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अवध विवि में विद्यार्थियों की तादात घटी, बढ़ेगा आर्थिक दबाव

Lucknow Bureau Updated Fri, 31 Aug 2018 01:04 AM IST
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अवध विवि में विद्यार्थियों की संख्या घटी, बढ़ेगा आर्थिक दबाव
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फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में वर्ष 2018-19 के सत्र में विद्यार्थियों की संख्या काफी घट गई है। पिछले वर्ष की अपेक्षा 88 हजार कम दाखिले हो पाए हैं, शुक्रवार को दाखिले का आखिरी दिन है और करीब छह हजार छात्रों के दाखिले ही प्रक्रिया जारी हैं।

यूजी कक्षाओं के प्रथम वर्ष में 1.25 लाख व पीजी कक्षाओं में मात्र 18 हजार दाखिले हुए जबकि पिछले वर्ष यूजी के प्रथम वर्ष में 1.92 लाख व पीजी कक्षाओं में 42 हजार एडमिशन हुए थे।

अभी द्वितीय व तृतीय वर्ष का एडमिशन पूर्ण होने के बाद यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है। इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की अर्थिक स्थित पर पड़ेगा।

अवध विवि में विद्यार्थियों की संख्या विगत वर्षों में ठीक-ठाक रही है। वर्ष 2005-06 विवि में छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक थी। इसी वर्ष के बाद से विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ।

इस वर्ष के बाद श्रावस्ती, प्रतापगढ़ और लखनऊ जनपद विवि के कार्य क्षेत्र से बाहर हो गए। इसका खामियाजा विवि को भुगतना पड़ा। आमतौर पर इन तीनों जनपदों से विवि को प्रति वर्ष दो लाख से अधिक छात्र मिल जाया करते थे।

सर्वाधिक नुकसान प्रतापगढ़ जनपद के निकल जाने से हुआ है। यहां प्रतिवर्ष 1.50 लाख के आसपास विद्यार्थी यूजी और पीजी कक्षाओं में एडमिशन लेते थे। पिछले वर्ष अवध विवि में यूजी व पीजी कक्षाओं को मिलाकर विद्यार्थियों की संख्या छह लाख से अधिक थी।

इसमें प्रतापगढ़ व श्रावस्ती के स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र भी सम्मिलित है। इस वर्ष छात्र संख्या का यह आंकड़ा पांच लाख के आसपास भी जाने की संभावना नहीं है। अभी तक यूजी व पीजी के प्रथम वर्ष की कक्षाओं में सिर्फ 1.43 लाख विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है।

साथ ही छह हजार के लगभग विद्यार्थियों के आवेदन फॉर्म प्रोसेस की प्रक्रिया में है। विवि प्रशासन का तर्क यह है कि परीक्षाओं में नकल रुक जाने से विद्यार्थियों की संख्या प्रभावित हुई है, लेकिन आगामी वर्षों में इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे।

दूसरी ओर विवि में घटती छात्र संख्या विवि की अर्थिक स्थिति को प्रभावित करने की आशंका बनी हुई है। विवि की आय का संसाधन मात्र छात्रों की ओर से मिलने वाला परीक्षा शुल्क है।

एमए प्रथम वर्ष के प्रति छात्र से 728 रुपये, एमए द्वितीय वर्ष के प्रति छात्र से 978 रुपये, बीए प्रथम व द्वितीय वर्ष के प्रति छात्रों से 698 रुपये व तृतीय वर्ष के प्रति छात्रों से 798 रुपये लिए जाते है।

इसी प्रकार बीएसी व एमएससी के छात्रों से भी परीक्षा शुल्क लिए जाते हैं। लगातार घटती छात्र संख्या से विवि की आय प्रभावित होगी। मौजूदा समय में विवि प्रशासन अपने न्यू कैंपस के अलावा विकास संबंधी कई बड़े कार्य को अंजाम दे रहा है।

इसका बजट 100 करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे में विश्वविद्यालय की आय प्रभावित होने से विकास संबंधी कार्यों को झटका लगने के साथ शिक्षोत्तर कर्मचारियों को वेतन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अवध विवि ने पिछले वर्ष घटती विद्यार्थियों की संख्या व अर्थिक स्थिति को सामान्य बनाने के लिए परीक्षा शुल्क में बढ़ोत्तरी किए जाने का प्रस्ताव तैयार कराया था। यह प्रस्ताव तत्कालीन कुल सचिव संजय कुमार की ओर से बनाया गया था।

इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से यह प्रस्ताव अधर में है। इस बीच कई बार कार्य परिषद की बैठक हुई लेकिन यह एजेंडे में शामिल नहीं किया गया। इससे न तो प्रस्ताव पर चर्चा हो पाई और न ही प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकी है।

अवध विवि के मीडिया प्रभारी प्रो. केके वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष में परीक्षा के दौरान नकल प्रक्रिया के रुकने के कारण विद्यार्थियों की संख्या में कुछ कमी अवश्य आई है।

अब नए सत्र से विद्यार्थी पठन-पाठन को लेकर चिंतित है। यह छात्र हित में एक बड़ी सार्थकता है। इससे आगामी वर्ष में कम हो रही छात्र संख्या स्वयं ही दुरुस्त हो जाएगी।

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