गुरुकुल विद्या को एक बार फिर से जीवित करने का प्रयास, गर्भ में ही शिशुओं को मिलेगा संस्कार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय जल्द ही गर्भ संस्कार पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से अयोध्या में सदियों पुरानी गुरुकुल विद्या को एक बार फिर से जीवित करने का प्रयास किया जाएगा, जिसके बारे में हमें सुनकर या पढ़कर आसानी से यकीन नहीं होता है। दावा है कि अगर यह प्रयोग सफल हो गया तो हम बच्चे को गर्भ में ही संस्कार के साथ शिक्षा भी दे सकेंगे। इस प्रकार के पाठ्यक्रम व कार्यक्रम चलाए जाने की सलाह बीते दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दी थी।
अवध विश्वविद्यालय के योगा विभाग की गायत्री देवी ने बताया कि राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अब गुरुकुल की भूमिका में आने की तैयारी कर रहा है। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नारी सशक्तिकरण पर अपना उद्बोधन देते हुए गर्भ संस्कार ज्ञान-विज्ञान पर सर्टिफिकेट कोर्स चलाने की प्रेरणा दी थी, जिसको मूर्त रूप देने के लिए कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने योग उपचार विभाग को इसका पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी।
भारत के नव निर्माण हेतु महर्षि रमण, दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, अब्दुल कलाम, गार्गी मैत्रेई रानी लक्ष्मीबाई की भांति नवीन पीढ़ी का सृजन अति आवश्यक है, चिकित्सा विज्ञान का भी यह मानना है कि व्यक्तित्व विकास की नींव का 80 प्रतिशत भाग मां के गर्भ में ही पूर्ण हो जाता है तथा जन्म के पश्चात शिशु केवल 20 प्रतिशत ही वातावरण व समाज से सीख पाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर गर्भ संस्कार के इस पाठ्यक्रम को तैयार किया जा रहा है।
गर्भ संस्कार पाठ्यक्रम में तीन प्रश्नपत्र
पाठ्यक्रम में तीन सैद्धांतिक प्रश्न पत्र और एक प्रयोगात्मक प्रश्नपत्र होंगे। प्रथम प्रश्न पत्र में वैदिक योगिक ग्रंथों में वर्णित मानवीय मूल्यों, सद्गुणों, भारत के प्राचीन एवं आधुनिक विभूतियों योगियों, संत शहीद सुधारकों वैज्ञानिकों आदि तथा महान नारियों के प्रेरणा प्रद प्रसंगों को शामिल किया जा रहा है। द्वितीय प्रश्न पत्र में आवश्यक विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों जैसे योग आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा आदि का परिचय एवं इनमें वर्णित सगर्भा स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण उपचार के सुझाव दिए जाएंगे।
तृतीय प्रश्नपत्र में प्रथम माह से लेकर अंतिम माह तक भ्रूण के विकास क्रम का दिग्दर्शन, भारतीय वैदिक संस्कार परंपरा गर्भ संस्कार का वैज्ञानिक प्रतिपादन, गर्भिणी के लिए आवश्यक दिनचर्या, आहारचर्या एवं स्वास्थ्य पर अभ्यास हो की जानकारी, स्वाध्याय सत्संग, पारिवारिक सौहार्द्र, गर्भ संवाद, गर्भ संगीत एवं ध्यान आदि महत्वपूर्ण जानकारियों को शामिल किया गया है। चौथे प्रयोगात्मक प्रश्न पत्र में गर्भावस्था में आवश्यक योगासन प्राणायाम मुद्रा बंध ध्यान आदि योगाभ्यासओं तथा तनाव प्रबंधन हेतु सामूहिक खेल शामिल किए गए हैं।
विवि का प्रयास सफल हुआ तो भारत फिर से बनेगा धर्मगुरु
इस संबंध में राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि इसके लिए गर्भ संस्कार का ज्ञान माता और पिता दोनों को होना चाहिए। गर्भ धारण करने के समय का दिन, समय से लेकर वातावरण, नक्षत्र और महिला पुरुष की मनोदशा अनुकूल होनी चाहिए। गर्भधारण करने के बाद जिस तरह के बच्चे की कामना हो, उसी के अनुसार मां को आचरण करना चाहिए और उसी माहौल और वातावरण में रहना चाहिए। अगर यूनिवर्सिटी के इस प्रयोग और प्रक्रिया से आचार व्यवहार, संस्कार और इच्छित गुणों वाली मनचाही संतान की मुराद पूरी हुई तो भारत एक बार फिर से धर्मगुरु का तमगा हासिल कर लेगा।