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राम विवाह के उल्लास में रात भर डूबी रही अयोध्या
फैजाबाद/अमरउजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Dec 2015 11:29 PM IST
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‘जैसन सीता जी हमार वैसन कतऊ केहू न, जैसन पहुना हमार वैसन कतऊ केहू न...’ ‘आज मंडप में शोर फैले सिय की छाया पड़त करिया बाबू गोर भइल’, ‘देख टुकुर-टुकुर ताके केहू ठुमक-ठुमक तुम्हे हम अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा’ जैसे विवाह के गीत व गारी का गायन मठ-मंदिरों में गुंजायमान होती रही।
संत-धर्माचार्य व श्रद्धालुओं ने दूसरे दिवस लौकिक व वैदिक परंपरा के अनुसार कलेवा, नेग व न्यौछावर रस्म के दौरान अपनी आस्था निवेदित की। देर शाम तक मंदिरों में आयोजित विवाहोत्सव के आयोजन शबाब पर रहे। बुधवार की शाम श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की बारात के मिथिला में पहुंचने के बाद चारों भाइयों का विवाह देर रात तक वैदिक रीति-रिवाज के साथ आयोजित हुआ।
एक तरफ वेद मंत्रों की गूंज के बीच फेरे लिए जाते रहे तो दूसरी तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीत-संगीत की धुन में श्रद्धालु भक्त निमग्न रहे। विवाह के बाद श्रीसीताराम परंपरानुसार कलेवा, नेग व न्यौछावर रस्मों का आयोजन गुरुवार को आयोजित हुआ।
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प्रसिद्ध विअहुति भवन, दशरथ महल बड़ा स्थान , कनक भवन, रामसखी मंदिर, दिव्यकला कुंज, रंग महल, जानकी महल ट्रस्ट, मंत्रार्थ मंडपम, श्रीराम बल्लभाकुंज, सद्गुरु सदन आदि मंदिरों में कलेवा रस्म का उल्लास देर शाम तक रहा। युगल उपासना से जुड़ी तुलसीनगर स्थित विअहुति भवन सीताराम विवाह की जीवंतता प्रगाढ़ होती दिखी। बता दें कि विअहुति भवन में भगवान श्रीसीताराम की वर्ष भर विवाहोपासना की जाती है।
सीताराम विवाहोत्सव को ही ध्यान में रखकर पीठ में भगवान राम के पक्ष अयोध्या और सीता के पक्ष जनकपुर के रूप में स्थापित दो प्रखंड रास बिहारी कुंज और विअहुति भवन में देर रात व दूसरे दिवस देर शाम तक पारंपरिक विवाह रस्म का उल्लास प्रस्फुटित होता रहा।
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संत-धर्माचार्य व श्रद्धालुओं ने दूसरे दिवस लौकिक व वैदिक परंपरा के अनुसार कलेवा, नेग व न्यौछावर रस्म के दौरान अपनी आस्था निवेदित की। देर शाम तक मंदिरों में आयोजित विवाहोत्सव के आयोजन शबाब पर रहे। बुधवार की शाम श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की बारात के मिथिला में पहुंचने के बाद चारों भाइयों का विवाह देर रात तक वैदिक रीति-रिवाज के साथ आयोजित हुआ।
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एक तरफ वेद मंत्रों की गूंज के बीच फेरे लिए जाते रहे तो दूसरी तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीत-संगीत की धुन में श्रद्धालु भक्त निमग्न रहे। विवाह के बाद श्रीसीताराम परंपरानुसार कलेवा, नेग व न्यौछावर रस्मों का आयोजन गुरुवार को आयोजित हुआ।
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प्रसिद्ध विअहुति भवन, दशरथ महल बड़ा स्थान , कनक भवन, रामसखी मंदिर, दिव्यकला कुंज, रंग महल, जानकी महल ट्रस्ट, मंत्रार्थ मंडपम, श्रीराम बल्लभाकुंज, सद्गुरु सदन आदि मंदिरों में कलेवा रस्म का उल्लास देर शाम तक रहा। युगल उपासना से जुड़ी तुलसीनगर स्थित विअहुति भवन सीताराम विवाह की जीवंतता प्रगाढ़ होती दिखी। बता दें कि विअहुति भवन में भगवान श्रीसीताराम की वर्ष भर विवाहोपासना की जाती है।
सीताराम विवाहोत्सव को ही ध्यान में रखकर पीठ में भगवान राम के पक्ष अयोध्या और सीता के पक्ष जनकपुर के रूप में स्थापित दो प्रखंड रास बिहारी कुंज और विअहुति भवन में देर रात व दूसरे दिवस देर शाम तक पारंपरिक विवाह रस्म का उल्लास प्रस्फुटित होता रहा।