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फंदे से लटकी मिली अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक की लाश
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Nov 2015 10:15 PM IST
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अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के तुलसीनगर स्थित अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। सोमवार रात उनका शव संस्थान के कार्यालय स्थित आराम कक्ष में पंखे के सहारे रस्सी से लटका मिला।
शव के पैरों के घुटने जमीन पर छू रहे थे जिससे तमाम आशंकाओं को बल मिल रहा है। उनकी पत्नी ने भी पुलिस को दिए बयान में संदेह जताया है।
पुलिस ने फिंगर प्रिंट दस्ते के साथ मौका-मुआयना किया मगर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शव का पोस्टमार्टम कराया तो रिपोर्ट में हैंगिंग की बात कही गई है।
अयोध्या शोध संस्थान की व्यवस्था का जिम्मा मूलरूप से इलाहाबाद के बहराना निवासी अविनाश कुमार श्रीवास्तव के जिम्मे था। सोमवार को वह जल्दी कार्यालय पहुंचे और रुटीन का काम निपटाया।
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दोपहर बाद करीब तीन बजे वह रामकथा मंचन कक्ष के बगल स्थित आराम कक्ष में चले गये और फिर देर शाम तक बाहर नहीं निकले। रात में कार्यालय बंद करने के लिए कर्मियों ने आराम कक्ष के बाहर पहुंच आवाज दी।
लेकिन अंदर से कोई जवाब न मिला तो दरवाजा खटखटाया गया और तेज-तेज आवाज दी गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। रात करीब 11 बजे सूचना पुलिस को दी गई।
कुछ देर बाद कोतवाली पुलिस और फिंगर प्रिंट दस्ते के साथ एसपी सिटी मौके पर पहुंचे। दरवाजा न खुलने पर जोर से धक्का दिया तो अंदर की कुंडी उखड़ गई और दरवाजा खुल गया।
भीतर देखा गया तो अविनाश का शव पंखे के हुक से बंधा था, मगर शव घुटने के बल जमीन पर था। लटकने के कोई चिन्ह नहीं देख पुलिस अवाक थी।
उसने मौका-मुआयना शुरू किया और इसकी जानकारी सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास पर उनकी पत्नी को दी गई। परिवार के लोग आधी रात के बाद मौके पर पहुंच गये।
पुलिस ने कर्मियों से पूछताछ के बाद शव को पीएम के लिए भिजवाया। परिवार के अन्य लोगों के पहुंचने के बाद मंगलवार को शव का पीएम कराया गया है।
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शव के पैरों के घुटने जमीन पर छू रहे थे जिससे तमाम आशंकाओं को बल मिल रहा है। उनकी पत्नी ने भी पुलिस को दिए बयान में संदेह जताया है।
पुलिस ने फिंगर प्रिंट दस्ते के साथ मौका-मुआयना किया मगर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शव का पोस्टमार्टम कराया तो रिपोर्ट में हैंगिंग की बात कही गई है।
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अयोध्या शोध संस्थान की व्यवस्था का जिम्मा मूलरूप से इलाहाबाद के बहराना निवासी अविनाश कुमार श्रीवास्तव के जिम्मे था। सोमवार को वह जल्दी कार्यालय पहुंचे और रुटीन का काम निपटाया।
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दोपहर बाद करीब तीन बजे वह रामकथा मंचन कक्ष के बगल स्थित आराम कक्ष में चले गये और फिर देर शाम तक बाहर नहीं निकले। रात में कार्यालय बंद करने के लिए कर्मियों ने आराम कक्ष के बाहर पहुंच आवाज दी।
लेकिन अंदर से कोई जवाब न मिला तो दरवाजा खटखटाया गया और तेज-तेज आवाज दी गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। रात करीब 11 बजे सूचना पुलिस को दी गई।
कुछ देर बाद कोतवाली पुलिस और फिंगर प्रिंट दस्ते के साथ एसपी सिटी मौके पर पहुंचे। दरवाजा न खुलने पर जोर से धक्का दिया तो अंदर की कुंडी उखड़ गई और दरवाजा खुल गया।
भीतर देखा गया तो अविनाश का शव पंखे के हुक से बंधा था, मगर शव घुटने के बल जमीन पर था। लटकने के कोई चिन्ह नहीं देख पुलिस अवाक थी।
उसने मौका-मुआयना शुरू किया और इसकी जानकारी सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास पर उनकी पत्नी को दी गई। परिवार के लोग आधी रात के बाद मौके पर पहुंच गये।
पुलिस ने कर्मियों से पूछताछ के बाद शव को पीएम के लिए भिजवाया। परिवार के अन्य लोगों के पहुंचने के बाद मंगलवार को शव का पीएम कराया गया है।