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सरयू किनारे बसेगी इक्ष्वाकुपुरी
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अयोध्या। 251 मीटर की विश्व की सबसे ऊंची श्रीराम की मूर्ति के प्रस्तावित परिसर के पास इक्ष्वाकुपुरी उपनगर बसेगा। सरयू किनारे आध्यात्मिक व सांस्कृतिक भावभूमि से ओतप्रोत यहां हर आधुनिक सुख-सुविधा होगी।
नोएडा के डीएनडी की तर्ज पर सड़कें-पुल और फ्लाईओवर बनेंगे, तो नदी के बस्ती तट पर ड्राई एरिया के बाहर सेवन व फाइव स्टार होटल, रेस्त्रां-पब-मॉल समेत पर्यटकों को आकर्षित करने के कई प्रोजेक्ट अगले चरण में सामने आएंगे।
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लौटते ही रामनगरी को विकसित करने की पहली योजना सामने आई है। पहले इक्ष्वाकुपुरी नगरी के नाम पर दो हजार एकड़ में खाका खींचने की बात सामने आई थी, लेकिन जहां दावा किया जा रहा था, वहां पर भूमि उपलब्ध नहीं थी। नगर निगम के मोहल्ले, कैंटोमेंट एरिया व सीताझील की भूमि के अधिग्रहण की कोई गुंजाइश नहीं थी।
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श्रीराम की मूर्ति बनाने का प्रस्ताव भी रद्द होकर हाईवे के पार माझा बरहटा चला गया। अब शासन के निर्देश पर आवास आयुक्त अजय चौहान ने अपर आवास आयुक्त, विशाल भारद्वाज के जरिए पत्र भेजकर सात सौ एकड़ भूमि का प्रस्ताव मांगा है।
कहा गया है कि सरयू तट पर स्थापित की जाने वाली प्रभु राम की भव्य मूर्ति के प्रस्तावित परिसर के निकट ग्राम मांझा बरहटा, मांझा तिहुरा व मांझा शहनवाज की भूमि पर योजना प्रस्तावित की गई है। अयोध्या विकास प्राधिकरण भूमि उपलब्ध कराएगा और लखनऊ आवास विकास परिषद योजना को विकसित करेगी।
भूमि का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए आयुक्त ने अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज शुक्ला की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम योजना के लिए भूमि की स्थिति, प्रकृति, सीवर, जलापूर्ति, बिजली आदि की व्यवस्था को सजरा प्लान पर दर्शाते हुए मांग व विक्रयशीलता पर आख्या के साथ बोर्ड को संस्तुति देगी।
इस नई अयोध्या में त्रेतायुगीन पौराणिकता की झलक के साथ हर अत्याधुनिक सुख-सुविधा का मिश्रण भी होगा। सूत्रों के अनुसार 700 एकड़ में नई अयोध्या विकसित करने की लागत सात हजार करोड़ के आसपास आंकी जा रही है। राममंदिर निर्माण के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटकों के आने के दृष्टिगत खाका खींचा जाना है।
इको व ग्रीन सिटी के रूप में होगा विकास
अयोध्या-लखनऊ मार्ग पर आधुनिक बस अड्डे के पास माझा बरहटा में बनने वाली श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति के लिए अधिग्रहण किए जा रहे कुल 259 भूखंडों के 85.977 हेक्टेयर भूमि के पास इक्ष्वाकुपुरी को इको व ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां रिवर फ्रंट भी विकसित होगा। भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का पूरा चित्रण होगा। इसके किनारे भी आध्यात्मिक व धार्मिक कृतियों का चित्रण, लैंडस्केप विकसित होगा। इसके किनारे इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की प्रतिमाएं लगाई जाएगी, जिसमें उनके पूरे इतिहास की जानकारी होगी।
...तो सेंटर में आएगी राम की प्रतिमा
इक्ष्वाकुपुरी के पहले फेज में प्रस्तावित 700 एकड़ से भगवान राम की 251 मीटर की भव्य प्रतिमा के सेंटर में आ जाएगी। यहां रहने व घूमने वाले लोगों को मूर्ति के पैडस्टल में एक्टिविटी सेंटर व पर्यटक सुविधाएं, भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग व अन्य पर्यटक सुविधाओं का भव्य नजारा दिखेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के गेस्ट हाउस से लेकर होटल व रेस्टोरेंट सहित दूसरे सुविधा स्थल शामिल होंगे।
वैदिक सेक्टर से लेकर महाकाव्य काल
इक्ष्वाकुपुरी में वैदिक काल से लेकर महाकाव्य काल तक के चित्रण और उसकी भावभूमि से दर्शकों को परिचित करवाने की तैयारी है। इसके लिए ऑडियो-विजुअल माध्यम का भी इस्तेमाल होगा। प्रवेश करते ही वैदिक सेक्टर होगा, जिसमें चारों वेदों के कालक्रम के अनुसार सेक्टर बनाए जाएंगे। इसमें तत्कालीन परंपराओं के अनुसार प्रमुख ऋचाओं का अंकन, उनके भावार्थ आदि का भी डिस्पले होगा। इसके बाद 10 प्रमुख उपनिषदों, प्रमुख पुराणों का उनके कालक्रम के अनुसार सेक्टर होगा। रामायण व महाभारत दोनों ही महाकाव्यों की अहम घटनाओं और पक्षों को दर्शाती गैलरियां होंगी।
राम की बाललीला से लेकर जानकी विवाह तक
प्रस्तावित कार्ययोजना में भगवान राम के जीवन चरित्र के प्रारंभिक प्रसंगों को अलग और रोचक ढंग से प्रदर्शित करने की तैयारी है। इसमें बाललीला, महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में राम-लक्ष्मण के जाने, शिक्षा ग्रहण, ताड़का वध से लेकर जानकी विवाह तक की घटनाओं को एंफी थियेटर और गैलरी में एनिमेशन फिल्मों के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, परिसर में सप्त ऋषियों के आश्रम, वैदिक गुरुकुल परंपरा को प्रदर्शित करने वाले मॉडल होंगे। रामायण में संदर्भित वनों और सरोवरों के नाम पर इस क्षेत्र में अरण्य व सरोवर भी विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। परिसर में वैदिक रिसर्च सेंटर भी होगा, जिसमें योग, ध्यान के केंद्र होंगे। वहीं, सरयू किनारे पर्यटन की दृष्टि से वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा भी होगी।
यह है पांच सदस्यीय टीम
आवास आयुक्त के निर्देश पर योजना के लिए भूमि का सर्वे करने वाली 5 सदस्यीय समिति टीम में अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज शुक्ला को अध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद लखनऊ के अधीक्षण अभियंता, वास्तुविद, अधिशासी अभियंता निर्माण-21, व परियोजना प्रबंधक निर्माण इकाई आवास विकास परिषद अमेठी को सदस्य बनाया गया है। योजना के अनुसार तीनों ग्राम सभाओं की 700 एकड़ भूमि पर होटल, मॉल, शॉपिंग कांप्लेक्स, अत्याधुनिक पार्क सहित आधुनिक सुविधाओं वाली नई अयोध्या विकसित की जाएगी।
आवास आयुक्त के निर्देश पर मांझा तिहुरा, मांझा बरहटा व मांझा शाहनवाजपुर का स्थलीय निरीक्षण करना है। इस इलाके में 700 एकड़ पर नई अयोध्या बसाने की योजना है।
-डॉ. नीरज शुक्ला, उपाध्यक्ष, अयोध्या विकास प्राधिकरण
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श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लौटते ही रामनगरी को विकसित करने की पहली योजना सामने आई है। पहले इक्ष्वाकुपुरी नगरी के नाम पर दो हजार एकड़ में खाका खींचने की बात सामने आई थी, लेकिन जहां दावा किया जा रहा था, वहां पर भूमि उपलब्ध नहीं थी। नगर निगम के मोहल्ले, कैंटोमेंट एरिया व सीताझील की भूमि के अधिग्रहण की कोई गुंजाइश नहीं थी।
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श्रीराम की मूर्ति बनाने का प्रस्ताव भी रद्द होकर हाईवे के पार माझा बरहटा चला गया। अब शासन के निर्देश पर आवास आयुक्त अजय चौहान ने अपर आवास आयुक्त, विशाल भारद्वाज के जरिए पत्र भेजकर सात सौ एकड़ भूमि का प्रस्ताव मांगा है।
कहा गया है कि सरयू तट पर स्थापित की जाने वाली प्रभु राम की भव्य मूर्ति के प्रस्तावित परिसर के निकट ग्राम मांझा बरहटा, मांझा तिहुरा व मांझा शहनवाज की भूमि पर योजना प्रस्तावित की गई है। अयोध्या विकास प्राधिकरण भूमि उपलब्ध कराएगा और लखनऊ आवास विकास परिषद योजना को विकसित करेगी।
भूमि का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए आयुक्त ने अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज शुक्ला की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम योजना के लिए भूमि की स्थिति, प्रकृति, सीवर, जलापूर्ति, बिजली आदि की व्यवस्था को सजरा प्लान पर दर्शाते हुए मांग व विक्रयशीलता पर आख्या के साथ बोर्ड को संस्तुति देगी।
इस नई अयोध्या में त्रेतायुगीन पौराणिकता की झलक के साथ हर अत्याधुनिक सुख-सुविधा का मिश्रण भी होगा। सूत्रों के अनुसार 700 एकड़ में नई अयोध्या विकसित करने की लागत सात हजार करोड़ के आसपास आंकी जा रही है। राममंदिर निर्माण के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटकों के आने के दृष्टिगत खाका खींचा जाना है।
इको व ग्रीन सिटी के रूप में होगा विकास
अयोध्या-लखनऊ मार्ग पर आधुनिक बस अड्डे के पास माझा बरहटा में बनने वाली श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति के लिए अधिग्रहण किए जा रहे कुल 259 भूखंडों के 85.977 हेक्टेयर भूमि के पास इक्ष्वाकुपुरी को इको व ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां रिवर फ्रंट भी विकसित होगा। भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का पूरा चित्रण होगा। इसके किनारे भी आध्यात्मिक व धार्मिक कृतियों का चित्रण, लैंडस्केप विकसित होगा। इसके किनारे इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की प्रतिमाएं लगाई जाएगी, जिसमें उनके पूरे इतिहास की जानकारी होगी।
...तो सेंटर में आएगी राम की प्रतिमा
इक्ष्वाकुपुरी के पहले फेज में प्रस्तावित 700 एकड़ से भगवान राम की 251 मीटर की भव्य प्रतिमा के सेंटर में आ जाएगी। यहां रहने व घूमने वाले लोगों को मूर्ति के पैडस्टल में एक्टिविटी सेंटर व पर्यटक सुविधाएं, भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग व अन्य पर्यटक सुविधाओं का भव्य नजारा दिखेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के गेस्ट हाउस से लेकर होटल व रेस्टोरेंट सहित दूसरे सुविधा स्थल शामिल होंगे।
वैदिक सेक्टर से लेकर महाकाव्य काल
इक्ष्वाकुपुरी में वैदिक काल से लेकर महाकाव्य काल तक के चित्रण और उसकी भावभूमि से दर्शकों को परिचित करवाने की तैयारी है। इसके लिए ऑडियो-विजुअल माध्यम का भी इस्तेमाल होगा। प्रवेश करते ही वैदिक सेक्टर होगा, जिसमें चारों वेदों के कालक्रम के अनुसार सेक्टर बनाए जाएंगे। इसमें तत्कालीन परंपराओं के अनुसार प्रमुख ऋचाओं का अंकन, उनके भावार्थ आदि का भी डिस्पले होगा। इसके बाद 10 प्रमुख उपनिषदों, प्रमुख पुराणों का उनके कालक्रम के अनुसार सेक्टर होगा। रामायण व महाभारत दोनों ही महाकाव्यों की अहम घटनाओं और पक्षों को दर्शाती गैलरियां होंगी।
राम की बाललीला से लेकर जानकी विवाह तक
प्रस्तावित कार्ययोजना में भगवान राम के जीवन चरित्र के प्रारंभिक प्रसंगों को अलग और रोचक ढंग से प्रदर्शित करने की तैयारी है। इसमें बाललीला, महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में राम-लक्ष्मण के जाने, शिक्षा ग्रहण, ताड़का वध से लेकर जानकी विवाह तक की घटनाओं को एंफी थियेटर और गैलरी में एनिमेशन फिल्मों के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, परिसर में सप्त ऋषियों के आश्रम, वैदिक गुरुकुल परंपरा को प्रदर्शित करने वाले मॉडल होंगे। रामायण में संदर्भित वनों और सरोवरों के नाम पर इस क्षेत्र में अरण्य व सरोवर भी विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। परिसर में वैदिक रिसर्च सेंटर भी होगा, जिसमें योग, ध्यान के केंद्र होंगे। वहीं, सरयू किनारे पर्यटन की दृष्टि से वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा भी होगी।
यह है पांच सदस्यीय टीम
आवास आयुक्त के निर्देश पर योजना के लिए भूमि का सर्वे करने वाली 5 सदस्यीय समिति टीम में अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज शुक्ला को अध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद लखनऊ के अधीक्षण अभियंता, वास्तुविद, अधिशासी अभियंता निर्माण-21, व परियोजना प्रबंधक निर्माण इकाई आवास विकास परिषद अमेठी को सदस्य बनाया गया है। योजना के अनुसार तीनों ग्राम सभाओं की 700 एकड़ भूमि पर होटल, मॉल, शॉपिंग कांप्लेक्स, अत्याधुनिक पार्क सहित आधुनिक सुविधाओं वाली नई अयोध्या विकसित की जाएगी।
आवास आयुक्त के निर्देश पर मांझा तिहुरा, मांझा बरहटा व मांझा शाहनवाजपुर का स्थलीय निरीक्षण करना है। इस इलाके में 700 एकड़ पर नई अयोध्या बसाने की योजना है।
-डॉ. नीरज शुक्ला, उपाध्यक्ष, अयोध्या विकास प्राधिकरण