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बीडीओ ने लगाई रिपोर्ट, बच्चे नहीं तो आवास भी नहीं
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अयोध्या। तारुन ब्लॉक क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल किया जा रहा है। लाभार्थी की शिकायत पर उल्टी सीधी रिपोर्ट लगाकर मामले का निस्तारण किया जा रहा है। इंतेहा तो तब हो गई जब दंपती को बच्चे न होने पर प्रधानमंत्री आवास न मिलने की रिपोर्ट लगा दी गई। मामला ग्राम सभा बाहरपुर का है।
गांव के एक गरीब को आवास की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पीड़ित ने आवास न मिलने की शिकायत ग्राम्य विकास विभाग से ऑनलाइन की थी। जिस पर खंड विकास अधिकारी ने रिपोर्ट लगा दी कि इनके बच्चें नहीं हैं इसलिए आवास नहीं दिया जा सकता।
शिकायतकर्त्ता प्रेम प्रकाश का आरोप है कि 2011 की आवास सूची में नाम होने के बावजूद उसे आवास का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि उसका कच्चा मकान वर्षों पहले जमींदोज हो गया है।
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वह गुजर-बसर के लिए अलग रह रहे भाई के रहमोकरम पर दिए कमरे में जीवन यापन कर रहा है। अब वे आवास कट जाने की बात को लेकर कमरा खाली करने की बात कह रहे हैं। जांच अधिकारी उसी कमरे को दर्शाकर आवास से अपात्र कर रहे हैं।
खंड विकास अधिकारी की जांच आख्या में बताया कि प्रेम प्रकाश सिंह की शिकायत की जांच कराई गई। इनका नाम 2011 की सेक सूची में भी है लेकिन पिछले कई वर्षों से अपने भाई के साथ रह रहे हैं। इनके बच्चे भी नहीं है। इसलिए इनको अपात्र किया जाता है।
जांच आख्या परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण को भेजी गई है। पीड़ित का आरोप है गांव के कुछ लोगों के पास पक्का मकान होते हुए भी उन्हें आवास दे दिया गया है। इसके अलावा शौचालय तथा राशन कार्ड की सुविधा नहीं दी जा रही है।
परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण कमलेश कुमार सोनी का कहना है कि बच्चे न होने पर आवास से वंचित नहीं किया जा सकता है। जांच करवाकर पात्र मिलने पर पीड़ित को आवास का लाभ दिया जाएगा।
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गांव के एक गरीब को आवास की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पीड़ित ने आवास न मिलने की शिकायत ग्राम्य विकास विभाग से ऑनलाइन की थी। जिस पर खंड विकास अधिकारी ने रिपोर्ट लगा दी कि इनके बच्चें नहीं हैं इसलिए आवास नहीं दिया जा सकता।
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शिकायतकर्त्ता प्रेम प्रकाश का आरोप है कि 2011 की आवास सूची में नाम होने के बावजूद उसे आवास का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि उसका कच्चा मकान वर्षों पहले जमींदोज हो गया है।
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वह गुजर-बसर के लिए अलग रह रहे भाई के रहमोकरम पर दिए कमरे में जीवन यापन कर रहा है। अब वे आवास कट जाने की बात को लेकर कमरा खाली करने की बात कह रहे हैं। जांच अधिकारी उसी कमरे को दर्शाकर आवास से अपात्र कर रहे हैं।
खंड विकास अधिकारी की जांच आख्या में बताया कि प्रेम प्रकाश सिंह की शिकायत की जांच कराई गई। इनका नाम 2011 की सेक सूची में भी है लेकिन पिछले कई वर्षों से अपने भाई के साथ रह रहे हैं। इनके बच्चे भी नहीं है। इसलिए इनको अपात्र किया जाता है।
जांच आख्या परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण को भेजी गई है। पीड़ित का आरोप है गांव के कुछ लोगों के पास पक्का मकान होते हुए भी उन्हें आवास दे दिया गया है। इसके अलावा शौचालय तथा राशन कार्ड की सुविधा नहीं दी जा रही है।
परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण कमलेश कुमार सोनी का कहना है कि बच्चे न होने पर आवास से वंचित नहीं किया जा सकता है। जांच करवाकर पात्र मिलने पर पीड़ित को आवास का लाभ दिया जाएगा।