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अर्धनिर्मित श्रीरामद्वार को किया गया जमींदोज
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के नयाघाट पर स्थित अर्धनिमित श्रीराम द्वार गुरुवार को जमींदोज कर दिया गया। सपा सरकार की दो करोड़ की इस योजना में कुल 50 लाख ही खर्च हो पाए थे। इसी बीच द्वार के निर्माण में अनियमितता के चलते काम रुक गया था।
प्रवेश द्वार संकरा होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हुई थी, इसलिए इसको तोड़ने का प्रयास तीन वर्षों से हो रहा था। शासन के आदेश के बाद गुरुवार को इस द्वार को जेसीबी लगाकर प्रशासन ने धराशायी कर दिया।
अयोध्या के मुख्य प्रवेश मार्ग पर इस द्वार का निर्माण कार्य समाजवादी पार्टी के अखिलेश सरकार में 2016 में प्रारंभ हुआ था। कुल दो करोड़ की योजना थी। जिस पर अब तक 50 लाख खर्च भी हो चुके हैं।
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इस बीच घटिया निर्माण से नाराज तत्कालीन अयोध्या विधायक व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने काम को रोकवा दिया था। इसके बाद जांच में यह पाया गया कि प्रवेश द्वार के निर्माण में अनियमितता बरती गई है, साथ ही इसकी चौड़ाई भी कम है।
ऐसे में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर यह द्वार दुुर्घटना का सबब बन सकता है। जिला प्रशासन द्वारा 2018 से अब तब कई बार शासन को पत्र भेजकर इस द्वार को तोड़े जाने की मांग की गई थी, लेकिन शासन से अनुमति न मिलने के कारण यह द्वार अर्धनिर्मित अवस्था में खड़ा रहा।
द्वार के संकरा होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। तीन साल बाद शासन से अनुमति मिलते ही जिला प्रशासन ने गुरुवार को इस द्वार को धराशायी कर दिया है।
राममंदिर बनने के साथ ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव बढ़ने लगा है। एक अनुमान के मुताबिक राममंदिर बनने के बाद प्रतिदिन अयोध्या में करीब एक लाख भक्त-श्रद्धालु आएंगे।
इधर सहादतगंज-नयाघाट मार्ग व श्रीराम जन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्गों का चौड़ीकरण भी प्रस्तावित है, ताकि बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में सुविधा हो।
मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण में भी रामप्रवेश द्वार बाधा बन रहा था। अयोध्या के विकास मॉडल में छह नए प्रवेश द्वार बनाए जाने हैं।
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प्रवेश द्वार संकरा होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हुई थी, इसलिए इसको तोड़ने का प्रयास तीन वर्षों से हो रहा था। शासन के आदेश के बाद गुरुवार को इस द्वार को जेसीबी लगाकर प्रशासन ने धराशायी कर दिया।
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अयोध्या के मुख्य प्रवेश मार्ग पर इस द्वार का निर्माण कार्य समाजवादी पार्टी के अखिलेश सरकार में 2016 में प्रारंभ हुआ था। कुल दो करोड़ की योजना थी। जिस पर अब तक 50 लाख खर्च भी हो चुके हैं।
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इस बीच घटिया निर्माण से नाराज तत्कालीन अयोध्या विधायक व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने काम को रोकवा दिया था। इसके बाद जांच में यह पाया गया कि प्रवेश द्वार के निर्माण में अनियमितता बरती गई है, साथ ही इसकी चौड़ाई भी कम है।
ऐसे में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर यह द्वार दुुर्घटना का सबब बन सकता है। जिला प्रशासन द्वारा 2018 से अब तब कई बार शासन को पत्र भेजकर इस द्वार को तोड़े जाने की मांग की गई थी, लेकिन शासन से अनुमति न मिलने के कारण यह द्वार अर्धनिर्मित अवस्था में खड़ा रहा।
द्वार के संकरा होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। तीन साल बाद शासन से अनुमति मिलते ही जिला प्रशासन ने गुरुवार को इस द्वार को धराशायी कर दिया है।
राममंदिर बनने के साथ ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव बढ़ने लगा है। एक अनुमान के मुताबिक राममंदिर बनने के बाद प्रतिदिन अयोध्या में करीब एक लाख भक्त-श्रद्धालु आएंगे।
इधर सहादतगंज-नयाघाट मार्ग व श्रीराम जन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्गों का चौड़ीकरण भी प्रस्तावित है, ताकि बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में सुविधा हो।
मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण में भी रामप्रवेश द्वार बाधा बन रहा था। अयोध्या के विकास मॉडल में छह नए प्रवेश द्वार बनाए जाने हैं।