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कॉमर्शियल जोन के रूप में विकसित होगी अयोध्या
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अयोध्या-विकास प्राधिकरण में मास्ट प्लान को लेकर आयोजित बैठक में मौजूद मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल,ज
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के साथ अयोध्या का स्वरूप पूरी तरह से बदला जाएगा। अयोध्या का अधिकांश इलाका अब कॉमर्शियल जोन के रूप में विकसित होगा। पर्यटकों की सुविधाओं के लिए चौड़े मार्ग होंगे।
अयोध्या के तीनों परिक्रमा मार्ग 84 कोसी, 14 कोसी व पांच कोसी की चौड़ाई 30 मीटर होगी। इससे आने जाने वाले पर्यटकों को ट्रैफिक संबंधित समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
इसके अलावा विकास प्राधिकरण की सीमा तक सभी हाईवे के दोनों ओर का इलाका 50 मीटर तक कॉमर्शियल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण में बुधवार को मास्टर प्लान को लेकर बैठक हुई है।
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बैठक में अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन सिटी की दृष्टि से विकसित करने को लेकर चर्चा हुई है। इसमें मास्टर प्लान के लिए समस्त विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा की गई है।
इसमें शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, पर्यटन की सुविधाओं व सड़कों की चौड़ाई बढ़ाए जाने के अलावा सभी विभागों के नए प्रस्तावों को शामिल किया गया है। नियोजित मास्टर प्लान के लिए समस्त विभागों के प्रस्तावों को देखा गया है।
इसमें सभी विभागों की ओर से प्रस्तावित विकास योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता और भूमि के विकास की प्रकृति पर चर्चा की गई। इसमें पाया गया है कि अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने के लिए कॉमर्शियल क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा।
योजनाओं के अनुरूप विभागों को सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जिससे पर्यटक व श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। बैठक में यह तय किया गया है कि अयोध्या जिले सभी हाईवे व प्रस्तावित हाईवे से सटे इलाके की 50 मीटर दूरी (अयोध्या विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में) कॉमर्शियल होगी।
इसके पीछे के इलाके इंडस्ट्रियल जोन व उसके पीछे के इलाके रजीडेंशियल जोन में होंगे। इसके साथ ही अयोध्या के अंदर सभी परिक्रमा 84 कोसी, 14 कोसी व पांच कोसी मार्ग की चौड़ाई को 30 मीटर किया जाएगा।
पर्यटकों की सुविधा की दृष्टि से नई ट्रैफिक व्यवस्था का संचालन भी किया जाएगा। इसके साथ ही नव्य अयोध्या के आसपास के इलाके के लिए क्षेत्र को कामर्शियल जोन में रखा जाएगा। इसमें पर्यटकों को ठहरने, खाने व अन्य सुविधाएं विश्व स्तरीय देने का प्लान है।
बैठक में मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल, जिलाधिकारी अनुज झा, वीसी अयोध्या विकास प्राधिकरण विशाल सिंह, सचिव सत्य प्रकाश सिंह, वित्त अधिकारी रवींद्र प्रताप सिंह समेत 32 विभागों के अधिकारी शामिल रहे।
अयोध्या में विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं देने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं सोमवार को अपने-अपने प्रस्तावों में संशोधन कर पेश करें। इसमें विभागों को यह तय करना है कि उनके विकास कार्य की प्रवृत्ति किस प्रकार की है।
इनके इलाके को कॉमर्शियल जोन में या अन्य जोन में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही विकास संबंधी प्रस्तावों के लिए बेहतर समन्वय बन सके इसके लिए सड़क समेत अन्य सुविधाएं का खाका तैयार किया जाए।
इसमें सबके अलावा शहर की मौजूदा आबादी व फ्लोटिंग आबादी को जोड़कर प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है। मास्टर प्लान 2031 के लिए अयोध्या के पुराने विकास क्षेत्र का सर्वे करने वाली कंपनी स्टेसलिट ने बैठक में अपना फाइनल ड्राफ्ट पेश किया है।
मंडलायुक्त ने समस्त विभागों को निर्देश दिया है कि मास्टर प्लान 2031 के बजाय 2051 का बनाया जाए। इसके लिए सभी विभाग अपने अपने प्रस्तावों में 2051 की आबादी का ग्राफ व 2051 की फ्लोटिंग आबादी का ग्राफ देखकर तैयार करें।
जिससे हर दस वर्ष पर मास्टर प्लान बनाने की नौबत न आए। अमृत योजना के तहत बन रहे मास्टर प्लान का डेटा फिलहाल अभी हैदराबाद एनआईसी के पास है।
इसमें सर्वे कंपनी की ओर से किए गए सर्वे की 1600 शीटों को समाहित करने का कार्य किया जा रहा है। इस शीट की वापसी के टाउन प्लानिंग विभाग बेस डेटा पर आधारित मास्टर प्लान बनाएगा। यही फाइनल मास्टर प्लान होगा।
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अयोध्या के तीनों परिक्रमा मार्ग 84 कोसी, 14 कोसी व पांच कोसी की चौड़ाई 30 मीटर होगी। इससे आने जाने वाले पर्यटकों को ट्रैफिक संबंधित समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
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इसके अलावा विकास प्राधिकरण की सीमा तक सभी हाईवे के दोनों ओर का इलाका 50 मीटर तक कॉमर्शियल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण में बुधवार को मास्टर प्लान को लेकर बैठक हुई है।
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बैठक में अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन सिटी की दृष्टि से विकसित करने को लेकर चर्चा हुई है। इसमें मास्टर प्लान के लिए समस्त विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा की गई है।
इसमें शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, पर्यटन की सुविधाओं व सड़कों की चौड़ाई बढ़ाए जाने के अलावा सभी विभागों के नए प्रस्तावों को शामिल किया गया है। नियोजित मास्टर प्लान के लिए समस्त विभागों के प्रस्तावों को देखा गया है।
इसमें सभी विभागों की ओर से प्रस्तावित विकास योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता और भूमि के विकास की प्रकृति पर चर्चा की गई। इसमें पाया गया है कि अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने के लिए कॉमर्शियल क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा।
योजनाओं के अनुरूप विभागों को सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जिससे पर्यटक व श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। बैठक में यह तय किया गया है कि अयोध्या जिले सभी हाईवे व प्रस्तावित हाईवे से सटे इलाके की 50 मीटर दूरी (अयोध्या विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में) कॉमर्शियल होगी।
इसके पीछे के इलाके इंडस्ट्रियल जोन व उसके पीछे के इलाके रजीडेंशियल जोन में होंगे। इसके साथ ही अयोध्या के अंदर सभी परिक्रमा 84 कोसी, 14 कोसी व पांच कोसी मार्ग की चौड़ाई को 30 मीटर किया जाएगा।
पर्यटकों की सुविधा की दृष्टि से नई ट्रैफिक व्यवस्था का संचालन भी किया जाएगा। इसके साथ ही नव्य अयोध्या के आसपास के इलाके के लिए क्षेत्र को कामर्शियल जोन में रखा जाएगा। इसमें पर्यटकों को ठहरने, खाने व अन्य सुविधाएं विश्व स्तरीय देने का प्लान है।
बैठक में मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल, जिलाधिकारी अनुज झा, वीसी अयोध्या विकास प्राधिकरण विशाल सिंह, सचिव सत्य प्रकाश सिंह, वित्त अधिकारी रवींद्र प्रताप सिंह समेत 32 विभागों के अधिकारी शामिल रहे।
अयोध्या में विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं देने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं सोमवार को अपने-अपने प्रस्तावों में संशोधन कर पेश करें। इसमें विभागों को यह तय करना है कि उनके विकास कार्य की प्रवृत्ति किस प्रकार की है।
इनके इलाके को कॉमर्शियल जोन में या अन्य जोन में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही विकास संबंधी प्रस्तावों के लिए बेहतर समन्वय बन सके इसके लिए सड़क समेत अन्य सुविधाएं का खाका तैयार किया जाए।
इसमें सबके अलावा शहर की मौजूदा आबादी व फ्लोटिंग आबादी को जोड़कर प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है। मास्टर प्लान 2031 के लिए अयोध्या के पुराने विकास क्षेत्र का सर्वे करने वाली कंपनी स्टेसलिट ने बैठक में अपना फाइनल ड्राफ्ट पेश किया है।
मंडलायुक्त ने समस्त विभागों को निर्देश दिया है कि मास्टर प्लान 2031 के बजाय 2051 का बनाया जाए। इसके लिए सभी विभाग अपने अपने प्रस्तावों में 2051 की आबादी का ग्राफ व 2051 की फ्लोटिंग आबादी का ग्राफ देखकर तैयार करें।
जिससे हर दस वर्ष पर मास्टर प्लान बनाने की नौबत न आए। अमृत योजना के तहत बन रहे मास्टर प्लान का डेटा फिलहाल अभी हैदराबाद एनआईसी के पास है।
इसमें सर्वे कंपनी की ओर से किए गए सर्वे की 1600 शीटों को समाहित करने का कार्य किया जा रहा है। इस शीट की वापसी के टाउन प्लानिंग विभाग बेस डेटा पर आधारित मास्टर प्लान बनाएगा। यही फाइनल मास्टर प्लान होगा।