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यातायात अधीक्षक को धमकी देने वाले परिचालक के विरुद्घ जांच शुरू

Lucknow Bureau Updated Wed, 29 Aug 2018 11:33 PM IST
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यातायात अधीक्षक को धमकी की तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
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फैजाबाद। उत्तर प्रदेश सड़क राज्य परिवहन की फैजाबाद रीजन में यातायात अधीक्षक को धमकी देने संबंधी प्रकरण में आरोपी परिचालक पवन शुक्ला के विरुद्घ विभागीय जांच के आदेश जारी हो गए हैं।

रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र नाथ ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी व्हाट्सअप पर धमकी देने प्रकरण समेत संगठित टिकट चोरी मामले की जांच करेगी।

जांच टीम में फैजाबाद डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नंद कुमार, सुल्तानपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अरविंद कुुमार व सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक समीर कुमार होंगे।

इसके अलावा टीए एसएन शुक्ला के घर पर धावा बोलने के मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि अभी मामला जांच के अधीन है।

फैजाबाद रीजन में 24 अगस्त को सुल्तानपुर-कादीपुर मार्ग पर एक अनुबंधित बस में 24 डब्ल्यू टी पकड़े जाने पर परिचालक सुनील कुमार सिंह की ओर से बेबिल व मशीन छीनकर यातायात अधीक्षक एसएन शुक्ला से अभद्रता करने के साथ फरार हो गया था।

इस मामले के बाद यातायात अधीक्षक की ओर संगठित टिकट मफिया गिरोह का खुलासा किए गया था। इसमें सुल्तानपुर डिपो के एक अन्य परिचालक पवन शुक्ला की ओर से टीएस को व्हाट्सअप ग्रुप पर धमकी देने व इनके घर व फैजाबाद स्थित सरकारी क्वार्टर पर पहुंचकर धमकी देने व तोड़फोड़ करने का आरोप लगा था।

क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र नाथ की ओर से बुधवार को पवन शुक्ला व 24 डब्ल्यूटी मामले की ओर की जांच एआरएम स्तर से कराए जाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।

यह कमेटी दोनों मामलों की जांच करेगी। इसके साथ ही बुधवार को यातायात अधीक्षक के घर पर धावा बोले जाने संबंधी मामले में पुलिस अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कर पाई है। नगर कोतवाल अमर सिंह के अनुसार मामले की जांच चल रही है। जांच के उपरांत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

रोडवेज के फैजाबाद रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र नाथ की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति पर कर्मचारी नेताओं ने सवाल उठा रहे हैं। कर्मचारी नेता राजेंद्र पांडेय का आरोप है कि जांच कमेटी में सीनियर अधिकारी होने के बाद जूनियर अधिकारियों को जांच सौंप दी गई है।

उनका कहना है कि फैजाबाद एआरएम प्रभारी हैं व सुल्तानपुर एआरएम से सीनियर अकबरपुर डिपो के एआरएम हैं। साथ ही सुल्तानपुर डिपो का मामला होने के कारण वहां के अधिकारियों को जांच अधिकारी बनाया जाना न्यायोचित नहीं है। इससे निष्पक्ष जांच होने की संभावनाएं कम हैं।

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