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साकेत में गबन के मामले में 37 साल बाद हुआ फैसला
Updated Fri, 16 Mar 2018 12:16 AM IST
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साकेत में गबन के मामले में 37 साल बाद हुआ फैसला
फैजाबाद। वर्ष 1981 में साकेत महाविद्यालय में हुए पौने पांच लाख रुपये गबन के मामले में कोर्ट ने 37 साल बाद फैसला सुनाया। आरोपी ने अपराध युवावस्था में किया था, जबकि सजा के वक्त तो वह सेवानिवृत्त भी हो गया। कोर्ट ने उसे गबन का दोषी पाते हुए सात साल के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार गुप्ता की अदालत से बृहस्पतिवार को हुआ।
मामले में रिपोर्ट महाविद्यालय के तत्कालीन सचिव कैलाश नाथ श्रीवास्तव ने 21 मई 1981 को लिखाई थी। आरोप था कि महाविद्यालय के बीए प्रथम वर्ष के छात्रों की फीस तत्कालीन शुल्क लिपिक दिनेश कुमार सक्सेना निवासी लवकुश नगर वजीरगंज थाना कोतवाली नगर से जमा कराई। जमा रसीदों का तस्किरा उसने न तो संग्रह रजिस्टर में किया और न ही उक्त धनराशि उसने कैशियर को दी और न बैंक में जमा की। इस लिपिक ने विद्यालय के चार लाख 83 हजार 34 रुपये का गबन कर लिया। इसकी जानकारी प्रबंध समिति को होने पर उक्त लिपिक अवकाश लेकर विद्यालय से फरार हो गया। तब एसएसपी के आदेश पर मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई। मुकदमे की सुनवाई और गवाहों की फेहरिस्त पूरी होते-होते पौने चार दशक बीत गए। हालांकि गवाहों की लंबी फेहरिस्त खत्म हुई और मामला साबित होने पर बृहस्पतिवार को दिनेश को कारावास की सजा सुनाते हुए इसे भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया।
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फैजाबाद। वर्ष 1981 में साकेत महाविद्यालय में हुए पौने पांच लाख रुपये गबन के मामले में कोर्ट ने 37 साल बाद फैसला सुनाया। आरोपी ने अपराध युवावस्था में किया था, जबकि सजा के वक्त तो वह सेवानिवृत्त भी हो गया। कोर्ट ने उसे गबन का दोषी पाते हुए सात साल के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार गुप्ता की अदालत से बृहस्पतिवार को हुआ।
मामले में रिपोर्ट महाविद्यालय के तत्कालीन सचिव कैलाश नाथ श्रीवास्तव ने 21 मई 1981 को लिखाई थी। आरोप था कि महाविद्यालय के बीए प्रथम वर्ष के छात्रों की फीस तत्कालीन शुल्क लिपिक दिनेश कुमार सक्सेना निवासी लवकुश नगर वजीरगंज थाना कोतवाली नगर से जमा कराई। जमा रसीदों का तस्किरा उसने न तो संग्रह रजिस्टर में किया और न ही उक्त धनराशि उसने कैशियर को दी और न बैंक में जमा की। इस लिपिक ने विद्यालय के चार लाख 83 हजार 34 रुपये का गबन कर लिया। इसकी जानकारी प्रबंध समिति को होने पर उक्त लिपिक अवकाश लेकर विद्यालय से फरार हो गया। तब एसएसपी के आदेश पर मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई। मुकदमे की सुनवाई और गवाहों की फेहरिस्त पूरी होते-होते पौने चार दशक बीत गए। हालांकि गवाहों की लंबी फेहरिस्त खत्म हुई और मामला साबित होने पर बृहस्पतिवार को दिनेश को कारावास की सजा सुनाते हुए इसे भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया।
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