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हत्या आरोपियों को बचाने में पूर्व थानेदार को तीन साल सजा

Sat, 02 Apr 2016 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Sat, 02 Apr 2016 12:24 AM IST
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Murder accused sentenced to three years in protecting the former SHO
हत्या के तीन आरोपियों को बचाने के लिए पूर्व थानाध्यक्ष ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर गंभीर मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी गई तो आरोपियों के खिलाफ हत्या की धारा में आरोप पत्र कोर्ट में पहुंचा।
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हालांकि तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मामले में आरोपियों को बचाने के वह सारे उपाय कर दिए जिससे कोर्ट ने अंतत: सबको साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मगर विवेचना में लापरवाही बरतने के मामले में कोर्ट ने पूर्व एसओ वीर बहादुर सिंह को साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में तीन साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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यह फैसला एसीजेएम उदयवीर सिंह की अदालत से शुक्रवार को हुआ। खंडासा थाने पर पांच मई 1989 को चौकीदार ने सूचना दी थी कि रजऊ उर्फ रजाना की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई। पोस्टमार्टम  रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने की बात सामने आई।
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इतने गंभीर मामले में भी एसओ ने पहले तो रिपोर्ट नहीं दर्ज की। काफी जद्दोजहद के बाद राजाराम, सहबू व रमपता के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसके बावजूद एसओ पांच दिन तक न तो घटना स्थल पर गए और न ही किसी गवाह का बयान दर्ज किया।

विवेचना के दौरान थाने की जनरल डायरी कुछ और कह रही थी जबकि विवेचक ने केस डायरी में इससे इतर कई बातें लिखी थी। न तो जहरीले पदार्थ की तहकीकात की और न ही गला घोंटने से हुई मौत के कारणों का ही पता लगाया। आनन फानन में विवेचना करके आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

बाद में शासन से विवेचना सीबीसीआईडी को स्थानांतरित की गई। जांच एजेंसी ने विवेचना के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की धारा में आरोपपत्र भेजा और पूर्व एसओ खंडासा वीर बहादुर के खिलाफ अभिलेखों में एजेंसी के इंस्पेक्टर गणेश प्रसाद मिश्र ने रिपोर्ट लिखाई।


हत्या के मामले में वर्ष 1999 में अपर जिला जज प्रथम ने तीनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। आरोपियों को बचाने की खातिर गलत अभिलेख तैयार करने के मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने पूर्व एसओ (अब रिटायर्ड) को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई।
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