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भाई-भतीजे और रिश्तेदारों को अवध विवि में दे दी नौकरी
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अयोध्या। अवध विवि में पिछले दो वर्षों में हुई करीब 200 नियुक्तियां जांच के दायरे में आ गईं हैं। आरोप है कि विवि के प्रोफेसर, कर्मचारियों व कार्य परिषद के सदस्यों के भाई-भतीजे व रिश्तेदारों को नौकरी दे दी गईं हैं। विवि कर्मचारी संगठन की शिकायत पर मुख्यमंत्री व राजभवन की ओर से जांच करके रिपोर्ट मांगी गई है। आरोप है कि शिकायत के बाद भी एक पखवारे पूर्व एक कार्य परिषद सदस्य के रिश्तेदार को नौकरी दे दी गई है।
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि ने पिछले वर्ष से विभिन्न नए कोर्सों व पुराने रिक्त पदों पर प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, गेस्ट लेक्चरर, लाइब्रेरियन समेत विभिन्न संविदा व आउटसोर्स के जरिए अब तक लगभग 200 पदों के आसपास नियुक्ति हो चुकी है।
इसमें सर्वाधिक नौकरी आईईटी संस्थान में दी गई है। पूरे मामले का खुलासा पिछले वर्ष दिसंबर माह में हुए कर्मचारियों के आंदोलन में हुआ। कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री व राजभवन को भेजे गए 23 सूत्री शिकायती पत्र में विवि के उच्च पदों पर आसीन दो बड़े नामों के साले व भतीजे को नौकरी देने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया गया है।
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यह मामला सिर्फ यही नहीं खत्म हुआ, बल्कि कार्य परिषद सदस्य पर भी अपने परिवार के लोगों व परिचितों को नौकरी दिलाने का आरोप है। इसके अलावा विवि में कार्यरत कुछ कर्मचारियों के परिवार के लोगों को भी नौकरी दिए जाने की बात सामने आई है।
विवि प्रशासन ने भले ही एक पखवारे चले धरने व कुलपति पर लगे आरोपों पर जांच समिति बैठा दी, लेकिन इस कृत्य पर कार्य परिषद का अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है। हालांकि कर्मचारियों की 23 सूत्री शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय व राजभवन से जवाब तलब हो चुका है। बकायदा राजभवन ने कर्मचारी संगठन के शिकायती पत्र पर विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। विवि प्रशासन के पास इस बात कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि राजभवन के पत्र पर जवाब अभी तक गया कि नहीं।
आईईटी में गेस्ट लेक्चरर का लंबा खेल
पिछले दो वर्ष सर्वाधिक नियुक्ति आईईटी में गेस्ट लेक्चरर के रूप में हुई है। विवि प्रशासन दावा करता है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नियुक्ति की गई है। जबकि लगाए गए आरोप में कहा गया है कि इसमें शिक्षक-छात्र अनुपात में गड़बड़ी है।
बहुत से ऐसे गेस्ट लेक्चरर हैं, जिनको अभी तक विद्यार्थियों ने भी नहीं देखा है। कुछ ऐसे भी हैं कि एक दो क्लास पढ़ाकर अधिकतम सैलरी 28 हजार रुपये प्रतिमाह ले रहे हैं। इन गेस्ट लेक्चरर में एक एमएलसी के परिवार, एक राममंदिर में ट्रस्टी बने व्यक्ति का पुत्री, विवि के पास एक निजी कॉलेज के प्रबंधक का पुत्र, मनूचा डिग्री कॉलेज के एक एसोसिएट प्रोफेसर के परिवार का व्यक्ति, विवि के कोर्ट सदस्य के परिवार का एक व्यक्ति सहित अन्य कई बड़े नामीगिरामी लोग शामिल हैं।
शासन से आए जांच आदेश पर जवाब जाएगा
अवध विवि प्रशासन पर नियुक्त समेत तमाम आरोपों को लेकर राजभवन से आए आदेश पर जवाब गया या नहीं जानकारी नहीं है। मामले में तथ्यपरक जवाब जाएगा। वैसे परिवार के लोगों को उपकृत करने का नियम नहीं है। मामले में जवाब अगर नहीं गया होगा तो एक दो दिन में भेज दिया जाएगा।
विनय कुमार सिंह, डिप्टी रजिस्टार
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डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि ने पिछले वर्ष से विभिन्न नए कोर्सों व पुराने रिक्त पदों पर प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, गेस्ट लेक्चरर, लाइब्रेरियन समेत विभिन्न संविदा व आउटसोर्स के जरिए अब तक लगभग 200 पदों के आसपास नियुक्ति हो चुकी है।
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इसमें सर्वाधिक नौकरी आईईटी संस्थान में दी गई है। पूरे मामले का खुलासा पिछले वर्ष दिसंबर माह में हुए कर्मचारियों के आंदोलन में हुआ। कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री व राजभवन को भेजे गए 23 सूत्री शिकायती पत्र में विवि के उच्च पदों पर आसीन दो बड़े नामों के साले व भतीजे को नौकरी देने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया गया है।
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यह मामला सिर्फ यही नहीं खत्म हुआ, बल्कि कार्य परिषद सदस्य पर भी अपने परिवार के लोगों व परिचितों को नौकरी दिलाने का आरोप है। इसके अलावा विवि में कार्यरत कुछ कर्मचारियों के परिवार के लोगों को भी नौकरी दिए जाने की बात सामने आई है।
विवि प्रशासन ने भले ही एक पखवारे चले धरने व कुलपति पर लगे आरोपों पर जांच समिति बैठा दी, लेकिन इस कृत्य पर कार्य परिषद का अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है। हालांकि कर्मचारियों की 23 सूत्री शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय व राजभवन से जवाब तलब हो चुका है। बकायदा राजभवन ने कर्मचारी संगठन के शिकायती पत्र पर विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। विवि प्रशासन के पास इस बात कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि राजभवन के पत्र पर जवाब अभी तक गया कि नहीं।
आईईटी में गेस्ट लेक्चरर का लंबा खेल
पिछले दो वर्ष सर्वाधिक नियुक्ति आईईटी में गेस्ट लेक्चरर के रूप में हुई है। विवि प्रशासन दावा करता है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नियुक्ति की गई है। जबकि लगाए गए आरोप में कहा गया है कि इसमें शिक्षक-छात्र अनुपात में गड़बड़ी है।
बहुत से ऐसे गेस्ट लेक्चरर हैं, जिनको अभी तक विद्यार्थियों ने भी नहीं देखा है। कुछ ऐसे भी हैं कि एक दो क्लास पढ़ाकर अधिकतम सैलरी 28 हजार रुपये प्रतिमाह ले रहे हैं। इन गेस्ट लेक्चरर में एक एमएलसी के परिवार, एक राममंदिर में ट्रस्टी बने व्यक्ति का पुत्री, विवि के पास एक निजी कॉलेज के प्रबंधक का पुत्र, मनूचा डिग्री कॉलेज के एक एसोसिएट प्रोफेसर के परिवार का व्यक्ति, विवि के कोर्ट सदस्य के परिवार का एक व्यक्ति सहित अन्य कई बड़े नामीगिरामी लोग शामिल हैं।
शासन से आए जांच आदेश पर जवाब जाएगा
अवध विवि प्रशासन पर नियुक्त समेत तमाम आरोपों को लेकर राजभवन से आए आदेश पर जवाब गया या नहीं जानकारी नहीं है। मामले में तथ्यपरक जवाब जाएगा। वैसे परिवार के लोगों को उपकृत करने का नियम नहीं है। मामले में जवाब अगर नहीं गया होगा तो एक दो दिन में भेज दिया जाएगा।
विनय कुमार सिंह, डिप्टी रजिस्टार