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खून जांचने का सामान खत्म, नहीं मिला जरूरतमंदों को ब्लड
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अयोध्या। जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही मंगलवार को मरीज व तीमारदारों पर भारी पड़ती दिखी। यहां स्थित ब्लड बैंक से रक्त देने से पहले उसकी जांच करने के लिए खत्म हुए सामान की खरीद अब तक नहीं हो सकी।
लिहाजा जरूरतमंदों को डोनर होने के बावजूद घंटों खून नहीं मिल सका। डोनर के साथ मरीज व तीमारदार ब्लड बैंक का चक्कर काटते रहे। दूसरी पहर सीएमएस ने फौरी तौर पर कुछ व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया।
जिला चिकित्सालय में छह सौ यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक स्थापित है। इस समय रक्तदाता लाने पर ही रक्त मिलने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सामान्य दिनों में किसी भी जरूरतमंद को रक्त देने के लिए मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच की जाती है।
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उसके बदले एक यूनिट रक्त लेकर मरीज के ब्लड ग्रुप का रक्त मरीज को दे दिया जाता है। इन दिनों रक्त का स्टाक खाली होने से संबंधित ब्लड ग्रुप का डोनर लाने पर ही रक्त मिल पा रहा है। उसके लिए डोनर के रक्त की मलेरिया, बीडीआरएल, एचबीएसएजी, एचसीवी व एचआईवी टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाता है।
इधर, बीते माह से ही मलेरिया रैपिड टेस्ट किट, एंटी सीरा (एबीडी), एससीवी रैपिड कार्ड, आइसो प्रोफाइल, प्लेन ट्यूब सहित तमाम जरूरी सामान खत्म हो चुके हैं। जिसके लिए पांच अगस्त व आठ अगस्त को ही इंडेंट नवागत सीएमएस को भेजा गया। लेकिन सभी सामान जेएम पोर्टल से खरीद का हवाला देते हुए तत्समय खरीद नहीं की गई और आरडीसी से उधार सामान लाकर काम चलाया गया।
मंगलवार को उधारी का सामान भी खत्म हो गया। नतीजतन जांच न हो पाने से जरूरतमंद को डोनर होने के बावजूद भी खून नहीं मिल सका। सुबह से मरीज डोनर लेकर ब्लड बैंक से जिला अस्पताल के विभिन्न पटलों पर भटकते रहे। समय पर रक्त न मिल पाने से तीमारदार भी आक्रोशित हुए। कर्मियों ने मामले से सीएमएस को अवगत कराया। इस पर उन्होंने फौरी तौर पर वैकल्पिक इंतजाम करने का आश्वासन दिया।
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लिहाजा जरूरतमंदों को डोनर होने के बावजूद घंटों खून नहीं मिल सका। डोनर के साथ मरीज व तीमारदार ब्लड बैंक का चक्कर काटते रहे। दूसरी पहर सीएमएस ने फौरी तौर पर कुछ व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया।
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जिला चिकित्सालय में छह सौ यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक स्थापित है। इस समय रक्तदाता लाने पर ही रक्त मिलने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सामान्य दिनों में किसी भी जरूरतमंद को रक्त देने के लिए मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच की जाती है।
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उसके बदले एक यूनिट रक्त लेकर मरीज के ब्लड ग्रुप का रक्त मरीज को दे दिया जाता है। इन दिनों रक्त का स्टाक खाली होने से संबंधित ब्लड ग्रुप का डोनर लाने पर ही रक्त मिल पा रहा है। उसके लिए डोनर के रक्त की मलेरिया, बीडीआरएल, एचबीएसएजी, एचसीवी व एचआईवी टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाता है।
इधर, बीते माह से ही मलेरिया रैपिड टेस्ट किट, एंटी सीरा (एबीडी), एससीवी रैपिड कार्ड, आइसो प्रोफाइल, प्लेन ट्यूब सहित तमाम जरूरी सामान खत्म हो चुके हैं। जिसके लिए पांच अगस्त व आठ अगस्त को ही इंडेंट नवागत सीएमएस को भेजा गया। लेकिन सभी सामान जेएम पोर्टल से खरीद का हवाला देते हुए तत्समय खरीद नहीं की गई और आरडीसी से उधार सामान लाकर काम चलाया गया।
मंगलवार को उधारी का सामान भी खत्म हो गया। नतीजतन जांच न हो पाने से जरूरतमंद को डोनर होने के बावजूद भी खून नहीं मिल सका। सुबह से मरीज डोनर लेकर ब्लड बैंक से जिला अस्पताल के विभिन्न पटलों पर भटकते रहे। समय पर रक्त न मिल पाने से तीमारदार भी आक्रोशित हुए। कर्मियों ने मामले से सीएमएस को अवगत कराया। इस पर उन्होंने फौरी तौर पर वैकल्पिक इंतजाम करने का आश्वासन दिया।