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डेंगू के कहर ने तोड़ा रिकार्ड, मरीजों की संख्या पहुंची 59
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अयोध्या। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए किए गए तमाम दावों की पोल खुलती जा रही है। इस बार तेजी से फैले डेंगू के प्रकोप ने कई वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया है। पांच वर्ष पूर्व तक इन मरीजों की संख्या बीस भी नहीं पार करती है, जो इस बार बढ़कर 59 पहुंच गई है।
अकेले जिला अस्पताल में इन मरीजों का इलाज हुआ है। इसके साथ ही अन्य जिलों के 10 मरीज भी यहां भर्ती कराए जा चुके हैं। वहीं, इनके इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई तमाम तैयारियां धराशाई होती जा रही हैं। जिला अस्पताल में बेड फुल होने से हो रही बदइंतजामी की वजह से मरीज निजी अस्पतालों की शरण में जाने को विवश हैं।
लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले में डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। तेजी से बढ़कर डेंगू रोगियों की संख्या 59 पहुंच गई है। जबकि किट से हुए टेस्ट में 202 मरीजों के डेंगू की संभावना जताई गई थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए चलाए गए संचारी रोग नियंत्रण पखवारा के तहत एंटी लार्वा छिड़काव, फॉगिंग सहित तमाम कार्य इस बार भी किए गए, लेकिन उनका असर कहीं दिख नहीं रहा है।
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बीते सितंबर माह में हुई झमाझम बारिश के बाद ठहरे हुए पानी में पैदा हुए मच्छरों ने लार्वा छोड़े तो मच्छरों का आतंक बढ़ गया। जिसकी वजह से डेंगू का प्रकोप तेजी से फैला और कई वर्ष का रिकार्ड टूट गया। यूं तो डेंगू पीड़ितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल सहित मुख्यालय के सभी अस्पताल व सीएचसी एवं पीएचसी में भी एलर्ट जारी किया है, लेकिन इलाज नहीं मिल पा रहा है।
तेजी से इन रोगियों में हो रहे इजाफा की वजह से इन दिनों जिला अस्पताल में अराजकता का माहौल है। रिजर्व वार्ड पिछले करीब बीस दिन से फुल चल रहा है। इसके अलावा आने वाले अन्य मरीजों को मेडिकल वार्ड, ईएनटी वार्ड, जनरल वार्ड आदि में सामान्य मरीजों के साथ शिफ्ट करना अस्पताल प्रशासन की विवशता बनी है। जहां मरीजों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं तमाम अनियमितताओं की वजह से लोग निजी अस्पतालों की शरण में जाने को विवश हैं, जहां उनका शोषण हो रहा है।
मलेरिया अधिकारी एमए खान ने बताया कि जिला अस्पताल की लैब में इस बार बुखार से पीड़ित करीब चार सौ मरीजों के रक्त की जांच कराई गई, जिसमें 202 मरीजों में एनएस-1 पॉजिटिव पाया गया था। इनमें डेंगू के कुछ लक्षण प्रतीत होने पर इनका डेंगू के मरीजों की भांति ही इलाज शुरू हुआ। बाद में कराए गए एलाइजा टेस्ट में 59 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
डेंगू के इन मरीजों के आंकड़े सिर्फ जिला अस्पताल में हुई जांच एवं इलाज से प्राप्त हुए हैं। जिले में धड़ल्ले से चल रहे पैथोलॉजी एवं नर्सिंग होम में भर्ती हुए मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। यदि इन मरीजों की संख्या भी जोड़ी जाय तो डेंगू मरीजों की संख्या और अधिक होगी। मलेरिया अधिकारी एमए खान ने बताया कि अभी तक निजी अस्पतालों से सूचना नहीं मिली है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ नानक सरन कहते हैं कि 50 हजार से अधिक प्लेटलेट हो तो डरने की जरूरत नहीं है। हां, यदि शरीर के किसी भाग से खून आ जाता है तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। बताया कि डेंगू से बचाव के लिए घरों व प्रतिष्ठानों पर साफ-सफाई रखें, पानी एकत्र न होने दें, फलों-सब्जियों से निकलने वाले छीलन को नष्ट कर दें, स्वच्छ पानी पिएं, पपीता व कीवी का फल खाएं। बताया कि ये मच्छर सुबह के समय व शाम को सूरज डूबने के समय काटते हैं। इस अवधि में लोग फुल आस्तीन का शर्ट व पैंट पहनें, शरीर के खुले भाग में मच्छर से बचाव वाली क्रीम या सरसों का तेल लगाएं।
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अकेले जिला अस्पताल में इन मरीजों का इलाज हुआ है। इसके साथ ही अन्य जिलों के 10 मरीज भी यहां भर्ती कराए जा चुके हैं। वहीं, इनके इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई तमाम तैयारियां धराशाई होती जा रही हैं। जिला अस्पताल में बेड फुल होने से हो रही बदइंतजामी की वजह से मरीज निजी अस्पतालों की शरण में जाने को विवश हैं।
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लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले में डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। तेजी से बढ़कर डेंगू रोगियों की संख्या 59 पहुंच गई है। जबकि किट से हुए टेस्ट में 202 मरीजों के डेंगू की संभावना जताई गई थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए चलाए गए संचारी रोग नियंत्रण पखवारा के तहत एंटी लार्वा छिड़काव, फॉगिंग सहित तमाम कार्य इस बार भी किए गए, लेकिन उनका असर कहीं दिख नहीं रहा है।
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बीते सितंबर माह में हुई झमाझम बारिश के बाद ठहरे हुए पानी में पैदा हुए मच्छरों ने लार्वा छोड़े तो मच्छरों का आतंक बढ़ गया। जिसकी वजह से डेंगू का प्रकोप तेजी से फैला और कई वर्ष का रिकार्ड टूट गया। यूं तो डेंगू पीड़ितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल सहित मुख्यालय के सभी अस्पताल व सीएचसी एवं पीएचसी में भी एलर्ट जारी किया है, लेकिन इलाज नहीं मिल पा रहा है।
तेजी से इन रोगियों में हो रहे इजाफा की वजह से इन दिनों जिला अस्पताल में अराजकता का माहौल है। रिजर्व वार्ड पिछले करीब बीस दिन से फुल चल रहा है। इसके अलावा आने वाले अन्य मरीजों को मेडिकल वार्ड, ईएनटी वार्ड, जनरल वार्ड आदि में सामान्य मरीजों के साथ शिफ्ट करना अस्पताल प्रशासन की विवशता बनी है। जहां मरीजों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं तमाम अनियमितताओं की वजह से लोग निजी अस्पतालों की शरण में जाने को विवश हैं, जहां उनका शोषण हो रहा है।
मलेरिया अधिकारी एमए खान ने बताया कि जिला अस्पताल की लैब में इस बार बुखार से पीड़ित करीब चार सौ मरीजों के रक्त की जांच कराई गई, जिसमें 202 मरीजों में एनएस-1 पॉजिटिव पाया गया था। इनमें डेंगू के कुछ लक्षण प्रतीत होने पर इनका डेंगू के मरीजों की भांति ही इलाज शुरू हुआ। बाद में कराए गए एलाइजा टेस्ट में 59 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
डेंगू के इन मरीजों के आंकड़े सिर्फ जिला अस्पताल में हुई जांच एवं इलाज से प्राप्त हुए हैं। जिले में धड़ल्ले से चल रहे पैथोलॉजी एवं नर्सिंग होम में भर्ती हुए मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। यदि इन मरीजों की संख्या भी जोड़ी जाय तो डेंगू मरीजों की संख्या और अधिक होगी। मलेरिया अधिकारी एमए खान ने बताया कि अभी तक निजी अस्पतालों से सूचना नहीं मिली है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ नानक सरन कहते हैं कि 50 हजार से अधिक प्लेटलेट हो तो डरने की जरूरत नहीं है। हां, यदि शरीर के किसी भाग से खून आ जाता है तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। बताया कि डेंगू से बचाव के लिए घरों व प्रतिष्ठानों पर साफ-सफाई रखें, पानी एकत्र न होने दें, फलों-सब्जियों से निकलने वाले छीलन को नष्ट कर दें, स्वच्छ पानी पिएं, पपीता व कीवी का फल खाएं। बताया कि ये मच्छर सुबह के समय व शाम को सूरज डूबने के समय काटते हैं। इस अवधि में लोग फुल आस्तीन का शर्ट व पैंट पहनें, शरीर के खुले भाग में मच्छर से बचाव वाली क्रीम या सरसों का तेल लगाएं।