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सीबीआई का छावनी परिषद में छापा
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:11 AM IST
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सीबीअाई रेड
- फोटो : सीबीअाई रेड
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डोगरा रेजीमेंटल सेंटर के छावनी परिषद के बोर्ड दफ्तर में शुक्रवार को सुबह 10 बजे अचानक सीबीआई की आठ सदस्यीय टीम ने छापा मारा। बोर्ड से कराए गए कार्यों की फाइलें, बिल-वाउचर समेत कंप्यूटर में दर्ज इंट्री आदि की जांच देर शाम तक जारी रही। बोर्ड के उपाध्यक्ष रूपेश ओझा ने सीबीआई जांच के पीछे कैंटोनमेंट बोर्ड के चीफ एक्जीक्यूटिव अधिकारी अभिनव सिंह पर वित्तीय अनियमितता का मामला बताया है। जबकि सीईओ ने कहा कि सभी आरोपों की विभागीय जांच पहले ही हो गई है, जिसमें कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। फिलहाल सीबीआई टीम मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम दो वाहनों में सवार शुक्रवार करीब 10 बजे कैंटोनमेंट बोर्ड पहुंची। टीम ने कार्यालय में मौजूद सभी अधिकारी-कर्मचारी को बाहर निकालकर जांच शुरू की। देर शाम तक चल रही कार्रवाई के दौरान में टीम ने कार्यालय में मौजूद रजिस्टर व अन्य कागजात समेत कंप्यूटर में दर्ज रिकॉर्ड को भी खंगाला। आवश्यक कागजात समेत अन्य रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए है। सीबीआई अधिकारी छावनी क्षेत्र में हुए विकास कार्यों समेत अन्य कई खर्चों को लेकर फाइलें, दस्तावेज, बिल-वाउचर व कंप्यूटर में दर्ज इंट्री को चेक करते दिखे।
कैंटोनमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष रूपेश ओझा ने बताया कि बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव अधिकारी अभिनव सिंह पर डेढ़ सालों से करोड़ों की वित्तीय अनियमितता के आरोप लग रहे थे। उन्होंने कई महीनों से किसी भी खर्च को बोर्ड से पास नहीं कराया, साथ ही पैनल कमेटी से भी वित्तीय जांच नहीं कराई। इसके अलावा वे वित्तीय कमेटी को नजरअंदाज कर मनमानी तरीके से खर्च करते थे। उनके रवैये से बोर्ड के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी नाराज थे। यहां तक एक महिलाकर्मी ने तो लिखित शिकायत कर कार्य करने से इनकार कर दिया था।
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आरोप लगाया कि सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से स्टेशन कमांडर व स्वयं मेरे साथ अभद्रता की जाती है। एक बार उन्होंने कार्यालय में ही पिस्टल से गोली मारने की धमकी भी दी थी, इस संदर्भ में कैंट थाने में केस भी दर्ज करया गया था। इन सबको लेकर कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, साथ ही रक्षा मंत्री से जांच कराकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। इसी संदर्भ में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, जिसकी जांच करने टीम यहां पहुंची।
कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि सीबीआई टीम दफ्तर में फाइलों, दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही वह कुछ कागजात वगैरह भी कब्जे में ले रही है। कहा कि उनके खिलाफ लगे सारे आरोप निराधार है, पहले इसकी विभागीय जांच हो चुकी है, जिसमें उपाध्यक्ष समेत सभासदों के आरोप गलत पाए गए थे।
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सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम दो वाहनों में सवार शुक्रवार करीब 10 बजे कैंटोनमेंट बोर्ड पहुंची। टीम ने कार्यालय में मौजूद सभी अधिकारी-कर्मचारी को बाहर निकालकर जांच शुरू की। देर शाम तक चल रही कार्रवाई के दौरान में टीम ने कार्यालय में मौजूद रजिस्टर व अन्य कागजात समेत कंप्यूटर में दर्ज रिकॉर्ड को भी खंगाला। आवश्यक कागजात समेत अन्य रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए है। सीबीआई अधिकारी छावनी क्षेत्र में हुए विकास कार्यों समेत अन्य कई खर्चों को लेकर फाइलें, दस्तावेज, बिल-वाउचर व कंप्यूटर में दर्ज इंट्री को चेक करते दिखे।
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कैंटोनमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष रूपेश ओझा ने बताया कि बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव अधिकारी अभिनव सिंह पर डेढ़ सालों से करोड़ों की वित्तीय अनियमितता के आरोप लग रहे थे। उन्होंने कई महीनों से किसी भी खर्च को बोर्ड से पास नहीं कराया, साथ ही पैनल कमेटी से भी वित्तीय जांच नहीं कराई। इसके अलावा वे वित्तीय कमेटी को नजरअंदाज कर मनमानी तरीके से खर्च करते थे। उनके रवैये से बोर्ड के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी नाराज थे। यहां तक एक महिलाकर्मी ने तो लिखित शिकायत कर कार्य करने से इनकार कर दिया था।
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आरोप लगाया कि सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से स्टेशन कमांडर व स्वयं मेरे साथ अभद्रता की जाती है। एक बार उन्होंने कार्यालय में ही पिस्टल से गोली मारने की धमकी भी दी थी, इस संदर्भ में कैंट थाने में केस भी दर्ज करया गया था। इन सबको लेकर कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, साथ ही रक्षा मंत्री से जांच कराकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। इसी संदर्भ में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, जिसकी जांच करने टीम यहां पहुंची।
कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि सीबीआई टीम दफ्तर में फाइलों, दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही वह कुछ कागजात वगैरह भी कब्जे में ले रही है। कहा कि उनके खिलाफ लगे सारे आरोप निराधार है, पहले इसकी विभागीय जांच हो चुकी है, जिसमें उपाध्यक्ष समेत सभासदों के आरोप गलत पाए गए थे।