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Ayodhya News: छह माह में धरातल पर आ जाएंगे कैबिनेट से स्वीकृत प्रस्ताव
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अयोध्या। रामनगरी में कैबिनेट की बैठक में अयोध्या से जुड़े छह प्रस्तावों को मंजूरी मिली। अब इन पर कार्रवाई की बारी है। लगभग छह माह में ज्यादातर प्रस्ताव पर कार्रवाई धरातल पर आने की उम्मीद है।
योगी कैबिनेट की बैठक पिछले गुरुवार को सरयू तट के रामकथा संग्रहालय में हुई। लगभग घंटे भर में कैबिनेट ने 14 प्रस्तावों को मंजूरी दी। छह का संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर अयोध्या से है। यूपी अंतरदेशीय जल मार्ग प्राधिकरण, वसंत पंचमी व मकर संक्रांति के मेले को राज्य स्तर का दर्जा, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान, अयोध्याजी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद, मां पाटेश्वरी तीर्थ विकास परिषद और अंतरराष्ट्रीय मंदिर संग्रहालय।
कैबिनेट से पारित प्रस्ताव में कार्रवाई दो तरह से होती है। एक वह जिनमें नियम कायदे बनाए जाते हैं। दूसरे वह जिनमें नियम कायदे बनाने की जरूरत नहीं है। कैबिनेट से पास प्रस्ताव प्रदेश के मुख्य सचिव के पास जाते हैं। वहां से विभागों को भेजा जाता है। नियमावली के लिए शासन के भाषा विभाग में जाते हैं। इसकी कमियां दूर की जाती हैं। फिर विधानमंडल में प्रस्तुत होते हैं। स्वीकृति के बाद कार्यवाही शुरू होती है। पहले से नियमावली वाले प्रस्ताव मुख्य सचिव के जरिये विभागों को जाते हैं। सीधे शासनादेश जारी होता है।
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अयोध्या से जुड़े प्रस्तावों की स्थिति
-यूपी अंतरदेशीय जल मार्ग प्राधिकरण का गठन प्रदेश में पहली बार हो रहा है। नए नियम कायदे बनेंगे। कैबिनेट का प्रस्ताव मुख्य सचिव के पास जाएगा। वहां से संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा जाएगा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, अफसर, कर्मचारी, कार्यालय संसाधन का आकलन होगा। जानकार बताते हैं कि विभाग इसकी नियमावली बनाएगा। विधानमंडल में प्रस्तुत होगा। स्वीकृत होगा। फिर इसे लागू किया जाएगा। तब इसके कार्य शुरू होंगे।
-अयोध्याजी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद और मां पाटेश्वरी तीर्थ विकास परिषद नया प्रस्ताव है, लेकिन प्रदेश में इसके पहले यूपी बृज तीर्थ विकास परिषद का गठन हो चुका है। वह नियमावली लागू हुई तो दोनों विकास परिषद जल्द धरातल पर आ जाएंगे। नई नियमावली जोड़ी गई तो कुछ समय लगेगा। इसे विधान मंडल में प्रस्तुत करना होगा।
-वसंत पंचमी व मकर संक्रांति मेले को राज्य स्तर का दर्जा मिला। अयोध्या में चार राज्य स्तरीय मेले पहले से हो रहे हैं। नियमावली बनी है। अब वित्त विभाग के प्रमुख सचिव के स्तर के कार्यवाही होगी। शासनादेश जारी होगा। जल्द होने की उम्मीद है।
-अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान को मंजूरी मिली। अयोध्या शोध संस्थान पहले से काम कर रहा है। नियमावली है। संशोधन हुआ तो विधानमंडल तक जाएगा। संशोधन न हुआ तो इस पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।
-अंतरराष्ट्रीय मंदिर संग्रहालय निर्माण का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर हुआ। इसकी नियमावली में संशोधन हुआ तो प्रस्ताव विधान मंडल में जाएगा। नहीं हुआ तो संग्रहालय निर्माण के लिए सीधे शासनादेश जारी होगा।
खास बात यह है कि कैबिनेट से स्वीकृत प्रस्ताव दोबारा कैबिनेट में नहीं जाएंगे। चाहे प्रस्तावों पर सीधे शासनादेश जारी हो या फिर नियमावली बनने के बाद विधानमंडल में प्रस्तुत हों। उम्मीद की जा रही है कि छह माह में कैबिनेट से स्वीकृत प्रस्ताव धरातल पर आ ही जाएंगे।
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योगी कैबिनेट की बैठक पिछले गुरुवार को सरयू तट के रामकथा संग्रहालय में हुई। लगभग घंटे भर में कैबिनेट ने 14 प्रस्तावों को मंजूरी दी। छह का संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर अयोध्या से है। यूपी अंतरदेशीय जल मार्ग प्राधिकरण, वसंत पंचमी व मकर संक्रांति के मेले को राज्य स्तर का दर्जा, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान, अयोध्याजी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद, मां पाटेश्वरी तीर्थ विकास परिषद और अंतरराष्ट्रीय मंदिर संग्रहालय।
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कैबिनेट से पारित प्रस्ताव में कार्रवाई दो तरह से होती है। एक वह जिनमें नियम कायदे बनाए जाते हैं। दूसरे वह जिनमें नियम कायदे बनाने की जरूरत नहीं है। कैबिनेट से पास प्रस्ताव प्रदेश के मुख्य सचिव के पास जाते हैं। वहां से विभागों को भेजा जाता है। नियमावली के लिए शासन के भाषा विभाग में जाते हैं। इसकी कमियां दूर की जाती हैं। फिर विधानमंडल में प्रस्तुत होते हैं। स्वीकृति के बाद कार्यवाही शुरू होती है। पहले से नियमावली वाले प्रस्ताव मुख्य सचिव के जरिये विभागों को जाते हैं। सीधे शासनादेश जारी होता है।
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अयोध्या से जुड़े प्रस्तावों की स्थिति
-यूपी अंतरदेशीय जल मार्ग प्राधिकरण का गठन प्रदेश में पहली बार हो रहा है। नए नियम कायदे बनेंगे। कैबिनेट का प्रस्ताव मुख्य सचिव के पास जाएगा। वहां से संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा जाएगा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, अफसर, कर्मचारी, कार्यालय संसाधन का आकलन होगा। जानकार बताते हैं कि विभाग इसकी नियमावली बनाएगा। विधानमंडल में प्रस्तुत होगा। स्वीकृत होगा। फिर इसे लागू किया जाएगा। तब इसके कार्य शुरू होंगे।
-अयोध्याजी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद और मां पाटेश्वरी तीर्थ विकास परिषद नया प्रस्ताव है, लेकिन प्रदेश में इसके पहले यूपी बृज तीर्थ विकास परिषद का गठन हो चुका है। वह नियमावली लागू हुई तो दोनों विकास परिषद जल्द धरातल पर आ जाएंगे। नई नियमावली जोड़ी गई तो कुछ समय लगेगा। इसे विधान मंडल में प्रस्तुत करना होगा।
-वसंत पंचमी व मकर संक्रांति मेले को राज्य स्तर का दर्जा मिला। अयोध्या में चार राज्य स्तरीय मेले पहले से हो रहे हैं। नियमावली बनी है। अब वित्त विभाग के प्रमुख सचिव के स्तर के कार्यवाही होगी। शासनादेश जारी होगा। जल्द होने की उम्मीद है।
-अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान को मंजूरी मिली। अयोध्या शोध संस्थान पहले से काम कर रहा है। नियमावली है। संशोधन हुआ तो विधानमंडल तक जाएगा। संशोधन न हुआ तो इस पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।
-अंतरराष्ट्रीय मंदिर संग्रहालय निर्माण का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर हुआ। इसकी नियमावली में संशोधन हुआ तो प्रस्ताव विधान मंडल में जाएगा। नहीं हुआ तो संग्रहालय निर्माण के लिए सीधे शासनादेश जारी होगा।
खास बात यह है कि कैबिनेट से स्वीकृत प्रस्ताव दोबारा कैबिनेट में नहीं जाएंगे। चाहे प्रस्तावों पर सीधे शासनादेश जारी हो या फिर नियमावली बनने के बाद विधानमंडल में प्रस्तुत हों। उम्मीद की जा रही है कि छह माह में कैबिनेट से स्वीकृत प्रस्ताव धरातल पर आ ही जाएंगे।