम बात है। नालियों से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।
हर जिले भर के यात्रियों के आवागमन का केंद्र रोडवेज गंदगी से पटा रहता है। यात्री बदबू से परिसर में कदम नहीं रखते। ऐसा ही हाल सिविल लाइंस इलाके, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन आदि स्थलों का भी है।