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राममंदिर के लिए तराशे गए पत्थरों को चमकाएंगें मुस्लिम कारसेवक
Updated Sat, 27 Oct 2018 11:01 PM IST
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अयोध्या। रामनगरी में राम मंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि कार्यशाला में जमा किए गए तराशे पत्थरों पर जमी काई को छुड़ाकर उन्हें चमकाने का काम राम मंदिर निर्माण की मुहिम चला रहे मुस्लिम कारसेवक बबलू खान के नेतृत्व में सैकड़ों मुसलमान दीपावली के बाद करेंगे।
बबलू खान ने यह एलान करते हुए कहा कि न्यास कार्यशाला में रखे तराशे गए पत्थरों पर काई जम गई है। उनकी चमक धूमिल हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इन पत्थरों को फिर से चमकाने की जरूरत है, ताकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही शीघ्र राम मंदिर का निर्माण हो सके।
बबलू खान ने कहा कि हमें उम्मीद है कि शीघ्र ही राम मंदिर के पक्ष में फैसला आ जाएगा। ऐसे में मंदिर निर्माण में देरी न हो, इसलिए हम मुस्लिम भाई भी अपना योगदान देने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि दीपावली के बाद वह मुस्लिम भाइयों के साथ इन पत्थरों को चमकाने का काम करेंगे।
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पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती के शिष्य महंत डॉ. राघवेश दास वेदांती ने भी साधु-संतों के साथ बबलू खान की मुहिम में सहयोग करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बबलू खान जैसे लोग अयोध्या के सांप्रदायिक सद्भाव की नजीर हैं।
न्यास कार्यशाला में रखे हैं तराशे गए पत्थर
अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहाये जाने से दो साल पहले 30 अगस्त 1990 को अयोध्या के रामघाट क्षेत्र में कारसेवकपुरम् कार्यशाला की स्थापना की गई। तब से लेकर आज तक पत्थर तराशी का काम जारी है। तराशे गए पत्थर न्याय कार्यशाला मेें रखे हुए हैं। 2007 से 2010 तक पत्थरों की कमी के कारण काम बंद रहा। 2011 से काम फिर शुरू हुआ। इसमें पांच कारीगर और पांच मजदूरों को लगाया गया। अभी मात्र दो कारीगर और पांच मजदूर काम पर लगे हैं। रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला के मुख्य कारीगर रजनीकांत सोमपुरा भी पत्थरों में जमी काई को बड़ी समस्या मानते हैं। कहते हैं कि काई साफ करने में भी लंबा समय लग जाएगा।
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बबलू खान ने यह एलान करते हुए कहा कि न्यास कार्यशाला में रखे तराशे गए पत्थरों पर काई जम गई है। उनकी चमक धूमिल हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इन पत्थरों को फिर से चमकाने की जरूरत है, ताकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही शीघ्र राम मंदिर का निर्माण हो सके।
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बबलू खान ने कहा कि हमें उम्मीद है कि शीघ्र ही राम मंदिर के पक्ष में फैसला आ जाएगा। ऐसे में मंदिर निर्माण में देरी न हो, इसलिए हम मुस्लिम भाई भी अपना योगदान देने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि दीपावली के बाद वह मुस्लिम भाइयों के साथ इन पत्थरों को चमकाने का काम करेंगे।
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पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती के शिष्य महंत डॉ. राघवेश दास वेदांती ने भी साधु-संतों के साथ बबलू खान की मुहिम में सहयोग करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बबलू खान जैसे लोग अयोध्या के सांप्रदायिक सद्भाव की नजीर हैं।
न्यास कार्यशाला में रखे हैं तराशे गए पत्थर
अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहाये जाने से दो साल पहले 30 अगस्त 1990 को अयोध्या के रामघाट क्षेत्र में कारसेवकपुरम् कार्यशाला की स्थापना की गई। तब से लेकर आज तक पत्थर तराशी का काम जारी है। तराशे गए पत्थर न्याय कार्यशाला मेें रखे हुए हैं। 2007 से 2010 तक पत्थरों की कमी के कारण काम बंद रहा। 2011 से काम फिर शुरू हुआ। इसमें पांच कारीगर और पांच मजदूरों को लगाया गया। अभी मात्र दो कारीगर और पांच मजदूर काम पर लगे हैं। रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला के मुख्य कारीगर रजनीकांत सोमपुरा भी पत्थरों में जमी काई को बड़ी समस्या मानते हैं। कहते हैं कि काई साफ करने में भी लंबा समय लग जाएगा।