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धोखाधड़ी मामले में विवेचक को झटका
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:32 AM IST
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सात साल तक की सजा में रोक के बावजूद आरोपियों को किया था गिरफ्तार
फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से प्रतिपादित सिद्धांतों की अनदेखी करके वाहवाही लूटने के चक्कर में सात साल से कम की सजा के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने आरोपियों को निजी मुचलके पर अविलंब रिहा करने का आदेश दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने विवेचक के इस कृत्य पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करके 30 अगस्त तक कोर्ट को अवगत कराने और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन सख्ती से कराने का एसएसपी को आदेश दिया है। ये आदेश सीजेएम राजेश पाराशर की अदालत से गुरुवार को हुआ।
अधिवक्ता रामनाथ ने बताया कि, सीएचसी मया के अधीक्षक अंशुमान यादव ने चंद्रभूषण निवासी कुचौरी थाना खानपुर जिला गाजीपुर व शांतिभूषण निवासी अशरफपुर मजगवां थाना जलालपुर अंबेडकरनगर के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
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इसमें आरोप था कि नार्थ इंडियन एजूकेशन ट्रस्ट लखनऊ नामक संस्था की ओर से यूथ एजूकेटर्स पद के लिए शांतिभूषण फॉर्म भरवा रहा था। संस्था की ओर से इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है जबकि शांतिभूषण इसके लिए 200 से लेकर सात सौ तक लोगों से वसूल रहा था।
इस तहरीर पर शांतिभूषण के खिलाफ धारा 406, 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने शांतिभूषण और उसके साथी चंद्रभूषण को गिरफ्तार भी कर लिया। जबकि इन दोनों धाराओं में सात साल से कम सजा है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के तहत सात साल तक की सजा के मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है और सीआरपीसी की धारा 41 में भी इस आशय का संशोधन हो चुका है।
गुरुवार को दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक रिमांड की याचना करते हुए विवेचक धर्मेंद्र सिंह ने सीजेएम कोर्ट में पेश किया। यही नहीं रिमांड की अर्जी पेश करते समय विवेचक भी नदारद रहे।
इसे कोर्ट ने गंभीरता से लेकर अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य व मोहम्मद अकरम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की विधि व्यवस्था तथा सीआरपीसी में हुए संशोधन का हवाला देते हुए रिमांड अर्जी निरस्त करके दोनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया।
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फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से प्रतिपादित सिद्धांतों की अनदेखी करके वाहवाही लूटने के चक्कर में सात साल से कम की सजा के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने आरोपियों को निजी मुचलके पर अविलंब रिहा करने का आदेश दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने विवेचक के इस कृत्य पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करके 30 अगस्त तक कोर्ट को अवगत कराने और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन सख्ती से कराने का एसएसपी को आदेश दिया है। ये आदेश सीजेएम राजेश पाराशर की अदालत से गुरुवार को हुआ।
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अधिवक्ता रामनाथ ने बताया कि, सीएचसी मया के अधीक्षक अंशुमान यादव ने चंद्रभूषण निवासी कुचौरी थाना खानपुर जिला गाजीपुर व शांतिभूषण निवासी अशरफपुर मजगवां थाना जलालपुर अंबेडकरनगर के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
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इसमें आरोप था कि नार्थ इंडियन एजूकेशन ट्रस्ट लखनऊ नामक संस्था की ओर से यूथ एजूकेटर्स पद के लिए शांतिभूषण फॉर्म भरवा रहा था। संस्था की ओर से इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है जबकि शांतिभूषण इसके लिए 200 से लेकर सात सौ तक लोगों से वसूल रहा था।
इस तहरीर पर शांतिभूषण के खिलाफ धारा 406, 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने शांतिभूषण और उसके साथी चंद्रभूषण को गिरफ्तार भी कर लिया। जबकि इन दोनों धाराओं में सात साल से कम सजा है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के तहत सात साल तक की सजा के मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है और सीआरपीसी की धारा 41 में भी इस आशय का संशोधन हो चुका है।
गुरुवार को दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक रिमांड की याचना करते हुए विवेचक धर्मेंद्र सिंह ने सीजेएम कोर्ट में पेश किया। यही नहीं रिमांड की अर्जी पेश करते समय विवेचक भी नदारद रहे।
इसे कोर्ट ने गंभीरता से लेकर अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य व मोहम्मद अकरम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की विधि व्यवस्था तथा सीआरपीसी में हुए संशोधन का हवाला देते हुए रिमांड अर्जी निरस्त करके दोनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया।